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उमर अब्दुल्ला की सरकार पर अपनों का दबाव, 25 विधायकों की नाराजगी से बढ़ी हलचल; अनुच्छेद 370 बना बड़ा मुद्दा

उमर अब्दुल्ला की सरकार पर अपनों का दबाव, 25 विधायकों की नाराजगी से बढ़ी हलचल; अनुच्छेद 370 बना बड़ा मुद्दा

जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला की मुश्किलें अपनी ही पार्टी के भीतर बढ़ती नजर आ रही हैं। नेशनल कॉन्फ्रेंस (NC) के कई विधायक हालिया मंत्रिमंडल विस्तार से नाराज बताए जा रहे हैं। मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, करीब 24 से 25 विधायकों ने पार्टी नेतृत्व के सामने अपनी मांगें रखी हैं। इनमें मंत्रिमंडल में बड़े बदलाव से लेकर मुख्यमंत्री के सलाहकार को हटाने और अनुच्छेद 370 की बहाली के लिए नए सिरे से प्रयास करने जैसी मांगें शामिल हैं।

रिपोर्टों में दावा किया गया है कि नाराज विधायकों ने पार्टी नेतृत्व को 14 दिन का समय दिया है। मांगें पूरी नहीं होने पर राजभवन जाकर समर्थन वापस लेने की चेतावनी देने की बात भी सामने आई है। हालांकि, नेशनल कॉन्फ्रेंस की ओर से इसे सरकार गिराने की औपचारिक घोषणा नहीं माना गया है। पार्टी के कुछ नेताओं ने बगावत की खबरों को खारिज करते हुए इसे आंतरिक चर्चा बताया है।

मंत्रिमंडल विस्तार के बाद क्यों बढ़ी नाराजगी?

27 अक्टूबर को उमर अब्दुल्ला ने मंत्रिमंडल का विस्तार करते हुए नेशनल कॉन्फ्रेंस के चार विधायकों अली मोहम्मद सागर, मीर सैफुल्ला, शमीमा फिरदौस और अल्ताफ अहमद वानी को मंत्री बनाया था।

इस फैसले के बाद कुछ वरिष्ठ विधायक खुद को नजरअंदाज किए जाने से नाराज बताए जा रहे हैं। पूर्व विधानसभा अध्यक्ष और वरिष्ठ नेता अब्दुल रहीम राथर सहित कुछ अन्य नेताओं को मंत्रिमंडल में जगह नहीं मिलने को भी असंतोष की एक वजह बताया गया है।

इसी नाराजगी के बीच पार्टी विधायक कैसर जमशेद लोन के आवास पर विधायकों की बैठक होने की खबर सामने आई। कुछ रिपोर्टों में बैठक में 18 विधायकों के शामिल होने और अन्य विधायकों के ऑनलाइन जुड़ने की बात कही गई है। हालांकि, अलग-अलग रिपोर्टों में नाराज विधायकों की संख्या 24 से 25 तक बताई गई है।

नाराज विधायकों की क्या हैं प्रमुख मांगें?

मीडिया रिपोर्टों और सूत्रों के हवाले से सामने आई जानकारी के अनुसार, नाराज विधायकों ने पार्टी नेतृत्व के सामने कई मांगें रखी हैं। इनमें प्रमुख रूप से ये बातें शामिल हैं:

  1. मौजूदा मंत्रिमंडल में व्यापक फेरबदल किया जाए और मंत्रियों की जिम्मेदारियों की समीक्षा हो।
  2. मुख्यमंत्री के सलाहकार नासिर असलम वानी को पद से हटाया जाए।
  3. नए मंत्रिमंडल के गठन में विधायकों से सलाह ली जाए और फैसले पारदर्शी तरीके से हों।
  4. पार्टी के चुनावी घोषणापत्र में किए गए वादों को समयबद्ध तरीके से पूरा करने की योजना बनाई जाए।
  5. जम्मू-कश्मीर का पूर्ण राज्य का दर्जा और अनुच्छेद 370 तथा 35ए से जुड़े मुद्दों पर पार्टी अपना राजनीतिक रुख मजबूती से रखे।

