Deoband News: उत्तर प्रदेश के देवबंद में महिला से सामूहिक दुष्कर्म के करीब 11 साल पुराने मामले में अदालत ने बड़ा फैसला सुनाया है. फास्ट ट्रैक कोर्टद्वितीय ने तत्कालीन थाना प्रभारी ब्रजमोहन यादव और तत्कालीन सब इंस्पेक्टर वेगपाल सिंह को 2020 साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई है. दोनों दोषियों पर एकएक लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है. इसके अलावा भारतीय दंड संहिता की धारा 506 के तहत दोनों को पांचपांच साल की अतिरिक्त सजा सुनाई गई है. दोनों आरोपी पुलिसकर्मी अब सेवानिवृत्त हो चुके हैं.

शुक्रवार को सजा का ऐलान होते ही करीब 11 साल पुराने इस मामले में कानूनी प्रक्रिया के एक अहम पड़ाव पर फैसला आया. गुरुवार को अदालत ने सजा के बिंदु पर सुनवाई के बाद निर्णय सुरक्षित रख लिया था. शुक्रवार को जब दोनों दोषियों को अदालत में पेशी के लिए लाया गया तो उनकी आंखों में आंसू दिखाई दिए. कोर्ट परिसर के बाहर मौजूद कुछ लोगों ने उन्हें देखकर टिप्पणी भी की. प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, कुछ लोगों ने कहा, ‘अब क्यों मुंह ढका है, तुमने तो बहुत लोगों को मारा है.
हाईकोर्ट में देंगे चुनौती
पीड़िता के अधिवक्ता राजीव तोमर ने बताया कि अदालत ने धारा 376डी के तहत दोनों को 2020 साल और धारा 506 के तहत पांचपांच साल की सजा सुनाई है. बचाव पक्ष ने आरोपियों की अधिक उम्र का हवाला देकर सजा में राहत देने की मांग की थी, लेकिन अदालत ने इसे स्वीकार नहीं किया.
पीड़िता ने फैसले पर संतुष्टि जताई है, हालांकि उसकी उम्मीद दोषियों को उम्रकैद की सजा मिलने की थी. अधिवक्ता के अनुसार, पीड़िता ने न्याय के लिए करीब 11 साल तक संघर्ष किया और इस दौरान मानसिक, शारीरिक तथा आर्थिक परेशानियों का सामना किया. वकील ने बताया कि उनका पैनल फैसले का अध्ययन कर रहा है. सजा बढ़ाकर आजीवन कारावास करने और पीड़िता को अधिक मुआवजा दिलाने के लिए हाईकोर्ट में अपील की जाएगी.
थाने में दुष्कर्म का आरोप
मामला 6 अगस्त 2015 का है। आरोप के मुताबिक, पति की गिरफ्तारी के बाद उसके बारे में जानकारी लेने देवबंद कोतवाली पहुंची महिला के साथ तत्कालीन एसएचओ समेत चार पुलिसकर्मियों ने सामूहिक दुष्कर्म किया था. पीड़िता का आरोप था कि उसे थाने के क्वार्टर में ले जाया गया, जहां वारदात को अंजाम दिया गया. विरोध करने पर उसके साथ आई दूसरी महिला से मारपीट भी की गई.
स्थानीय पुलिस और तत्कालीन एसएसपी से शिकायत के बावजूद कार्रवाई नहीं होने पर पीड़िता ने इलाहाबाद हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया. हाईकोर्ट के हस्तक्षेप के बाद मुकदमा दर्ज हुआ और जांच CBCID को सौंपी गई. CBCID ने जांच के बाद फाइनल रिपोर्ट लगा दी थी. पीड़िता ने अदालत में प्रोटेस्ट पिटीशन दाखिल कर रिपोर्ट को चुनौती दी.
कोर्ट ने सुनाई सजा
इस मामले में पंकज धामा नाम के एक दरोगा और एक अन्य सिपाही को भी नामजद किया गया था. अधिवक्ता राजीव तोमर का आरोप है कि पंकज धामा ने फर्जी दस्तावेजों के जरिए खुद को मानसिक रूप से अस्वस्थ साबित करने की कोशिश की. उन्होंने बताया कि उसके खिलाफ भी वारंट जारी हुए हैं और उसकी पत्रावली इसी अदालत में है. अधिवक्ता ने कहा कि वे उसे भी सजा दिलाने के लिए कानूनी लड़ाई जारी रखेंगे.



