बस्तर : जगदलपुर में 11 दिसंबर से संभागस्तरीय बस्तर ओलंपिक की शुरुआत हुई. बस्तर ओलंपिक के उद्घाटन समारोह में सीएम विष्णुदेव साय, डिप्टी सीएम विजय शर्मा और अरुण साव, वन मंत्री केदार कश्यप समेत स्थानीय जनप्रतिनिधि भी पहुंचे. खेलों के उद्घाटन अवसर पर विशेष तौर पर अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त बॉक्सर एमसी मैरी कॉम समेत दो नेशनल खिलाड़ी भी आएं हैं.मैरी कॉम ने जहां अपने संबोधन में बस्तर के रीति रिवाज और यहां के आदिवासी परंपरा की सराहना की,वहीं बस्तर में उभरते खिलाड़ियों का हौसला बढ़ाया.
करसाय ता बस्तर, बरसाय ता बस्तर( खेलेगा बस्तर बढ़ेगा बस्तर)
पद्मश्री एमसी मेरी कॉम ने कहा कि मुझे आमंत्रित करने के लिए बहुत शुक्रिया. करसाय ता बस्तर बरसायता बस्तर आज कार्यक्रम आयोजित किया गया है. बस्तर के युवाओं का परफॉर्मेंस और डेडिकेशन काफी जबरदस्त है. मैं सभी को प्रोत्साहित करती हूं. आज के दिन मैं काफी आशीषित हूं, क्योंकि मैं बस्तर के आदिवासी से जुड़ी हूं. मैं भी ट्राइबल फैमिली से जुड़ी हुई हूं. किसी को कभी हिम्मत नहीं हारनी है. हम खेल में सीख रहे हैं. आपको भी करना है. मैने देश का नाम रौशन किया है. बस्तर, छत्तीसगढ़ और भारत के नाम को रौशन करना आपके हाथों में है.पद्मश्री मैरी कॉम ने बताई अपनी जर्नी
इस दौरान मैरी कॉम ने छत्तीसगढ़ सरकार को आयोजन के लिए धन्यवाद दिया.स्वागत कार्यक्रम में पद्मश्री मैरी कॉम ने जनता को संबोधित करते हुए कहा कि उन्होंने 20 साल में कड़ी मेहनत करके इस मुकाम को पाया है. वो भी ट्राइबल कम्यूनिटी से आती हैं.जब उन्होंने कुछ करने की सोचा तो काफी बाधाएं आईं,लेकिन वो अपने लक्ष्य के प्रति फोकस थी.
मैरी कॉम ने कहा कि मैं बहुत खुश हूं कि मुझे बस्तर ओलंपिक में बुलाया गया है. आप सभी को धन्यवाद. बस्तर के युवाओं का परफार्मेंस, डेडिकेशन बहुत अच्छा है. मैं इस आयोजन के लिए छत्तीसगढ़ सरकार की सराहना करती हूं. ट्राइबल कनेक्शन जुड़ा है. मैं भी नार्थ इस्ट मणिपुर की ट्राइबल फैमिली से हूं. जो भी ट्राइबल ‘नेवर गिव अप एटिट्यूड’ के साथ परफार्म कर रहे हैं, उन्हें शुभकामनाएं. आप सभी को देश का नाम रोशन करना है. बस्तर के बच्चे और युवाओं का समय आ गया है. छत्तीसगढ़ का नाम रोशन करने की जिम्मेदारी अब आप लोगों के हाथ में है.
20 साल के लंबे संघर्ष के बाद मिली सफलता
मेरी जिंदगी में मैंने बहुत संघर्ष किया, बहुत मेहनत की. न सिर्फ दो तीन साल बल्कि करीब 20 साल मैंने संघर्ष किया. एक औरत, एक मां के लिए यह आसान नहीं है. आप ग्रास रुट लेवल से ऊंचाईयों पर पहुंचते हैं तो बहुत मेहनत करनी पड़ती है. आजकल जमाना बदल गया है. छत्तीसगढ़ सरकार आप लोगों को बहुत सुविधा दे रही है. हमारे समय में बेहतर खेल सुविधाएं नहीं थीं. हमने अपना रास्ता खुद बनाया. उस वक्त मुझे माता पिता ने भी सपोर्ट नहीं किया, लेकिन मैंने संघर्ष किया. जो मेरी बायोपिक बनी है, उसमें सिर्फ 5 फीसदी स्ट्रगल दिखाया गया है. मैं कहना चाहती हूं कि मैंने बहुत संघर्ष किया. यह बहुत कष्टदायक भी था.



