
बाड़मेर, राजस्थान: मेडिकल कॉलेज में जूनियर छात्रों के साथ कथित रैगिंग और अनुचित व्यवहार का मामला सामने आने के बाद प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई की है। कॉलेज की एंटी रैगिंग कमेटी की जांच के आधार पर कुल 80 छात्रों के खिलाफ अनुशासनात्मक कदम उठाए गए हैं। इनमें 15 छात्राएं भी शामिल हैं। कार्रवाई के तहत 13 छात्रों को हॉस्टल से निष्कासित कर दिया गया है।
जांच में सामने आया कि कुछ सीनियर छात्र प्रथम वर्ष के विद्यार्थियों पर अपना परिचय देने का दबाव बनाते थे। इसके अलावा WhatsApp ग्रुप और चैट में अभद्र भाषा का इस्तेमाल करने तथा सोशल मीडिया पर आपत्तिजनक पोस्ट साझा करने के आरोप भी मिले हैं।
‘व्हाइट हाउस’ नाम के कमरे में ले जाने का आरोप
शिकायतों में एक गंभीर आरोप यह भी सामने आया कि कुछ जूनियर छात्रों को ‘व्हाइट हाउस’ नाम के कमरे में ले जाया गया था। वहां कथित तौर पर उनके बाल जबरन काटे गए। इस घटना को लेकर जूनियर छात्रों की शिकायत के बाद कॉलेज प्रशासन ने मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच शुरू की।
बाड़मेर मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल अनूप सिंह गुर्जर के मुताबिक, एंटी रैगिंग कमेटी ने शिकायतों की अलग-अलग जांच की। इसमें जूनियर और सीनियर छात्रों से बातचीत करने के साथ उनके मोबाइल फोन में मौजूद डिजिटल सामग्री भी खंगाली गई। WhatsApp चैट, सोशल मीडिया पोस्ट और उपलब्ध रिकॉर्डिंग की जांच की गई। पूरी प्रक्रिया में करीब तीन से चार घंटे लगे।
WhatsApp चैट और सोशल मीडिया सामग्री बनी कार्रवाई का आधार
प्रिंसिपल के अनुसार, जांच के दौरान ऐसी बातचीत मिली जिसमें सीनियर छात्र जूनियर विद्यार्थियों से परिचय देने की मांग कर रहे थे। कुछ चैट और सोशल मीडिया सामग्री में आपत्तिजनक बातें तथा अभद्र भाषा भी पाई गई। कॉलेज प्रशासन ने संबंधित छात्रों के मोबाइल फोन लेकर डिजिटल सबूतों की जांच की।
हालांकि, कमेटी की जांच में जूनियर छात्रों के साथ शारीरिक मारपीट की पुष्टि नहीं हुई। प्रशासन ने उपलब्ध शिकायतों और डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर छात्रों की भूमिका के अनुसार अलग-अलग सजा तय की।
13 छात्रों को हॉस्टल से निकाला, कई पर पढ़ाई को लेकर भी पाबंदी
कॉलेज प्रशासन की कार्रवाई के तहत छह छात्रों को हॉस्टल से निष्कासित करने के साथ 60 दिनों के लिए शैक्षणिक गतिविधियों से प्रतिबंधित किया गया है। इस अवधि में वे लेक्चर, प्रैक्टिकल, क्लिनिकल पोस्टिंग और परीक्षाओं में शामिल नहीं हो सकेंगे। इन छात्रों पर एक साल तक सांस्कृतिक और खेल गतिविधियों में हिस्सा लेने की रोक भी लगाई गई है।
वहीं, सात अन्य छात्रों को हॉस्टल से निकालकर 30 दिनों के लिए शैक्षणिक, सांस्कृतिक और खेल गतिविधियों से प्रतिबंधित किया गया है।
इसके अलावा 11 छात्रों को 30 दिनों के लिए हॉस्टल से हटाया गया है। इन पर 15 दिनों तक शैक्षणिक गतिविधियों से निलंबन और एक साल तक सांस्कृतिक व खेल गतिविधियों में भाग लेने पर रोक लगाई गई है। बाकी छात्रों के खिलाफ भी उनकी भूमिका और जांच में सामने आए तथ्यों के आधार पर अलग-अलग कार्रवाई की गई है।
नेशनल हेल्थ कमीशन को भी भेजी गई रिपोर्ट
पीटीआई की रिपोर्ट के मुताबिक, कॉलेज प्रशासन ने 29 अक्टूबर को नेशनल हेल्थ कमीशन को जांच रिपोर्ट सौंप दी थी। आयोग ने रैगिंग की शिकायतों को लेकर कॉलेज से जवाब मांगा था। इसके बाद एंटी रैगिंग कमेटी ने छात्रों के बयान, शिकायतों और डिजिटल साक्ष्यों की समीक्षा कर रिपोर्ट तैयार की।
इस कार्रवाई के बाद कॉलेज परिसर में रैगिंग के खिलाफ अनुशासनात्मक व्यवस्था को लेकर चर्चा तेज हो गई है। प्रशासन की ओर से की गई कार्रवाई का आधार कमेटी की जांच रिपोर्ट को बताया गया है।
Satya Report डिस्क्लेमर: यह खबर उपलब्ध मीडिया रिपोर्ट और कॉलेज प्रशासन के बयानों पर आधारित है। आरोपों और अनुशासनात्मक कार्रवाई से जुड़ी जानकारी संबंधित जांच रिपोर्ट के आधार पर दी गई है।



