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Chaitra Navratri Day 4: मां कूष्मांडा को बेहद प्रिय है ये ‘एक’ सफेद मिठाई! नवरात्रि के चौथे दिन लगाएं ये खास भोग; चमक जाएगी किस्मत

Chaitra Navratri Day 4: मां कूष्मांडा को बेहद प्रिय है ये ‘एक’ सफेद मिठाई! नवरात्रि के चौथे दिन लगाएं ये खास भोग; चमक जाएगी किस्मत

चैत्र नवरात्रि का चौथा दिन मां दुर्गा के चतुर्थ स्वरूप मां कूष्मांडा की पूजा को समर्पित है. धार्मिक मान्यता के अनुसार, मां कूष्मांडा ने अपनी हल्की मुस्कान से पूरे ब्रह्मांड की रचना की थी, इसलिए इन्हें सृष्टि की आदिशक्ति भी कहा जाता है. नवरात्रि के इस दिन विधि-विधान से पूजा करने और खास भोग लगाने से सुख-समृद्धि, स्वास्थ्य और सकारात्मक ऊर्जा की प्राप्ति होती है. धर्म शास्त्रों के अनुसार, जो भक्त सच्चे मन से मां कूष्मांडा की पूजा करता है, उसके जीवन से दुख-दरिद्रता दूर होती है और घर में खुशहाली का वास होता है. आइए जानते हैं कि नवरात्रि के चौथे दिन मां कूष्मांडा को किन-किन चीजों का भोग लगाना शुभ माना जाता है.

मालपुआ का भोग

मां कूष्मांडा को मालपुआ बहुत प्रिय माना जाता है. इस दिन मालपुआ बनाकर देवी को अर्पित करना शुभ होता है. इसके बाद इस प्रसाद को ब्राह्मणों या जरूरतमंदों में बांटना पुण्यदायक माना जाता है.

कद्दू से बने व्यंजन

मां कूष्मांडा का संबंध कद्दू (कूष्मांड) से माना जाता है. इसलिए इस दिन कद्दू से बनी सब्जी या मिठाई का भोग लगाने की परंपरा भी कई जगहों पर प्रचलित है.

फल और मिश्री

मौसमी फल, खासकर मीठे फल और मिश्री का भोग लगाना भी शुभ माना जाता है. यह भोग देवी को प्रसन्न करने के साथ-साथ घर में सुख-शांति लाने वाला माना जाता है.

पान और नारियल

पूजा में पान, सुपारी और नारियल चढ़ाने का भी विशेष महत्व है. इससे मां की कृपा बनी रहती है और घर में समृद्धि आती है.

ऐसे करें मां कूष्मांडा की पूजा

सबसे पहले पूजा स्थल को साफ करके मां कूष्मांडा की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें. मां को लाल या नारंगी रंग के फूल अर्पित करें. धूप, दीप और अक्षत से विधिवत पूजा करें. फिर इसके बाद मालपुआ या अन्य भोग लगाकर मां की आरती करें.धार्मिक मान्यता है कि इस दिन हरा या नारंगी रंग धारण करना शुभ माना जाता है, जो सकारात्मक ऊर्जा और समृद्धि का प्रतीक है.

मां कूष्मांडा की कृपा से मिलते हैं ये फल

जीवन में सकारात्मक ऊर्जा बढ़ती है. रोग और कष्टों से राहत मिलती है. धन-धान्य और सुख-समृद्धि में वृद्धि होती है. परिवार में शांति और खुशहाली बनी रहती है.

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