
लखनऊ। उत्तर प्रदेश में अब टैक्सी एग्रीगेटर कंपनियों की मनमानी नहीं चलेगी। राज्य कैबिनेट ने मोटरयान नियमावली 1998 में बड़ा संशोधन करते हुए नई गाइडलाइंस को हरी झंडी दे दी है। इसके तहत अब सुरक्षा और पारदर्शिता को प्राथमिकता दी गई है।
रजिस्ट्रेशन शुल्क: आवेदन के लिए 25,000 रुपये निर्धारित किए गए हैं।
लाइसेंस फीस: कंपनियों को 5 लाख रुपये लाइसेंसिंग फीस के तौर पर देने होंगे। एक बार लाइसेंस मिलने के बाद कंपनी असीमित वाहन संचालित कर सकेगी।
नवीनीकरण (Renewal): हर 5 साल में लाइसेंस का रिन्यूअल कराना होगा, जिसका शुल्क 5,000 रुपये तय किया गया है।
ड्राइवर का पुलिस वेरिफिकेशन और मेडिकल टेस्ट अनिवार्य
सरकार का मुख्य फोकस यात्रियों की सुरक्षा पर है। अब तक सरकार के पास इन कंपनियों के ड्राइवरों का पूरा डेटा नहीं होता था, लेकिन अब…
पुलिस सत्यापन: हर ड्राइवर का पुलिस वेरिफिकेशन अनिवार्य होगा।
मेडिकल और फिटनेस: ड्राइवर का मेडिकल टेस्ट और वाहन का फिटनेस टेस्ट नियमित रूप से कराना होगा।
पब्लिक डोमेन में डेटा: एक ऐसा मोबाइल ऐप विकसित किया जाएगा जिससे ड्राइवर, वाहन की फिटनेस और रजिस्ट्रेशन की जानकारी जनता के लिए उपलब्ध रहेगी।
परिवहन निगम भी लाएगा अपना ‘सुपर ऐप’
निजी कंपनियों को टक्कर देने और यात्रियों को सरकारी विकल्प देने के लिए उत्तर प्रदेश परिवहन निगम भी जल्द ही अपना खुद का मोबाइल ऐप लॉन्च करेगा। परिवहन मंत्री के अनुसार, भारत सरकार द्वारा 1 जुलाई 2025 को किए गए नियमों के संशोधन को अब उत्तर प्रदेश पूरी तरह अपना रहा है।
अधिसूचना के बाद प्रभावी होंगे नियम
यह नई नियमावली अधिसूचना जारी होते ही पूरे प्रदेश में लागू हो जाएगी। इसके बाद बिना पंजीकरण, फिटनेस और वैध ला



