लखनऊ की किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी में STF की रिपोर्ट को लेकर बड़ा फैसला लिया गया है. विश्वविद्यालय की कार्य परिषद ने 30 अक्टूबर 2026 को शासन के माध्यम से प्राप्त STF की रिपोर्ट पर विचारविमर्श के बाद विश्वविद्यालय के अधिनियम और परिनियमावली के प्रावधानों के तहत डिसिप्लिनरी एक्शन कमेटी गठित करने का सर्वसम्मत निर्णय लिया है.

6 नवंबर को कुलपति की अध्यक्षता में हुई कार्य परिषद की विशेष बैठक में STF की पूरी रिपोर्ट, संबंधित तथ्यों और अभिलेखों पर चर्चा की गई. बैठक में कुछ शिक्षकों और कर्मचारियों की ओर से प्रस्तुत प्रत्यावेदनों को भी पढ़कर सुनाया गया. कार्य परिषद के सामने कुछ प्रत्यावेदनों में यह आपत्ति भी उठाई गई कि संबंधित समिति और STF की टिप्पणियों में कुछ लोगों के नाम गलत और अनुचित तरीके से शामिल किए गए हैं. इन आपत्तियों को संबंधित विभागीय समितियों के समक्ष रखने और तथ्यों की नियमानुसार समीक्षा करने का फैसला लिया गया.
कुलपति और कुलसचिव सहित छह सदस्यीय समिति
किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी की परिनियमावली के प्रावधान 1111 के तहत गठित होने वाली डिसिप्लिनरी एक्शन कमेटी में कुलपति और कुलसचिव के अलावा चार अन्य सदस्य होंगे. इनमें दो सदस्य विश्वविद्यालय के वर्तमान वरिष्ठ शिक्षकों में से संबंधित श्रेणियों के अनुसार नामित किए जाएंगे. वहीं, दो स्वतंत्र सदस्यों के रूप में वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों को शामिल किया जाएगा. इनमें वरिष्ठ पदों से सेवानिवृत्त IPS अधिकारियों को प्राथमिकता दी जाएगी.
STF रिपोर्ट और सभी पक्षों के तथ्यों की होगी जांच
कमेटी STF की पूरी रिपोर्ट, उससे जुड़े तथ्यों और अभिलेखों का विस्तृत परीक्षण करेगी. साथ ही संबंधित शिक्षकों और व्यक्तियों का पक्ष भी सुना जाएगा. विश्वविद्यालय के अधिनियम, परिनियमावली और लागू नियमों के अनुसार आगे की कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी.
2025 में STF ने शुरू की थी धर्म परिवर्तन के दावों की जांच
दरअसल, पिछले साल कथित धर्म परिवर्तन और ‘लव जिहाद’ के दावों के बाद STF ने जांच शुरू की थी. लखनऊ पुलिस ने इस साल जनवरी में यूनिवर्सिटी के पैथोलॉजी डिपार्टमेंट में जूनियर रेजिडेंट रमीजुद्दीन उर्फ रमीज मलिक और एक मेडिकल इंटर्न को दो अलगअलग मामलों में गिरफ्तार किया था. रमीजुद्दीन, जिसे 9 जनवरी को लखनऊ में गिरफ्तार किया गया था, उसपर दो महिलाओं का यौन शोषण करने और उनका धर्म बदलने की कोशिश करने का आरोप है. STF के इसी आरोप और दावे की जांच के लिए KGMU ने कमेटी बनाई है.


