
बच्चों की सुरक्षा हर माता-पिता की सबसे बड़ी चिंता होती है। स्कूल, पार्क, मॉल या किसी सार्वजनिक जगह पर बच्चे कई बार माता-पिता से दूर हो जाते हैं। ऐसे में उन्हें सुरक्षित रहने के तरीके सिखाना बेहद जरूरी है। बच्चों को छोटी उम्र से ही यह समझाना चाहिए कि अनजान व्यक्ति से कैसे सावधान रहना है, किसी मुसीबत में किससे मदद मांगनी है और माता-पिता से बिछड़ जाने पर क्या करना है।
बच्चों को डराने के बजाय उन्हें समझदारी और आत्मविश्वास के साथ ऐसी परिस्थितियों का सामना करना सिखाना चाहिए। यहां जानिए पांच जरूरी सुरक्षा नियम, जिन्हें हर माता-पिता को अपने बच्चों को सिखाना चाहिए।
1. बच्चे की हालिया तस्वीर और पहचान संबंधी जानकारी रखें
माता-पिता को समय-समय पर अपने बच्चे की साफ तस्वीर खींचकर सुरक्षित रखनी चाहिए। बच्चों की उम्र बढ़ने के साथ उनका चेहरा और शारीरिक बनावट बदलती रहती है। इसलिए हालिया तस्वीर आपात स्थिति में पहचान करने में मददगार हो सकती है।
बच्चे की लंबाई, बालों का रंग, शरीर पर मौजूद कोई खास निशान और उस दिन पहने हुए कपड़ों की जानकारी भी ध्यान में रखें। बच्चे की तस्वीर और निजी जानकारी सोशल मीडिया पर सार्वजनिक करने से बचें।
2. अनजान लोगों के बहकावे में न आने दें
बच्चों को समझाएं कि कोई अनजान व्यक्ति उन्हें चॉकलेट, खिलौने, पालतू जानवर दिखाने या कहीं घुमाने का लालच देकर अपने साथ ले जाने की कोशिश कर सकता है।
अगर कोई व्यक्ति कहे कि उसकी गाड़ी तक सामान पहुंचा दो, उसका पालतू जानवर खोजने में मदद करो या तुम्हारे माता-पिता ने मुझे लेने भेजा है, तो बच्चा उसके साथ न जाए। उसे सिखाएं कि किसी भी अनजान व्यक्ति के साथ जाने से पहले माता-पिता या भरोसेमंद अभिभावक से पुष्टि करना जरूरी है।
यह भी बताएं कि खतरा केवल अनजान व्यक्ति से ही नहीं हो सकता। इसलिए बच्चे को किसी परिचित व्यक्ति के साथ भी तभी जाना चाहिए, जब माता-पिता ने पहले से इसकी अनुमति दी हो।
3. सार्वजनिक स्थानों पर बच्चे को अकेला न छोड़ें
मॉल, बाजार, रेलवे स्टेशन, सिनेमा हॉल और सार्वजनिक शौचालय जैसी जगहों पर बच्चों पर विशेष ध्यान देना चाहिए। छोटे बच्चों को सार्वजनिक शौचालय में अकेले न भेजें और उनकी उम्र के अनुसार उनके साथ रहें।
बच्चों को यह भी बताएं कि अगर वे किसी जगह पर असहज महसूस करें या कोई व्यक्ति उन्हें परेशान करे, तो तुरंत माता-पिता, सुरक्षा कर्मचारी या किसी भरोसेमंद बड़े व्यक्ति को इसकी जानकारी दें।
4. खतरे में जोर से मदद मांगना सिखाएं
बच्चों को केवल चुप रहने या किसी की बात मानने की सीख न दें, बल्कि यह भी बताएं कि खतरा महसूस होने पर उन्हें जोर से आवाज लगानी चाहिए।
उन्हें सिखाएं कि अगर कोई जबरदस्ती अपने साथ ले जाने की कोशिश करे तो वे चिल्लाकर कह सकते हैं, “मैं इस व्यक्ति को नहीं जानता”, “मुझे बचाइए” या “मेरे माता-पिता को बुलाइए।”
बच्चों को यह समझाना जरूरी है कि अपनी सुरक्षा के लिए जोर से बोलना गलत नहीं है। उन्हें यह भी बताएं कि किसी के गलत व्यवहार या अनुचित स्पर्श के बारे में माता-पिता को तुरंत बताएं, चाहे वह व्यक्ति कितना भी परिचित क्यों न हो।
5. माता-पिता से बिछड़ने पर क्या करना है, यह बताएं
मॉल, मेले, थिएटर या भीड़भाड़ वाली जगह पर जाने से पहले बच्चे को वहां मौजूद सुरक्षा डेस्क, सूचना केंद्र या किसी तय सुरक्षित स्थान के बारे में बताएं।
अगर बच्चा माता-पिता से बिछड़ जाए तो उसे किसी सुरक्षित, सार्वजनिक और कर्मचारियों की निगरानी वाले स्थान पर रुकना सिखाएं। वह वहां मौजूद सुरक्षा कर्मचारी, पुलिसकर्मी या अधिकृत स्टाफ से मदद मांग सकता है।
बच्चे को यह भी बताएं कि किसी अनजान व्यक्ति के साथ दूसरी जगह नहीं जाना है, भले ही वह मदद करने का दावा करे। परिवार के साथ पहले से एक आपातकालीन संपर्क नंबर और मिलने की जगह तय करना भी उपयोगी हो सकता है।
माता-पिता भी रखें इन बातों का ध्यान
बच्चों को सुरक्षा के नियम सिखाने के साथ माता-पिता को भी कुछ सावधानियां बरतनी चाहिए।
- बच्चे को स्कूल या गतिविधियों से लेने कौन आएगा, इसकी जानकारी पहले से दें।
- बच्चे को परिवार का कम से कम एक फोन नंबर याद करवाएं।
- सोशल मीडिया पर बच्चे की लोकेशन, स्कूल और रोजाना की दिनचर्या साझा न करें।
- बच्चे की बात ध्यान से सुनें और उसे किसी भी परेशानी के बारे में बिना डर बताए जाने का भरोसा दें।
- सुरक्षा से जुड़े नियमों का समय-समय पर अभ्यास करवाएं, ताकि जरूरत पड़ने पर बच्चा घबराए नहीं।
बच्चों की सुरक्षा केवल उनकी जिम्मेदारी नहीं है। माता-पिता की सतर्कता, सही मार्गदर्शन और बच्चों के साथ खुलकर बातचीत उन्हें कई जोखिमों से बचाने में मदद कर सकती है।
डिस्क्लेमर: यह लेख सामान्य बाल सुरक्षा जागरूकता के उद्देश्य से तैयार किया गया है। हर परिस्थिति अलग हो सकती है। बच्चों की उम्र के अनुसार सुरक्षा नियम समझाएं और आपात स्थिति में स्थानीय पुलिस या संबंधित सुरक्षा एजेंसियों से संपर्क करें।
— Satya Report



