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सिद्धार्थनगर: 2 हजार की रिश्वत लेते ग्राम पंचायत अधिकारी का वीडियो वायरल, एंटी करप्शन में शिकायत दर्ज

सिद्धार्थनगर: जनपद के इटवा ब्लॉक में तैनात एक ग्राम पंचायत अधिकारी (VDO) द्वारा जन्म प्रमाण पत्र के नाम पर अवैध वसूली का मामला गरमा गया है. सोशल मीडिया पर अधिकारी का रिश्वत लेते हुए वीडियो प्रसारित होने के बाद हड़कंप मच गया है. मामले की गंभीरता को देखते हुए पीड़ित ने उत्तर प्रदेश भ्रष्टाचार निवारण संगठन (एंटी करप्शन) में लिखित शिकायत दर्ज कराई है.

​वीडियो में कैद हुई रिश्वतखोरी

​7 मार्च को सामने आए इस वीडियो में ग्राम पंचायत अधिकारी हरेंद्र पांडे एक युवक से 500-500 रुपये के चार नोट (कुल 2000 रुपये) लेते नजर आ रहे हैं. वीडियो में युवक कहता सुनाई दे रहा है कि “साहब आज लगा दीजिएगा”, जिस पर अधिकारी चुपचाप पैसे जेब में रख लेते हैं. प्रमाण के तौर पर वीडियो बना रहा व्यक्ति भी नोटों की गिनती की पुष्टि करता दिख रहा है.

​पीड़ित का आरोप: फाइलों के नाम पर उगाही

ग्राम पिरैला निवासी मोहम्मद शाबान ने शिकायत में बताया कि अपना जन्म प्रमाण पत्र बनवाने के लिए वे ब्लॉक कार्यालय गए थे. आरोप है कि वहां तैनात हरेंद्र पांडे ने फाइल आगे बढ़ाने के नाम पर 3000 रुपये की मांग की. शाबान का कहना है कि काम में देरी और मानसिक उत्पीड़न के डर से उन्होंने 2000 रुपये दिए.
​”सरकारी नियम के अनुसार जन्म प्रमाण पत्र बनवाने का कोई शुल्क नहीं है, फिर भी अधिकारी द्वारा प्रत्येक फाइल पर 2000 से 3000 रुपये वसूले जा रहे हैं. फर्जी प्रमाण पत्र के लिए तो यह डिमांड 15 हजार रुपये तक पहुँच जाती है.” – मोहम्मद शाबान, शिकायतकर्ता

​विवादों से पुराना नाता

​शिकायत पत्र में यह भी खुलासा किया गया है कि आरोपी अधिकारी पहले खुनियाव ब्लॉक में तैनात थे, जहाँ भ्रष्टाचार और अनियमितताओं के कारण उन्हें निलंबित किया जा चुका है. इसके अलावा, खुनियाव ब्लॉक में हुई संदिग्ध अग्निकांड की घटना, जिसमें सरकारी फाइलें जल गई थीं, उसमें भी इनकी भूमिका पर सवाल उठाए गए हैं. आरोप है कि अधिकारी ने ब्लॉक परिसर के पास एक निजी कमरा ले रखा है, जिसका उपयोग वे अवैध वसूली के अड्डे के रूप में करते हैं.

​प्रशासनिक रुख

​मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए मुख्य विकास अधिकारी (CDO) बलराम सिंह ने कहा- ​प्रकरण उनके संज्ञान में आ चुका है. वीडियो और लिखित शिकायत के आधार पर मामले की गहन जांच कराई जाएगी. ​दोष सिद्ध होने पर भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत कठोरतम दंडात्मक कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी.

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