
मौसम बदलने के साथ सर्दी-जुकाम और फ्लू के मामले बढ़ने लगते हैं। आमतौर पर फ्लू कुछ दिनों में ठीक हो सकता है, लेकिन अस्थमा से पीड़ित लोगों के लिए यह संक्रमण ज्यादा परेशानी पैदा कर सकता है। इसकी वजह यह है कि फ्लू का वायरस सांस की नलियों में सूजन बढ़ा सकता है, जिससे पहले से संवेदनशील श्वसन तंत्र पर अतिरिक्त असर पड़ता है।
ऐसी स्थिति में खांसी, घरघराहट, सीने में जकड़न और सांस फूलने जैसी समस्याएं बढ़ सकती हैं। कुछ मरीजों में अस्थमा का गंभीर अटैक भी आ सकता है। हालांकि, हर अस्थमा मरीज को फ्लू होने पर गंभीर परेशानी हो, यह जरूरी नहीं है। सही सावधानी और समय पर इलाज से जोखिम कम करने में मदद मिल सकती है।
अस्थमा के मरीजों के लिए फ्लू ज्यादा गंभीर क्यों हो सकता है?
अस्थमा एक ऐसी स्थिति है जिसमें सांस की नलियों में सूजन और संवेदनशीलता बनी रहती है। कुछ खास परिस्थितियों में ये नलियां सिकुड़ सकती हैं, जिससे हवा का आना-जाना मुश्किल हो जाता है।
फ्लू यानी इन्फ्लूएंजा एक वायरल संक्रमण है, जो नाक, गले और फेफड़ों को प्रभावित कर सकता है। जब अस्थमा से पीड़ित व्यक्ति को फ्लू होता है, तो संक्रमण के कारण सांस की नलियों में सूजन और जलन बढ़ सकती है।
इससे अस्थमा के लक्षण पहले से ज्यादा गंभीर हो सकते हैं। कुछ लोगों को सामान्य से अधिक इनहेलर की जरूरत पड़ सकती है, जबकि गंभीर मामलों में अस्पताल में इलाज की आवश्यकता भी हो सकती है।
फ्लू वायरस सांस की नलियों में सूजन कैसे बढ़ाता है?
फ्लू वायरस श्वसन तंत्र की कोशिकाओं को संक्रमित करता है। इसके जवाब में शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली सक्रिय होती है और सूजन पैदा करने वाली प्रतिक्रियाएं शुरू होती हैं।
अस्थमा के मरीजों में सांस की नलियां पहले से संवेदनशील होती हैं। ऐसे में संक्रमण के कारण सूजन बढ़ने, मांसपेशियों के सिकुड़ने और बलगम बनने से सांस का रास्ता और संकरा हो सकता है।
इसके कारण मरीज को:
- सांस लेते समय सीटी जैसी आवाज यानी व्हीजिंग सुनाई देना।
- सीने में जकड़न या दबाव महसूस होना।
- लगातार खांसी आना।
- सामान्य से ज्यादा सांस फूलना।
- रात में खांसी या सांस की परेशानी से नींद खुलना।
जैसी समस्याएं हो सकती हैं।
क्या अस्थमा के मरीजों में फ्लू के लक्षण अलग दिखाई देते हैं?
अस्थमा के मरीजों में फ्लू के सामान्य लक्षण दिखाई दे सकते हैं, लेकिन इसके साथ सांस संबंधी परेशानी भी बढ़ सकती है।
फ्लू के सामान्य लक्षण:
- अचानक बुखार या ठंड लगना।
- बदन और मांसपेशियों में दर्द।
- सिरदर्द और अत्यधिक थकान।
- गले में खराश।
- खांसी और नाक बहना।
- कुछ लोगों में उल्टी या दस्त भी हो सकते हैं।
अस्थमा बढ़ने के संकेत:
- सामान्य से अधिक खांसी या घरघराहट होना।
- सीने में जकड़न बढ़ना।
- सांस लेने में पहले से ज्यादा परेशानी होना।
- रात में खांसी या सांस फूलने से नींद खुलना।
- रिलीवर इनहेलर की जरूरत सामान्य से अधिक पड़ना।
फ्लू और अस्थमा के लक्षण एक साथ दिखाई दे सकते हैं। इसलिए केवल लक्षणों के आधार पर यह तय करना मुश्किल हो सकता है कि परेशानी कितनी गंभीर है।
सामान्य अस्थमा बढ़ने और गंभीर फ्लू संक्रमण में अंतर कैसे पहचानें?
