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गरीबी में बीता बचपन, ट्रेनों में बेचते थे अपने गानों के कैसेट, ऐसा रहा खेसारी लाल यादव का संघर्ष भरा सफर

गरीबी में बीता बचपन, ट्रेनों में बेचते थे अपने गानों के कैसेट, ऐसा रहा खेसारी लाल यादव का संघर्ष भरा सफर

Khesari Lal Yadav Birthday Special Story: भोजपुरी सिनेमा के लोकप्रिय अभिनेता और गायक खेसारी लाल यादव आज अपना 40वां जन्मदिन मना रहे हैं। 15 मार्च 1986 को बिहार के सारण जिले के धनाडीह गांव में जन्मे खेसारी का असली नाम शत्रुघ्न लाल यादव है। गरीबी और संघर्ष से भरे जीवन से निकलकर उन्होंने भोजपुरी इंडस्ट्री में अपना अलग मुकाम बनाया है।

खेसारी लाल यादव का बचपन बेहद गरीबी में बीता। उनके पिता मंगर लाल यादव परिवार का खर्च चलाने के लिए दिन में चने बेचते थे और रात में गार्ड की नौकरी करते थे। आर्थिक तंगी इतनी ज्यादा थी कि बारिश के दौरान उनका मिट्टी का घर भी गिर गया था, जिसके कारण खेसारी का जन्म एक किराए के पक्के मकान में हुआ। बचपन में खेसारी मवेशी चराते थे और दूध बेचकर अपने परिवार की मदद किया करते थे।

दिल्ली में बेचा लिट्टी-चोखा

सफलता की राह खेसारी लाल यादव के लिए बिल्कुल आसान नहीं रही। अपने परिवार के साथ वह दिल्ली आ गए, जहां उन्होंने ओखला इलाके में लिट्टी-चोखा बेचकर गुजारा किया। इसी दौरान उन्होंने गायक बनने का सपना देखा। लिट्टी बेचकर जो पैसे जमा हुए, उनसे उन्होंने करीब 12 हजार रुपये लगाकर अपना पहला म्यूजिक एल्बम रिलीज किया, लेकिन वह पूरी तरह फ्लॉप हो गया। इसके बाद भी उन्होंने हार नहीं मानी और करीब 25 हजार रुपये की लागत से दूसरा एल्बम बनाया, जिसे दर्शकों ने पसंद किया।

लौंडा नाच से शुरू हुआ सफर

खेसारी लाल यादव ने अपने करियर की शुरुआत 1998-99 में भोजपुरी थिएटर से की थी। उस समय वह धार्मिक कार्यक्रमों में रामायण और महाभारत से जुड़े गीत गाया करते थे। उन्होंने बिहार और पूर्वी उत्तर प्रदेश में लोकप्रिय लोक नृत्य ‘लौंडा नाच’ भी सीखा। धीरे-धीरे उनकी आवाज और परफॉर्मेंस लोगों को पसंद आने लगी और वह भोजपुरी म्यूजिक इंडस्ट्री में पहचान बनाने लगे।

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बिग बॉस तक पहुंचे खेसारी

अपने संघर्ष और मेहनत के दम पर खेसारी लाल यादव भोजपुरी सिनेमा के बड़े सितारों में शामिल हो गए। साल 2019 में उन्होंने टीवी के लोकप्रिय रियलिटी शो बिग बॉस 13 में भी हिस्सा लिया था, जिससे उन्हें देशभर में नई पहचान मिली। करियर के शुरुआती दिनों में वह खुद ट्रेनों में घूम-घूमकर अपने गानों के कैसेट का प्रचार करते थे। कई बार उन्हें भूखे भी सोना पड़ा और लोगों की आलोचनाएं भी सुननी पड़ीं, लेकिन उन्होंने कभी हार नहीं मानी।

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