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पांच बेटियां, दामाद और पूरा परिवार होने के बावजूद पिता के अंतिम सफर में कोई नहीं पहुंचा, आखिर में समाजसेवियों ने निभाया फर्ज

पांच बेटियां, दामाद और पूरा परिवार होने के बावजूद पिता के अंतिम सफर में कोई नहीं पहुंचा, आखिर में समाजसेवियों ने निभाया फर्ज

पानीपत, हरियाणा: एक पिता अपनी पूरी जिंदगी बच्चों का भविष्य संवारने और परिवार की जिम्मेदारियां निभाने में लगा देता है। उसे उम्मीद रहती है कि बुढ़ापे में उसके अपने बच्चे उसका सहारा बनेंगे। लेकिन हरियाणा के पानीपत से सामने आई एक घटना ने रिश्तों और पारिवारिक जिम्मेदारियों को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। यहां 65 वर्षीय बुजुर्ग की मौत के बाद उनकी पांच बेटियां, दामाद और परिवार का कोई सदस्य अंतिम संस्कार के लिए नहीं पहुंचा। आखिरकार जनसेवा दल के सदस्यों ने आगे आकर उनका अंतिम संस्कार कराया।

मृतक की पहचान सुशील कुमार सिंह के रूप में हुई है। वह मूल रूप से मध्य प्रदेश के सिंगरौली के रहने वाले थे और पानीपत के ददलाना गांव स्थित राधा स्वामी कॉलोनी में रह रहे थे। वह पहले रिफाइनरी में नौकरी करते थे। बताया गया कि अचानक सीने में दर्द होने के बाद उनकी मौत हो गई।

पुलिस ने परिवार को दी सूचना, लेकिन कोई नहीं पहुंचा

बुजुर्ग की मौत के बाद कॉलोनी के लोगों ने पुलिस को सूचना दी। पुलिस ने शव को सिविल अस्पताल की मोर्चरी में रखवाया और परिजनों से संपर्क किया। पोस्टमार्टम के बाद अंतिम संस्कार के लिए परिवार को पानीपत आने के लिए कहा गया।

हालांकि, परिवार की ओर से जवाब मिला कि वे काफी दूर रहते हैं और पानीपत नहीं आ सकते। इसके बाद जनसेवा दल के सचिव चमन गुलाटी ने भी परिजनों से बातचीत की। तब पता चला कि सुशील कुमार की पांच बेटियां हैं। उनकी पत्नी की तबीयत खराब रहती है, जबकि तीन बेटियों की शादी हो चुकी है और दो अविवाहित हैं।

आने-जाने का खर्च देने की पेशकश भी नहीं आई काम

जनसेवा दल ने परिवार से आग्रह किया कि कम से कम पिता के अंतिम संस्कार के लिए कोई सदस्य पानीपत आ जाए। संस्था की ओर से आने-जाने का टिकट खर्च देने की पेशकश भी की गई, लेकिन इसके बावजूद कोई आने को तैयार नहीं हुआ।

इसके बाद परिवार के अन्य रिश्तेदारों, मामा, चाचा और दामादों से भी संपर्क किया गया। लेकिन वहां से भी सकारात्मक जवाब नहीं मिला। आखिरकार परिवार की ओर से कहा गया कि वे ही अंतिम संस्कार कर दें और उन्हें फोन पर दिखा दें।

फोन कॉल के जरिए बेटियों ने देखी अंतिम विदाई

परिजनों की सहमति के बाद जनसेवा दल के सदस्यों ने पूरे विधि-विधान से सुशील कुमार सिंह का अंतिम संस्कार कराया। इस दौरान बेटियों को फोन कॉल के माध्यम से अंतिम संस्कार की प्रक्रिया दिखाई गई। बताया गया कि इस दौरान कुछ बेटियां भावुक भी हुईं।

अंतिम संस्कार के बाद जब परिवार से अस्थियां लेने आने के बारे में पूछा गया, तो उन्होंने आने में असमर्थता जताई और जनसेवा दल से ही हरिद्वार में अस्थियां विसर्जित करने का आग्रह किया।

जनसेवा दल ने निभाई अंतिम जिम्मेदारी

संस्था के सचिव चमन गुलाटी ने घटना पर दुख जताया। उन्होंने कहा कि जिस व्यक्ति ने पूरी जिंदगी अपने बच्चों के भविष्य के लिए मेहनत की, उसके अंतिम समय में परिवार का कोई सदस्य मौजूद नहीं था।

जनसेवा दल के सदस्यों ने सुशील कुमार सिंह को अकेला नहीं छोड़ा और अंतिम संस्कार की जिम्मेदारी निभाई। इस दौरान शान मनचंदा, चमन गुलाटी, कमल गुलाटी, सतीश चुघ, बंटी गांधी, वासुदेव और मदन साइकिल वाले सहित अन्य लोग मौजूद रहे।

यह घटना एक बार फिर बुजुर्गों की देखभाल, पारिवारिक जिम्मेदारी और मुश्किल समय में अपनों के साथ खड़े होने जैसे सवालों को सामने लाती है।

Satya Report डिस्क्लेमर: यह खबर उपलब्ध समाचार रिपोर्ट और जनसेवा दल की ओर से बताई गई जानकारी के आधार पर तैयार की गई है। परिवार के सदस्यों की अनुपस्थिति के पीछे उनकी परिस्थितियों और पक्ष की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध जानकारी में नहीं है।

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