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रिश्तों को सींचना आसान नहीं है। इसमें प्यार, समय, त्याग और विश्वास की जरूरत होती है। कई बार हम एक रिश्ते में अपना सब कुछ दे रहे होते हैं लेकिन फिर भी मन में सवाल आता है कि ये रिश्ता हमारे लिए ठीक है या नहीं है। रिलेशनशिप में कई बार ऐसा होता है जब ऊपर से सब कुछ ठीक लगता है, लेकिन अंदर कुछ गड़बड़ होती है। आप उसे ठीक से नाम तो नहीं दे सकते, लेकिन महसूस जरूर करते हैं। कई बार ये आपकी खामोशी, बातचीत के तरीके और आपके व्यवहार में झलने लगता है। अगर आप भी अपने रिलेशनशिप को लेकर कंफ्यूज हैं कि इसे आगे बढ़ाना चाहिए या नहीं तो सबसे पहले खुद से ये 5 सवाल जरूर करें।
रिलेशनशिप एक्सपर्ट और थेरेपिस्ट जेफ गुएन्थर ने बताया कि इस अनिश्चितता को नज़रअंदाज़ नहीं किया जाना चाहिए। कभी-कभी जिन उत्तरों की आप तलाश कर रहे होते हैं, वे जटिल नहीं होते, बस असहज होते हैं। इसके लिए दूसरे से पहले खुद कुछ चीजों को जानना और समझना जरूरी होता है।
क्या ये रिश्ता मेरे लिए ठीक है, खुद से करें सवाल
प्यार का ये तरीका- यह पूछना आसान है, क्या मैं उनसे प्यार करता/करती हूं? लेकिन असल सवाल यही नहीं होता। ज्यादा जरूरी है कि रोजमर्रा की ज़िंदगी में वो आपके साथ कैसा व्यवहार करते हैं। जब आप मुश्किल में होते हैं, तो वे कैसे प्रतिक्रिया देते हैं। उनका लहजा, उनकी कोशिश कैसी होती है। बड़े-बड़े पलों को छोड़ दें तो क्या आप हर दिन इसी तरह के प्यार के साथ जीना चाहते हैं?
रिश्ते में आपकी भूमिका- कुछ रिश्ते आपको विकसित करते हैं, जबकि कुछ आपको संकुचित कर देते हैं। ध्यान दें कि इस रिश्ते में आपका कौन सा रूप सामने आता है। क्या आप शांत, अधिक आत्मविश्वासी और अपने असली स्वरूप में हैं? या आप लगातार संदेह करते रहते हैं, प्रतिक्रिया देते रहते हैं या खुद को छोटा महसूस करते रहते हैं? आपका यह रूप उस रिश्ते से कहीं अधिक मायने रखता है।
क्या वाकई वो आपका समझते हैं- यह सुनने में भले ही इतना मुश्किल न लगे लेकिन ये आपको महसूस करना है कि आपको सामने वाला कितना जानता और समझता है। वो आपके जोक्स, आपकी किसी संदर्भ में कही गई बात या अटपटे विचारों पर कैसी प्रतिक्रिया देता है। इससे पता चलता है कि सामने वाला वाकई में आपके बारे में क्या सोचता है और आपको कितना समझता है।
बिना बदलाव के खुश हैं- आपको ये देखना और सोचना होगा कि भविष्य में कुछ नहीं बदलने वाला है। न वो सुधरेंगे और न ही उनकी कैपिसिटी बढ़ेगी। अगर आज जैसा सबकुछ है क्या कल भी वैसा ही रहेगा तो आप उन्हें चुनेंगे या नहीं। क्योंकि अक्सर लोग हमारी अपेक्षा के अनुसार नहीं बदलते।
आप क्या उम्मीद करते हैं- किसी भी रिश्ते में आप क्या उम्मीद करते हैं पहले ये आपको समझना जरूरी है। उसके बाद क्या दूसरा आपकी उम्मीदों पर खरा उतरता है ये समझना जरूरी है। क्योंकि रिश्तों में स्पष्टता कभी-कभी अचानक नहीं आती ये धीरे-धीरे विकसित होती है। इसलिए सारे सवालों का जवाब आपको खुद ही मिल जाएगा।



