
ईरान और अमेरिका के बीच युद्ध विराम से पाकिस्तान का जोश हाई है. सीजफायर में मैसेंजर के रूप में सफलता मिलने के बाद शहबाज शरीफ की सरकार ने शुक्रवार (10 अप्रैल) को पूरे मुल्क में थैंक्स गिविंग डे मनाने का ऐलान किया है. पूर्व प्रधानमंत्री नवाज शरीफ ने इसे बड़ी कूटनीतिक जीत घोषित की है. ऐसे में सवाल उठ रहा है कि आखिर अमेरिका और ईरान के बीच संदेशवाहक बने पाकिस्तान को इस सीजफायर से क्या फायदा होने वाला है?
अमेरिकी मीडिया आउटलेट एक्सियोस के मुताबिक सीजफायर कराने में पाकिस्तान का मूल काम अमेरिकी संदेश को ईरान तक भेजना था. जब सीजफायर का ड्राफ्ट फाइनल हो गया, तो उसे पहली बार पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने ही सार्वजनिक किया. इसके बाद इस ड्राफ्ट पर पहले ट्रंप और फिर ईरान के सुप्रीम लीडर की मुहर लगी.
सीजफायर से पाक को क्या फायदा होगा?
ऑब्जर्वर रिसर्च फाउंडेशन (ORF) में मीडिल ईस्ट मामलों के एक्सपर्ट कबीर तनेजा के मुताबिक पाकिस्तान ने अपनी आर्थिक स्थिति को सुधारने के लिए यह कदम उठाया. जैसे ही उसे यह प्रपोजल मिला, वैसे ही उसे इसने एक्सेप्ट कर लिया. तनेजा का कहना है कि इस सीजफायर से मीडिल ईस्ट के मुस्लिम देशों में पाकिस्तान की मौजूदगी बढ़ सकती है.
तनेजा के मुताबिक पाकिस्तान ने बीते दिनों अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से सीधा संपर्क किया है. खुद ट्रंप ने मुनीर से कम से कम 2 बार बात की है. इस पहल के बाद पहले की तरह पाकिस्तान के सेना और अमेरिका के बीच का कनेक्शन मजबूत हो सकता है.
इसके अलावा पाकिस्तान मिडिल ईस्ट में डिफेंस डील के नाम पर छोटे-छोटे देशों से कर्ज ले सकता है. क्योंकि, मिडिल ईस्ट में ईरानी हमले के बाद कई देशों को भविष्य की चिंता सताने लगी है. पिछले साल पाकिस्तान ने सऊदी के साथ रक्षा समझौता किया था. इसके बदले सऊदी ने पाकिस्तान में जमकर निवेश की घोषणा की थी.
क्विंसी इंस्टीट्यूट के मिडिल ईस्ट प्रोग्राम के डिप्टी डायरेक्टर एडम वेनस्टीन का मानना है कि इसके जरिए पाकिस्तान अपनी क्रेडिबलिटी बढ़ाने की कोशिश करेगा. पाकिस्तान दुनिया को यह बताएगा कि जब आप संकट में थे, तब हमने हल ढूंढा था.
इससे पाकिस्तान की मुसीबत भी बढ़ गई
सीजफायर के बाद पाकिस्तान की मुसीबत भी बढ़ गई है. संयुक्त अरब अमीरात उससे भयंकर नाराज है. यूएई के एक्सपर्ट अजमद ताहा का कहना है कि सीजफायर की प्रक्रिया में पाकिस्तान ने यूएई को धोखा दिया है. पाकिस्तान ने न तो यूएई को इसके बारे में जानकारी दी और न ही उसके हितों के बारे में बात की.
यूएई और पाकिस्तान के बीच मजबूत कूटनीतिक संबंध रहे हैं. इस संबंध के खराब होने से पाकिस्तान को यूएई का कर्ज लौटाना पड़ सकता है. हाल ही में यूएई ने इस महीने के आखिर तक 3.5 बिलियन डॉलर का कर्ज लौटाने के लिए कहा था.
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