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7 फरवरी को जिस खिलाड़ी के लिए नहीं थी टीम इंडिया में जगह, 8 मार्च को उसी खिलाड़ी ने बनाया भारत को चैंपियन

7 फरवरी को जिस खिलाड़ी के लिए नहीं थी टीम इंडिया में जगह, 8 मार्च को उसी खिलाड़ी ने बनाया भारत को चैंपियन

 Team India, Sanju Samson: टीम इंडिया के विश्व विजेता बनने की कहानी में एक किरदार ऐसा भी रहा जो शुरू से तो भारतीय प्लेइंग XI का हिस्सा नहीं था पर अचानक से वो टीम इंडिया में जुड़ा और देखते ही देखते उसने इतिहास रच दिया।

7 फरवरी को जो खिलाड़ी भारतीय फैंस के लिए विलेन था वो एक महीने बाद यानी 8 मार्च, 2026 को हीरो बन गया। अब तक तो आपने किरदार का अंदाजा लगा ही लिया होगा? जी हां, हम बात कर रहे हैं टीम इंडिया के हीरो संजू सैमसन की।

विश्व कप में Sanju Samson की कहानी

संजू सैमसन के लिए पिछला एक महीना काफी उतार-चढ़ाव भरा रहा है। टीम मैनेजमेंट ने शुभमन गिल को ड्रॉप कर उन्हें टी20 वर्ल्ड कप टीम का हिस्सा बनाया, लेकिन मेगा इवेंट से ठीक पहले संजू की किस्मत उनसे रूठ गई। कहते हैं भगवान उसी की अग्निपरीक्षा लेता है, जो इस चुनौती को पार करने में समर्थ हो। सैमसन ने इस मिसाल को सही साबित कर दिया।

जब टीम इंडिया ने टी20 वर्ल्ड कप 2026 का आगाज किया था, तब संजू सैमसन खुद टूट चुके थे। उन्हें मालूम था कि टूर्नामेंट में शायद ही उन्हें खेलने का मौका मिले। शुरुआत के दो मैचों में वो बेंच पर बैठे। फिर अचानक अभिषेक शर्मा की तबीयत बिगड़ी और संजू को प्लेइंग इलेवन में एंट्री मिली। हालांकि, नामीबिया के खिलाफ मिले इस मौके को भी उन्होंने आसानी से जाने दिया। फिर क्या था… अभिषेक शर्मा फिट होकर प्लेइंग इलेवन के अंदर और सैमसन बाहर।

Sanju Samson की हुई वापसी

22 फरवरी को सुपर-8 मुकाबले में टीम इंडिया को साउथ अफ्रीका के खिलाफ बुरी तरह हार का सामना करना पड़ा। अचानक टीम कॉम्बिनेशन और बैटिंग ऑर्डर पर सवाल उठने लगे। अभिषेक शर्मा का बल्ला भी खामोश था, लेकिन टीम मैनेजमेंट का उनपर भरोसा कायम था। ये हार संजू सैमसन के लिए वरदान से कम नहीं थी। जिम्बाब्वे के खिलाफ अगले मैच में उन्हें प्लेइंग इलेवन में जगह मिली और फिर केरल के लड़के ने पीछे मुड़कर नहीं देखा।

सेमीफाइनल और फाइनल के हीरो रहे Sanju Samson

01 मार्च को कोलकाता में भारत का मुकाबला वेस्टइंडीज से हुआ जिसमें स्टार ओपनर ने 50 गेंदों पर 97 रनों की शानदार पारी खेली। वो ‘प्लेयर ऑफ द मैच’ बने और अवॉर्ड लेते समय कहा कि ये मेरी जिंदगी का सबसे अच्छा दिन है। संजू सैमसन सिर्फ एक मैच का हीरो नहीं बनना चाहते थे। 13 सालों की मेहनत और तपस्या का हिसाब लेने का मौका मिला था। सेमीफाइनल मुकाबले में इंग्लैंड के खिलाफ संजू सैमसन ने 89 रनों की बेहतरीन पारी खेली। वो फिर ‘प्लेयर ऑफ द मैच’ चुने गए।

7 फरवरी को अंदर से टूट चुके संजू सैमसन 8 मार्च तक आत्मविश्वास से भर चुके थे। बहुत कुछ बदल चुका था। फाइनल में 140 करोड़ भारतीयों की उम्मीदें संजू से थीं, स्टार विकेट कीपर बल्लेबाज उन तमाम उम्मीदों पर फिर खरे उतरे और न्यूजीलैंड के खिलाफ अहमदाबाद में खेले गए फाइनल में भी 46 गेंदों पर 89 रनों की मैच जिताऊ पारी खेली।

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