अस्थमा बढ़ने पर मुख्य रूप से सांस की नलियों से जुड़े लक्षण तेज होते हैं, जैसे घरघराहट, सीने में जकड़न और सांस फूलना। दूसरी ओर, फ्लू में अक्सर बुखार, बदन दर्द, ठंड लगना और थकान जैसे पूरे शरीर को प्रभावित करने वाले लक्षण भी होते हैं।
हालांकि, दोनों स्थितियां एक साथ हो सकती हैं। फ्लू संक्रमण अस्थमा को बिगाड़ सकता है, इसलिए बुखार कम होने के बाद भी सांस की परेशानी बनी रह सकती है।
अगर सांस लेने में दिक्कत तेजी से बढ़ रही है, रिलीवर इनहेलर से राहत नहीं मिल रही या बोलने में परेशानी हो रही है, तो इसे गंभीर स्थिति मानकर तुरंत चिकित्सा सहायता लें।
अस्थमा के मरीज फ्लू से बचने के लिए क्या सावधानियां बरतें?
कुछ आसान उपाय संक्रमण और अस्थमा के बिगड़ने के जोखिम को कम करने में मदद कर सकते हैं।
1. फ्लू का टीका लगवाने पर डॉक्टर से बात करें
अस्थमा से पीड़ित लोगों को फ्लू होने पर जटिलताओं का जोखिम बढ़ सकता है। इसलिए सालाना इन्फ्लूएंजा वैक्सीन के बारे में डॉक्टर से सलाह लेना उपयोगी है। टीका संक्रमण को पूरी तरह रोकने की गारंटी नहीं देता, लेकिन गंभीर बीमारी का जोखिम कम करने में मदद कर सकता है।
2. अस्थमा की दवाएं नियमित लें
डॉक्टर ने जो कंट्रोलर इनहेलर या दूसरी दवाएं दी हैं, उन्हें अपने निर्देश के अनुसार लेते रहें। फ्लू होने पर भी बिना सलाह दवाएं बंद न करें।
3. हाथों की सफाई रखें
साबुन और पानी से नियमित हाथ धोएं। खांसते या छींकते समय मुंह और नाक ढकें। बीमार लोगों के नजदीकी संपर्क से बचने की कोशिश करें।
4. धुएं और प्रदूषण से बचें
सिगरेट का धुआं, धूल, तेज खुशबू और प्रदूषण अस्थमा के लक्षण बढ़ा सकते हैं। संक्रमण के दौरान इनसे दूरी बनाए रखना और भी जरूरी है।
5. पर्याप्त आराम और पानी लें
फ्लू के दौरान शरीर को आराम दें और पर्याप्त तरल पदार्थ लें। इससे कमजोरी और पानी की कमी से बचने में मदद मिल सकती है।
फ्लू होने पर अस्थमा के मरीज क्या करें?
अगर अस्थमा के मरीज को फ्लू जैसे लक्षण दिखाई दें, तो डॉक्टर से जल्द संपर्क करना चाहिए। फ्लू के लिए कुछ मरीजों में एंटीवायरल दवाओं की जरूरत हो सकती है। इनका फायदा बीमारी की शुरुआत में लेने पर अधिक हो सकता है, इसलिए इलाज में देरी न करें।
अपने डॉक्टर द्वारा दिए गए अस्थमा एक्शन प्लान का पालन करें। रिलीवर इनहेलर का इस्तेमाल निर्धारित निर्देशों के अनुसार करें। बिना चिकित्सकीय सलाह के इनहेलर की मात्रा बढ़ाना या स्टेरॉयड दवाएं शुरू करना सही नहीं है।
इन लक्षणों में तुरंत लें मेडिकल मदद
अगर मरीज को सांस लेने में गंभीर परेशानी हो, वह पूरे वाक्य बोल न पा रहा हो, होंठ या चेहरा नीला पड़ने लगे, भ्रम की स्थिति हो या रिलीवर इनहेलर से राहत न मिले, तो तुरंत आपातकालीन चिकित्सा सहायता लें।
फ्लू के दौरान सीने में दर्द, अत्यधिक कमजोरी या सांस की परेशानी लगातार बढ़ना भी गंभीर संकेत हो सकते हैं।
Satya Report डिस्क्लेमर: यह लेख सामान्य स्वास्थ्य जागरूकता के उद्देश्य से तैयार किया गया है। अस्थमा और फ्लू का असर हर व्यक्ति में अलग हो सकता है। दवाओं या इनहेलर में बदलाव डॉक्टर की सलाह से ही करें। सांस लेने में गंभीर परेशानी होने पर तुरंत चिकित्सा सहायता लें।



