
बचपन में बच्चों के व्यवहार में बदलाव आना कई बार परिवार के लिए चिंता का कारण बन जाता है। खासकर जब बच्चा किसी ऐसी बात पर अड़ जाए, जिसे परिवार के लोग समझ नहीं पा रहे हों। उत्तर प्रदेश के कानपुर में सामने आया एक पुराना मामला भी कुछ ऐसा ही था। यहां 10 साल के एक बच्चे के व्यवहार को लेकर पूरा परिवार परेशान हो गया था।
यह मामला कानपुर देहात क्षेत्र के एक परिवार से जुड़ा था। घर में पति-पत्नी और उनके चार बच्चे रहते थे। परिवार के साथ बच्चे की नानी और मौसी भी रहती थीं। सब कुछ सामान्य चल रहा था, लेकिन कुछ समय बाद परिवार के सबसे छोटे बेटे के व्यवहार में बदलाव दिखाई देने लगा।
मौसी को लेकर करने लगा अजीब जिद
परिवार को पता चला कि 10 साल का बच्चा अपनी मौसी को लेकर असामान्य लगाव दिखा रहा है। रिपोर्ट के मुताबिक, वह बार-बार मौसी से शादी करने की बात कहता था। इतना ही नहीं, अगर मौसी किसी दूसरे पुरुष से बातचीत करतीं तो बच्चा नाराज होकर विवाद करने लगता था।
परिवार का आरोप था कि वह मौसी के आने-जाने और उनके व्यवहार पर भी रोक लगाने की कोशिश करता था। विरोध करने पर वह घर के लोगों से बहस और बदसलूकी करने लगता था। उसकी जिद इतनी बढ़ गई थी कि परिवार के लिए उसे समझाना मुश्किल हो गया था।
परिवार ने विशेषज्ञ से ली मदद
बच्चे के व्यवहार में लगातार बदलाव देखकर परिवार ने उसे डांटने या सजा देने के बजाय विशेषज्ञ की मदद लेने का फैसला किया। वे उसे मनोचिकित्सक के पास लेकर पहुंचे, ताकि उसके व्यवहार के पीछे की वजह समझी जा सके।
मीडिया रिपोर्ट में एक मनोचिकित्सक ने संभावना जताई थी कि इंटरनेट पर उपलब्ध कुछ अनुचित सामग्री बच्चों के व्यवहार और सोच को प्रभावित कर सकती है। हालांकि, केवल इस आधार पर बच्चे के व्यवहार की वजह तय नहीं की जा सकती थी। उसकी काउंसलिंग कराई जा रही थी और चिकित्सकीय जांच भी की गई थी।
बच्चों के व्यवहार में बदलाव को नजरअंदाज न करें
यह मामला इस बात की ओर ध्यान दिलाता है कि कम उम्र में बच्चों के व्यवहार में असामान्य बदलाव दिखाई देने पर परिवार को सतर्क रहना चाहिए। बच्चे को अपमानित करने, डराने या उसकी बातों का मजाक उड़ाने के बजाय धैर्य से उसकी बात सुनना और बाल मनोवैज्ञानिक या योग्य विशेषज्ञ की मदद लेना जरूरी है।
बच्चों की इंटरनेट गतिविधियों पर उम्र के अनुसार निगरानी रखना और उन्हें रिश्तों, निजी सीमाओं तथा सही-गलत व्यवहार की समझ देना भी परिवार की अहम जिम्मेदारी है।
Satya Report डिस्क्लेमर: यह वर्ष 2023 में प्रकाशित पुरानी समाचार रिपोर्ट में उपलब्ध जानकारी के आधार पर तैयार किया गया लेख है। बच्चे की पहचान और निजता की रक्षा को ध्यान में रखते हुए व्यक्तिगत विवरण शामिल नहीं किए गए हैं।