इन मांगों को लेकर पार्टी नेतृत्व और असंतुष्ट विधायकों के बीच बातचीत की स्थिति पर सबकी नजर बनी हुई है।

सांसद रुहुल्लाह मेहदी का रुख भी बढ़ा रहा है दबाव

नेशनल कॉन्फ्रेंस के भीतर चल रही नाराजगी के बीच श्रीनगर से सांसद आगा सैयद रुहुल्लाह मेहदी का मामला भी चर्चा में है। उन्होंने पार्टी नेतृत्व पर अपने चुनावी वादों से पीछे हटने का आरोप लगाया है। मेहदी ने 3 नवंबर को नेशनल कॉन्फ्रेंस और लोकसभा सदस्यता से इस्तीफा देने की घोषणा की है।

उनका कहना है कि पार्टी ने चुनाव के दौरान अनुच्छेद 370 की बहाली, कैदियों की रिहाई और जम्मू-कश्मीर के अधिकारों की सुरक्षा जैसे मुद्दों को उठाया था, लेकिन सत्ता में आने के बाद इन पर अपेक्षित कदम नहीं उठाए गए।

मेहदी लंबे समय से पार्टी नेतृत्व और उमर अब्दुल्ला सरकार की नीतियों पर सवाल उठाते रहे हैं। उनके इस रुख ने पार्टी के भीतर चल रही राजनीतिक खींचतान को और चर्चा में ला दिया है।

अनुच्छेद 370 की बहाली बना असंतोष का अहम मुद्दा

जम्मू-कश्मीर में अनुच्छेद 370 का मुद्दा नेशनल कॉन्फ्रेंस की राजनीति और चुनावी वादों से जुड़ा रहा है। पार्टी के भीतर असंतुष्ट नेताओं का मानना बताया जा रहा है कि सरकार को इस मुद्दे पर केंद्र सरकार के सामने अधिक मजबूती से अपनी बात रखनी चाहिए।

इसके अलावा जम्मू-कश्मीर को पूर्ण राज्य का दर्जा दिलाने और चुनावी घोषणापत्र में किए गए वादों को पूरा करने की मांग भी उठाई जा रही है। यही वजह है कि मौजूदा असंतोष केवल मंत्रिमंडल में पदों के बंटवारे तक सीमित नहीं दिख रहा, बल्कि पार्टी की राजनीतिक दिशा और चुनावी प्रतिबद्धताओं से भी जुड़ गया है।

नेशनल कॉन्फ्रेंस के पास कितने विधायक हैं?

जम्मू-कश्मीर विधानसभा में कुल 90 सीटें हैं। नेशनल कॉन्फ्रेंस के पास 41 विधायक हैं। पार्टी ने कांग्रेस, निर्दलीय और अन्य सहयोगियों के समर्थन से सरकार बनाई है।

इस बीच पार्टी विधायक हिलाल अकबर लोन ने बगावत की अटकलों को खारिज करते हुए कहा है कि पार्टी और नेतृत्व के प्रति उनकी निष्ठा किसी पद या जिम्मेदारी से बड़ी है। उनका कहना है कि कुछ नेताओं की बैठक को गलत अर्थों में पेश किया जा रहा है।

फिलहाल सरकार गिरने की कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है। विधायकों की नाराजगी, सांसद रुहुल्लाह मेहदी के इस्तीफे की घोषणा और अनुच्छेद 370 को लेकर उठ रही मांगों के बीच आने वाले दिनों में नेशनल कॉन्फ्रेंस का नेतृत्व किस तरह स्थिति संभालता है, इस पर राजनीतिक नजरें टिकी हैं।

डिस्क्लेमर: इस लेख में विधायकों की नाराजगी और उनकी मांगों से जुड़ी बातें मीडिया रिपोर्टों तथा सूत्रों के हवाले से सामने आई जानकारी पर आधारित हैं। पार्टी के भीतर की स्थिति और सरकार के भविष्य को लेकर अंतिम निष्कर्ष आधिकारिक घटनाक्रम के बाद ही स्पष्ट होगा।

— Satya Report

contact.satyareport@gmail.com

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