
Prime Minister Narendra Modi शनिवार यानी 28 मार्च 2026 को सुबह करीब 11:30 बजे गौतम बुद्ध नगर के जेवर में Noida International Airport की टर्मिनल बिल्डिंग का वॉकथ्रू करेंगे. इसके बाद दोपहर करीब 12 बजे, PM Modi नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट के फेज I का उद्घाटन करेंगे और इस मौके पर एक पब्लिक गैदरिंग को एड्रेस करेंगे. इंदिरा गांधी इंटरनेशनल एयरपोर्ट के बाद अब नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट को दिल्ली NCR के लिए दूसरे इंटरनेशनल एयरपोर्ट के तौर पर डेवलप किया गया है. दोनों एयरपोर्ट मिलकर एक इंटीग्रेटेड एविएशन सिस्टम की तरह काम करेंगे, जिससे भीड़ कम होगी, पैसेंजर कैपेसिटी बढ़ेगी और दिल्ली NCR दुनिया के बड़े एविएशन हब में शामिल होगा.
इसमें 3900 मीटर का रनवे है जो वाइड-बॉडी एयरक्राफ्ट को हैंडल कर सकता है, साथ ही इसमें इंस्ट्रूमेंट लैंडिंग सिस्टम (ILS) समेत मॉडर्न नेविगेशन सिस्टम और एडवांस्ड एयरफील्ड लाइटिंग है, जो हर मौसम में चौबीसों घंटे ऑपरेशन में मदद करती है. हम आज आप लोगों को समझाएंगे कि ILS System क्या होता है और किस तरह से पायलट की मदद करता है?
What is ILS System
Marigold Aviation के मुताबिक, इंस्ट्रूमेंट लैंडिंग सिस्टम (ILS) रेडियो सिग्नल पर आधारित नेविगेशन टेक्नोलॉजी है जो रनवे पर उतरने वाले एयरक्राफ्ट को गाइडेंस देता है. खासतौर से कोहरे, बारिश, रात के अंधेरे, खराब मौसम और कम विज़िबिलिटी वाली स्थिति में. ILS एक ग्राउंड-बेस्ड सिस्टम है और इसके लिए एयरपोर्ट पर इंफ्रास्ट्रक्चर और एयरक्राफ्ट में एवियोनिक्स (विमान में इस्तेमाल किए जाने वाले इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम और उपकरण) की जरूरत होती है.
ILS System कैसे करता है काम?
इसमें एक नहीं बल्कि कई कॉम्पोनेंट्स होते हैं जो एक साथ मिलकर एयरक्राफ्ट को रनवे तक सुरक्षित रूप से गाइड करते हैं जिसमें पहला है लोकलाइजर, दूसरा है Glide Slope, तीसरा है Marker Beacons और चौथा है Approach Lighting System.
लोकलाइजर लेफ्ट-राइट साइड गाइडेंस देता है. Glide Slope वर्टिकल (अप-डाउन) गाइडेंस में मदद करता है. Marker Beacons आउटर, मिडल और इनर मार्कर की दूरी बताते हैं. कई एयरपोर्ट अब मार्कर बीकन के बजाय डिस्टेंस मेज़रिंग इक्विपमेंट (DME) का इस्तेमाल करते हैं. Approach Lighting System की बात करें तो ये सिस्टम कम विजिबिलिटी के दौरान लैंडिंग में मदद करता है.
एयरपोर्ट के बारे में कुछ खास बातें
नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट का फेज-I पब्लिक-प्राइवेट-पार्टनरशिप (PPP) मॉडल के तहत 11,200 करोड़ रुपए के खर्च से बनाया गया है. शुरुआत में एयरपोर्ट की पैसेंजर हैंडलिंग कैपेसिटी हर साल 12 मिलियन पैसेंजर होगी. पूरी तरह से डेवलप होने के बाद, इसे हर साल 70 मिलियन पैसेंजर तक बढ़ाया जा सकता है. एक सस्टेनेबल और फ्यूचर-रेडी इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट के तौर पर इसे डिजाइन किया गया, नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट का मकसद नेट-ज़ीरो एमिशन फैसिलिटी के तौर पर काम करना है, जिसमें एनर्जी-एफिशिएंट सिस्टम है.
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