बिहार में होने वाली महत्वपूर्ण भर्ती परीक्षाओं से ठीक पहले पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए एक कुख्यात परीक्षा माफिया को गिरफ्तार किया है. आर्थिक अपराध इकाई (ईओयू) की इस गिरफ्तारी ने न सिर्फ पुलिस भर्ती परीक्षाओं की सुरक्षा को लेकर राहत दी है, बल्कि यह भी संकेत दिया है कि राज्य में सक्रिय परीक्षा गिरोहों पर अब कड़े कदम उठाए जा रहे हैं.
जानकारी के मुताबिक, ईओयू को सोमवार (8 दिसंबर) एक गुप्त सूचना मिली कि पटना के गोला रोड इलाके में वर्षों से परीक्षा लीक रैकेट से जुड़े एक व्यक्ति की गतिविधियां बढ़ गई हैं. इस सूचना की पुष्टि होने पर ईओयू की विशेष टीम ने तत्काल छापेमारी की और संजय कुमार प्रभात नामक आरोपी को गिरफ्तार कर लिया. प्रभात पिछले कई वर्षों से विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं के प्रश्नपत्र लीक कराने के आरोपों में संदिग्ध रहा है.
परीक्षा लीक माफियाओं के खिलाफ राज्यभर में चला विशेष अभियान
ईओयू ने बताया कि आगामी भर्ती परीक्षाओं विशेषकर 10 दिसंबर को होने वाली चालक सिपाही भर्ती परीक्षा और 14 दिसंबर को होने वाली प्रवर्तन उप निरीक्षक (परिवहन विभाग) परीक्षा को देखते हुए राज्यभर में एक विशेष अभियान चलाया जा रहा है. इसका उद्देश्य उन गिरोहों का नेटवर्क तोड़ना है जो परीक्षाओं से पहले पेपर लीक कर युवाओं के भविष्य से खिलवाड़ करते हैं और इसके बदले मोटी रकम वसूलते हैं.
आरोपी ने पूछताछ के दौरान किए कई खुलासे
गिरफ्तारी के बाद बिहार पुलिस की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि आरोपित संजय कुमार प्रभात ने पूछताछ के दौरान कई चौंकाने वाले खुलासे किए हैं. उसने स्वीकार किया है कि वह कई प्रतियोगी परीक्षाओं के प्रश्नपत्र लीक कर लाखों रुपये कमा चुका है और अपने नेटवर्क के जरिए राज्य के अलग-अलग जिलों में छात्रों तक पेपर पहुंचाता था. पुलिस अब उससे उस गैंग के अन्य सदस्यों के बारे में जानकारी जुटा रही है, जो इस अवैध धंधे में शामिल हैं.
आने वाले दिनों में हो सकती है अन्य गिरफ्तारियां- ईओयू
ईओयू अधिकारियों का कहना है कि आने वाले दिनों में और भी गिरफ्तारियां हो सकती हैं, क्योंकि कई संदिग्धों पर निगरानी रखी जा रही है. बिहार पुलिस ने अभ्यर्थियों से अपील की है कि वे किसी भी तरह के अनैतिक प्रस्ताव या पेपर लीक की जानकारी मिलने पर तुरंत पुलिस को सूचित करें.
गिरफ्तारी ने परीक्षार्थियों में भरोसा जगाया है. आगामी परीक्षाओं के मद्देनजर सुरक्षा व्यवस्था और निगरानी दोनों को और कड़ा किया जा रहा है, ताकि परीक्षा प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी और निष्पक्ष बनी रहे.




