
ईरान से आई एक दिल दहला देने वाली खबर ने खेल जगत को हिला दिया है. 19 साल के युवा पहलवान सालेह मोहम्मदी को फांसी दिए जाने की खबर के बाद दुनिया भर में गुस्सा, डर और चिंता का माहौल बन गया है. बताया जा रहा है कि उन्हें 19 मार्च 2026 को कोम शहर में सार्वजनिक रूप से फांसी दी गई. इस घटना ने सिर्फ ईरान ही नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय खेल समुदाय को भी झकझोर दिया है.
सालेह मोहम्मदी को ईरान की कुश्ती दुनिया का उभरता सितारा माना जा रहा था. उन्होंने 2024 में रूस में हुए साइटिएव कप में कांस्य पदक भी जीता था, लेकिन अब उन पर लगे गंभीर आरोपों और उसके बाद हुई सजा ने खेल जगत में नई बहस छेड़ दी है. ईरानी अधिकारियों का कहना है कि सालेह समेत तीन लोगों पर जनवरी 2026 के विरोध प्रदर्शनों के दौरान दो पुलिसकर्मियों की हत्या का आरोप था. इसी मामले में उन्हें “मोहारेबेह” यानी “ईश्वर के खिलाफ युद्ध” और हत्या का दोषी ठहराया गया था.
मानवाधिकार संगठनों ने इस पूरे मामले पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं. कई रिपोर्टों में कहा गया है कि मुकदमा निष्पक्ष नहीं था, आरोपियों से कथित तौर पर यातना के जरिए बयान लिए गए और उन्हें स्वतंत्र कानूनी मदद भी नहीं दी गई. यही वजह है कि यह मामला अब सिर्फ कानून और व्यवस्था का नहीं, बल्कि मानवाधिकार और खेल से जुड़े लोगों की सुरक्षा का भी मुद्दा बन गया है.
इस फांसी के बाद ईरान की जेलों में बंद दूसरे खिलाड़ियों को लेकर डर और बढ़ गया है. रिपोर्टों में दावा किया गया है कि जनवरी 2026 से शुरू हुए विरोध प्रदर्शनों के बाद 60 से ज्यादा खिलाड़ी और कोच मारे जा चुके हैं या उन पर मौत की सजा का खतरा मंडरा रहा है. इनमें कुछ नाम खास तौर पर सामने आए हैं, जैसे मोहम्मद हुसैन हुसैनीनस्र (फुटबॉलर), आमिर रजा नस्र (फुटबॉलर), मोहम्मद जवाद वफाए सानी (मुक्केबाज), मोहम्मद महशारी (मुक्केबाज), वाटर पोलो गोलकीपर अली पिशेवरजादेह, मैराथन धावक नीलोफर पास, और बास्केटबॉल कोच पयाम वाहिदी. कहा जा रहा है कि इन खिलाड़ियों पर भी कड़ी कार्रवाई का खतरा बना हुआ है.
इस बीच 200 से ज्यादा खिलाड़ियों ने अंतरराष्ट्रीय ओलंपिक समिति यानी IOC से अपील की है कि ईरान के खेल संघों के खिलाफ सख्त कदम उठाए जाएं. उनका आरोप है कि खेल संस्थाएं भी इस दमनकारी माहौल में चुप रहकर अप्रत्यक्ष रूप से जिम्मेदार बन रही हैं.
फिलहाल यह मामला खेल से कहीं बड़ा बन चुका है. एक युवा पहलवान की फांसी ने पूरी दुनिया को यह सोचने पर मजबूर कर दिया है कि जब खिलाड़ी भी सुरक्षित नहीं हैं, तो खेल भावना और इंसाफ की बात आखिर कहां खड़ी है.



