
25 मार्च को चैत्र नवरात्रि का सातवां दिन है। इस दिन देवी दुर्गा के सातवें स्वरूप मां कालरात्रि की उपासना की जाती है। चैत्र नवरात्रि की सप्तमी तिथि को महासप्तमी के नाम से भी जाना जाता है। जब माता पार्वती ने शुंभ-निशुंभ का वध करने के लिए अपने स्वर्णिम वर्ण को त्याग दिया था, तब उन्हें कालरात्रि के नाम से जाना गया। मां कालरात्रि का वाहन गधा है और इनकी चार भुजाएं हैं, जिनमें से ऊपर का दाहिना हाथ वरद मुद्रा में और नीचे का हाथ अभयमुद्रा में रहता है, जबकि बायीं ओर के ऊपर वाले हाथ में लोहे का कांटा और निचले हाथ में खड़ग है।
मां का ये स्वरूप देखने में भले ही भयानक लगता है, लेकिन ये बड़ा ही शुभ फलदायक है। इसलिए देवी मां का एक नाम शुंभकारी भी है। इनके स्मरण मात्र से ही भूत-पिशाच, भय और अन्य किसी भी तरह की परेशानी तुरंत दूर भाग जाती है। तो आइए जानते हैं कि नवरात्रि के सातवें दिन किस रंग के कपड़े पहनकर मां कालरात्रि की उपासना करनी चाहिए।
नवरात्रि का सातवां दिन मां कालरात्रि को समर्पित है। इस दिन नीला रंग पहनना शुभ माना गया है। महासप्तमी के दिन नीले रंग के कपड़े पहनकर देवी कालरात्रि की उपासना करनी चाहिए। ऐसा करने से शुभ फलों की प्राप्ति होती है। आपको बता दें कि नीला रंग को साहस, स्थिरता और आत्मविश्वास का प्रतीक माना जाता है। नवरात्रि सप्तमी पूजा के दिन नीले रंग के कपड़े पहनकर मां कालरात्रि की आराधना करने से जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। नीले के अलावा महासप्तमी के दिन ग्रे रंग के वस्त्र भी पहन सकते हैं। ग्रे रंग भी शुभ माना गया है।
चैत्र नवरात्रि की महासप्तमी के दिन इन मंत्रों का करें जाप
जय त्वं देवि चामुण्डे जय भूतार्ति हारिणि। जय सार्वगते देवि कालरात्रि नमोऽस्तु ते॥
या देवी सर्वभूतेषु माँ कालरात्रि रूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥
एकवेणी जपाकर्णपूरा नग्ना खरास्थिता। लम्बोष्ठी कर्णिकाकर्णी तैलाभ्यक्त शरीरिणी॥ वामपादोल्लसल्लोह लताकण्टकभूषणा। वर्धन मूर्धध्वजा कृष्णा कालरात्रिर्भयङ्करी॥
ॐ देवी कालरात्र्यै नमः॥



