
Neuralink TechnologyImage Credit source: Neuralink/X
हम सभी ऐसे भविष्य की ओर बढ़ रहे हैं जिसे हम केवल साइंस फिक्शन फिल्मों में ही देखा करते थे. जरा सोचिए कि लकवे (Paralysis) की वजह से एक व्यक्ति जिसके हाथ और पैर बिल्कुल भी काम नहीं कर रहे हैं, ऐसा व्यक्ति अपने दिमाग में सोचकर एक रोबॉटिक हाथ को कंट्रोल कर रहा है. चौंकना लाजमी है, ये सब आपको एक सपने जैसा लग रहा होगा या फिर किसी मूवी की स्क्रिप्ट लग रही होगी, लेकिन ये कोई फिल्म की कहानी नहीं है बल्कि हकीकत है.
की Neuralink की वजह से ऐसा हकीकत में हो रहा है, लकवे की वजह से हाथ-पैर नहीं चला पा रहा व्यक्ति भी आम इंसान की तरह इस रोबोटिक ऑर्म की मदद से खुद चम्मच से खाना खा सकता है. Neuralink ने एक वीडियो को X पर जारी किया है, जिसने टेक्नोलॉजी और चिकित्सा जगत में हलचल मचा दी है.
वायरल हो रही इस वीडियो में एक लकवाग्रस्त (Paralyzed) मरीज दिमाग में लगाए गए ब्रेन-इम्प्लांट की मदद से एक रोबॉटिक आर्म को कंट्रोल कर रहा है. कंपनी ने N1 चिप को मरीज के दिमाग में लगाया है, इस चिप में 1024 इलेक्ट्रोड लगे हैं, आसान भाषा में अगर समझें तो आप इन्हें हजारों छोटे माइक्रोफोन समझ सकते हैं जो दिमाग के सिग्नल को पकड़ने का काम करते हैं. वायरलेस तरीके से ये सिग्नल को बाहर भेजा जाता है और कंप्यूजर उन्हें रोबॉटिक ऑर्म तक पहुंचाता है.
Participants in our clinical trials have extended digital computer control to physical devices such as assistive robotic arms.
Over time, we plan to expand the range of devices controllable via Neuralink.
— Neuralink (@neuralink)
जरूरी है AI का रोल
दिमाग बहुत ही जटिल सिग्नल भेजता है. जब कोई मरीज सोचता है कि हाथ ऊपर उठाओ तो दिमाग में लाखों न्यूरॉन्स को सिग्नल मिलता है, ये सिग्नल ऐसे होते हैं जैसे कि मानो रेडियो पर एक-साथ कई चैनल बज रहे हो, शोर बहुत ज्यादा होता है और यहीं पर एआई का रोल शुरू होता है. एआई इस शोर को हटाकर कमांड को निकालता है. न्यूरालिंक का एआई दिमाग के पैटर्न को पढ़ता है, समझता है और फिर रोबृबॉट को आदेश देता है. मरीज जितना ज्यादा इसका इस्तेमाल करता है, उतना ही एआई बेहतर होता जाता है.
मेडिकल साइंस में क्रांति
मेडिकल साइंस के क्षेत्र में कई एक्सपर्ट्स इसे क्रांति बता रहे हैं, उनका कहना है कि ये टेक्नोलॉजी न केवल लकवे बल्कि स्पाइनल इंजरी और ALS (मांसपेशियो की बीमारी) से पीड़ित मरीजों के लिए भी एक नई किरण बन सकती है. न्यूरालिंक की मदद से न केवल रोबोटिक ऑर्म बल्कि भविष्य में और भी कई काम किए जा सकेंगे. इम्प्लांट में कितने पैसे खर्च होंगे, इसका फिलहाल साफ तौर पर कही जिक्र नहीं किया गया है.




