धमतरी. जिले के सिवनी खुर्द गांव में एक बरगद के पेड़ की कटाई ने पूरे गांव का माहौल गर्मा दिया है. पेड़ काटने वाले परिवार पर ग्रामीणों ने 3 हजार रुपये का दंड ठोक दिया है. दंड की राशि नहीं चुकाने पर गांव के दबंगों ने उस परिवार का सामाजिक बहिष्कार कर हुक्का-पानी बंद कर दिया है. अब पीड़ित परिवार न्याय की आस में जिला प्रशासन की शरण में पहुंचा है.
बिना अनुमति पेड़ काटने का आरोप.
गांव के निवासी ईश्वर पटेल के घर की लगानी जमीन में वर्षों पुराना बरगद का पेड़ खड़ा था. ग्रामीणों का आरोप है कि ईश्वर पटेल ने बिना किसी अनुमति के उस पवित्र पेड़ को कटवा दिया. गांव के कई लोग उस बरगद की नियमित पूजा करते थे और उसे आस्था का प्रतीक मानते थे, इसलिए पेड़ की कटाई से ग्रामीणों में आक्रोश फैल गया.
हादसे की आशंका बताकर किया बचाव.
दूसरी ओर ईश्वर पटेल का कहना है कि पेड़ की डालियां हाईटेंशन तारों तक पहुंच गई थीं और किसी भी समय बड़ा हादसा हो सकता था. पेड़ पर मधुमक्खियों का बड़ा छत्ता भी था, जिससे राहगीरों और आसपास रहने वाले लोगों को खतरा बना रहता था. संभावित दुर्घटना से बचने के लिए ही उन्होंने पेड़ कटवाने का निर्णय लिया.
गांव की बैठक में सुनाया गया फरमान.
पीड़ित परिवार के अनुसार पेड़ कटने के बाद गांव के कुछ प्रभावशाली लोगों ने बैठक बुलाई. बैठक में कहा गया कि जिस बरगद को काटा गया, उसमें देवताओं का वास था और उसकी कटाई से देवी-देवता रुष्ट हो गए हैं. इसी आधार पर ईश्वर पटेल पर 3 हजार रुपये का दंड लगाया गया और चेतावनी दी गई कि यदि राशि नहीं दी गई तो पूरे परिवार का हुक्का-पानी बंद कर दिया जाएगा.
सामाजिक बहिष्कार से परिवार परेशान.
ईश्वर पटेल के बेटे शेष नारायण पटेल का कहना है कि दंड की राशि नहीं देने पर गांव में उनका सामाजिक बहिष्कार कर दिया गया है. गांव में कोई उनसे बातचीत नहीं कर रहा है और दुकानदार भी सामान देने से इनकार कर रहे हैं. मजदूर भी काम पर आने से मना कर रहे हैं, जिससे परिवार को काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है.
प्रशासन ने शुरू की जांच.
मामला कलेक्ट्रेट पहुंचने के बाद जिला प्रशासन ने इसकी जांच के निर्देश दिए हैं. अपर कलेक्टर पवन कुमार प्रेमी ने बताया कि पूरे प्रकरण की जांच कराई जा रही है और जांच के बाद आवश्यक कार्रवाई की जाएगी.
बरगद का धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व.
भारतीय परंपरा में बरगद का वृक्ष अत्यंत पूजनीय माना जाता है. इसे दीर्घायु, स्थिरता और अमरता का प्रतीक माना जाता है. धार्मिक मान्यता के अनुसार इसकी जड़ में ब्रह्मा, छाल में विष्णु और शाखाओं में भगवान शिव का वास बताया जाता है. वट सावित्री व्रत के अवसर पर महिलाएं अपने पति की लंबी आयु के लिए इस वृक्ष की पूजा करती हैं.
फिलहाल सिवनी खुर्द में आस्था और व्यवहारिकता के बीच उपजा यह विवाद अब प्रशासनिक जांच के दायरे में है और गांव की निगाहें आने वाले फैसले पर टिकी हुई हैं.



