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Noida Digital Arrest: नोएडा में MBBS छात्रा सहित 3 महिलाएं 144 घंटे तक ‘डिजिटल अरेस्ट’, पड़ोसियों की सूझबूझ ने ऐसे बचाया

Noida Digital Arrest: नोएडा में MBBS छात्रा सहित 3 महिलाएं 144 घंटे तक ‘डिजिटल अरेस्ट’, पड़ोसियों की सूझबूझ ने ऐसे बचाया

Noida News: नोएडा के सेक्टर-74 स्थित सुपरटेक केप टाउन सोसायटी से साइबर ठगी का एक बेहद चौंकाने वाला मामला सामने आया है. यहां साइबर ठगों ने डिजिटल अरेस्ट के नाम पर दो बुजुर्ग महिलाओं और एक MBBS छात्रा को पूरे 6 दिनों तक अपने जाल में फंसा कर रखा और उनके लाखों रुपए की ठगी की. इस दौरान तीनों इतनी डरी-सहमी रहीं कि उन्होंने किसी से संपर्क तक नहीं किया.

जानकारी के मुताबिक ठगों ने फोन कॉल के जरिए खुद को सरकारी एजेंसी और पुलिस अधिकारी बताकर महिलाओं को डराया. उन्हें कहा गया कि उनके खिलाफ गंभीर मामला दर्ज है और उन्हें डिजिटल अरेस्ट में रखा गया है. इसके बाद लगातार फोन और वीडियो कॉल के जरिए उन पर नजर रखी गई, जिससे वह पूरी तरह मानसिक दबाव में आ गईं.

आरोपियों ने ठगे लाखों रुपए

ठगों ने पहले पीड़ितों से एक लाख रुपये ठग लिए. इसके बाद उनसे दो लाख रुपये की मांग और की. इस दौरान ठग लगातार फोन पर संपर्क बनाए हुए थे और महिलाओं को किसी से बात न करने की धमकी दे रहे थे.

कैसे बचीं महिलाएं?

मामले का खुलासा तब हुआ जब सोसायटी में रहने वाले पड़ोसियों ने देखा कि महिलाएं कई दिनों से फ्लैट से बाहर नहीं निकली हैं. इस पर उन्हें शक हुआ और उन्होंने तुरंत सोसायटी की AOA को सूचना दी.

AOA टीम सिक्योरिटी स्टाफ के साथ फ्लैट पर पहुंची. काफी देर तक दरवाजा नहीं खुला, लेकिन जब दरवाजा खोला गया तो अंदर का नजारा देखकर सभी हैरान रह गए. महिलाएं बेहद डरी हुई हालत में थीं.

MBBS छात्रा भी ठगों के जाल में फंसी

इस मामले की सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि एक MBBS छात्रा भी साइबर ठगों के नियंत्रण में थी. बताया जा रहा है कि छात्रा कॉलेज के प्रैक्टिकल के लिए जाती थी, लेकिन उसके हर कदम पर ठग नजर रख रहे थे.

यहां तक कि जब छात्रा कॉलेज जाती थी, तब उसकी मां को कार में बैठाकर फोन पर डिजिटल अरेस्ट में रखा जाता था. ठगों ने तीनों को इस कदर डरा दिया था कि वह पूरी तरह उनके निर्देशों पर चल रही थीं.

पुलिस ने शुरू की जांच

मामले की सूचना मिलते ही सेक्टर-113 थाना पुलिस मौके पर पहुंची और तीनों महिलाओं से बातचीत की. पुलिस ने उन्हें समझाया कि डिजिटल अरेस्ट जैसी कोई कानूनी प्रक्रिया नहीं होती और यह पूरी तरह साइबर ठगी का नया तरीका है. पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है.

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