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​गोल्ड बार्स और कॉइंस में दिखाई ताकत! चीन के बाद दूसरे नंबर पर पहुंचा भारत

वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल की मंगलवार को जारी ‘इंडिया फोकस’ रिपोर्ट के अनुसार, सितंबर तिमाही में भारत में सोने के निवेश का सबसे बड़ा जरिया ‘बार और सिक्के’ रहे. इनकी मांग पिछली तिमाही के मुकाबले 9% बढ़कर 55 टन हो गई, हालांकि पिछले साल की इसी अवधि के मुकाबले इसमें 40 फीसदी की गिरावट आई. यह गिरावट एक तरफ तो पिछले साल के हाई बेस के कारण दिखी, और दूसरी तरफ कीमतों में तेजी की रफ्तार कम होने से निवेशकों की खरीदारी में भी नरमी आई.

​गोल्ड बार्स और कॉइंस में दिखाई ताकत! चीन के बाद दूसरे नंबर पर पहुंचा भारत

मई में सोने पर आयात शुल्क में 9 प्रतिशत अंकों की बढ़ोतरी का असर भी मांग पर पड़ा. WGC के अनुसार, उनके आर्थिक मॉडल बताते हैं कि आयात शुल्क और आय में बदलाव का ‘बार और सिक्कों’ की मांग पर काफी असर पड़ता है. संस्था ने कहा कि शुल्क बढ़ने और पाबंदियां लगने से आमतौर पर मांग कम हो जाती है. रिपोर्ट के मुताबिक, सालाना आधार पर गिरावट के बावजूद, चीन के बाद भारत ‘बार और सिक्कों’ के लिए दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा बाजार बना रहा. सितंबर तिमाही में ग्लोबल डिमांड में भारत की हिस्सेदारी लगभग 21 फीसदी रही.

निवेश की मांग

WGC ने बताया कि सितंबर तिमाही में सोने में कुल निवेश की मांग पिछली तिमाही के मुकाबले 12 फीसदी बढ़कर लगभग 60 टन हो गई. हालांकि, कीमतों में तेजी की रफ्तार कम होने के कारण, यह 2025 की दूसरी छमाही और 2026 की पहली तिमाही के हाई लेवल्स से कुछ कम रही.

मार्च तिमाही में निवेश की ओर जो भारी झुकाव दिखा था—जब निवेश की मांग, आभूषणों की मांग से भी आगे निकल गई थी—उसमें भी अब नरमी आई है. सितंबर तिमाही में भारत की कुल सोने की मांग में निवेश का हिस्सा लगभग 42% रहा, जो मार्च तिमाही में 69% था.

इसके बावजूद, निवेश की मांग काफी हद तक मजबूत बनी रही. 2026 के पहले नौ महीनों में, इसमें पिछले साल के मुकाबले केवल 4% की गिरावट आई, जबकि इसी दौरान आभूषणों की मांग में 18% की कमी देखी गई. रिपोर्ट के अनुसार, इससे पता चलता है कि सोने की ऊंची कीमतों का असर निवेश के लिए की जाने वाली खरीदारी पर कम पड़ा है.

गोल्ड ETF

गोल्ड एक्सचेंजट्रेडेड फंड ने निवेशकों का ध्यान खींचना जारी रखा. WGC के अनुसार, सितंबर तिमाही में मांग 3.6 टन से बढ़कर 5.3 टन हो गई, जिससे कुल होल्डिंग लगभग 124 टन तक पहुंच गई.

अक्टूबर के मिड में, म्यूचुअल फंड हाउसेस ने ‘गोल्ड फंड ऑफ फंड्स’ में नए सब्सक्रिप्शन को कुछ समय के लिए रोक दिया, जबकि मौजूदा सिस्टेमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान और गोल्ड ETF में सीधे निवेश को जारी रखने की अनुमति दी.

WGC का कहना है कि इस घटनाक्रम पर नजर रखने की जरूरत है, क्योंकि FoF के तहत मैनेज की जाने वाली संपत्ति , गोल्ड ETF की संपत्ति के लगभग एक तिहाई के बराबर है. हालांकि, चूंकि मौजूदा FoF SIPs और सीधे ETF निवेश जारी रह सकते हैं, इसलिए कुल ETF प्रवाह पर इसका असर सीमित रहने की उम्मीद है.

डिजिटल गोल्ड की लोकप्रियता बढ़ी

सोने में निवेश अब पारंपरिक तरीकों से आगे बढ़ रहा है. सितंबर तिमाही में डिजिटल गोल्ड की कुल खरीदारी लगभग 4.9 टन रही. यह पिछली तिमाही के मुकाबले लगभग स्थिर है, लेकिन एक साल पहले के 3.4 टन के आंकड़े से अधिक है.

2026 के पहले 9 महीनों में, डिजिटल गोल्ड की मांग 76 फीसदी बढ़कर 16.3 टन हो गई, जो पिछले साल की इसी अवधि में 9.2 टन थी. WGC के अनुसार, इस वृद्धि का कारण डिजिटल गोल्ड की आसान उपलब्धता और सुविधा है, साथ ही इसमें न्यूनतम निवेश की जरूरत भी बहुत कम होती है.

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