West Asia Crisis : नई दिल्ली। वाणिज्य मंत्रालय पश्चिम एशिया में जारी संकट से निपटने के लिए निर्यातकों की मदद को जल्द ही कुछ सहायता उपायों की घोषणा कर सकता है।वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल ने सोमवार को यहां पत्रकारों को बताया कि विभाग इस सप्ताह के भीतर इन कदमों की विस्तृत जानकारी साझा करेगा।
पश्चिम एशिया तनाव से प्रभावित भारतीय निर्यात
माना जा रहा है कि ये उपाय मुख्य रूप से बीमा जैसे क्षेत्रों से संबंधित हो सकते हैं। पिछले महीने ईरान पर अमेरिका और इजराइल के संयुक्त हमलों के कारण पश्चिम एशिया में जहाजों और विमानों की आवाजाही बुरी तरह बाधित हुई है। इस तनाव से कच्चे तेल की कीमतों में उछाल आया है, जिससे निर्यातकों के लिए समुद्री और हवाई माल ढुलाई के साथ-साथ बीमा प्रीमियम की लागत भी काफी बढ़ गई है।
वित्त वर्ष 2024-25 में पश्चिम एशिया को भारत का निर्यात 58.8 अरब डॉलर रहा था। सूखे मेवे, फल और सब्जियों जैसे क्षेत्रों के निर्यातकों का कहना है कि युद्ध के कारण कारण उनकी खेप प्रभावित हुई है। सचिव ने बताया कि एक अंतर-मंत्रालयी समूह दैनिक आधार पर स्थिति की निगरानी कर रहा है।
सीमा शुल्क विभाग ने होर्मुज जलडमरूमध्य के बंद होने और समुद्री मार्गों में बाधा के कारण भारतीय बंदरगाहों पर वापस आने वाले निर्यात माल के प्रबंधन के लिए नियम भी जारी किए हैं।
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