
अमेरिका और ईरान के बीच समझौते को लेकर सस्पेंस जारी है. एक तरफ अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बातचीत शुरू होने का दावा किया है. वहीं ईरान का कहना है कि उसने अमेरिका के साथ कोई बातचीत नहीं की है. इसी बीच सीजफायर को लेकर अमेरिका के एक प्लान का खुलासा हुआ है. अमेरिका ईरान के एक ऐसे कट्टरपंथी को अपने पाले में करना चाहता है, जो आने वाले वक्त में उसके लिए काम करे. इसके लिए ट्रंप प्रशासन उस अधिकारी को मनाने में जुट गया है. अधिकारी का नाम है- मोहम्मद बी गालिबफ.
अमेरिकी मीडिया आउटलेट एक्सियोस ने व्हाइट हाउस के सूत्रों के हवाले से बताया है कि ट्रंप प्रशासन गालिबफ को कन्फिडेंस में ले रहा है. ट्रंप प्रशासन को लगता है कि गालिबफ के जरिए ही ईरान से उसका हित सध सकता है. गालिबफ से बात करने के लिए राष्ट्रपति ट्रंप अपने उपराष्ट्रपति जेडी वेंस को भी भेजने के लिए तैयार हैं.
पहला सवाल- कौन हैं बी गालिबफ?
गालिबफ को ईरान का कट्टरपंथी नेता माना जाता है. फिलहाल वे ईरानी संसद के स्पीकर हैं. उन्हें ईरान के दूसरे सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई का विश्वासपात्र माना जाता था. गालिबफ ने करियर की शुरुआत इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड के एक जवान के रूप में की थी. बाद में वे इस कोर गार्ड्स के जनरल भी नियुक्त हुए. सेना से बाहर आने के बाद गालिबफ तेहरान के मेयर नियुक्त हुए.
गालिबफ दो बार ईरान में राष्ट्रपति का चुनाव लड़ चुके हैं. पहली बार 2013 में बाघेर गालिबफ राष्ट्रपति चुनाव के मैदान में उतरे थे, लेकिन उस वक्त हसन रुहानी ने उन्हें हरा दिया. 2024 के राष्ट्रपति चुनाव में भी गालिबफ मसूद पजेशकियन से चुनाव हार गए.
अमेरिकी सुरक्षा एजेंसियों का मानना है कि गालिबफ इस वक्त एकमात्र ऐसे नेता हैं, जो मुज्तबा खामेनेई के फैसले लेने में दखल दे सकते हैं. खामेनेई जिसके फैसले को मान सकते हैं. यही वजह है कि अमेरिका गालिबफ से संपर्क करने की कोशिश कर रहा है.
सुप्रीम लीडर के लिए भी गालिबफ पसंद
पॉलिटिको के मुताबिक अमेरिकी प्रशासन गालिबफ को सुप्रीम लीडर के तौर पर पसंद करता है. उसकी चाहत है कि मुज्तबा की जगह गालिबफ को सुप्रीम लीडर बनाया जाए. सोमवार (23 मार्च) को पत्रकारों के एक सवाल के जवाब में ट्रंप ने कहा- हम ईरान के सुप्रीम लीडर के साथ मिलकर होर्मुज पर कंट्रोल करेंगे.
ट्रंप से जब इसको लेकर और ज्यादा सवाल पूछा गया तो उनका कहना था- मैं ज्यादा कुछ नहीं बताऊंगा. क्योंकि उसे मारा जा सकता है.
हालांकि, जब अमेरिकी मीडिया में ट्रंप प्रशासन के गालिबफ से बात करने की खबरें तेजी से फैली तो गालिबफ खुद सोशल मीडिया पर सामने आए. उन्होंने एक पोस्ट के जरिए किसी से कोई बात नहीं होने का दावा किया.
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