बदलते मौसम में स्किन से जुड़ी समस्याएं खासतौर पर दाद (Ringworm) और खुजली बहुत परेशान करती है। फंगल इन्फेक्शन के कारण होने वाली यह समस्या न केवल शारीरिक बेचैनी पैदा करती है, बल्कि सही समय पर इलाज न मिलने पर शरीर के अन्य हिस्सों में भी फैल सकती है। फंगल इंफेक्शन को रिंगवर्म, टीनिया या डर्मेटोफाइटोसिस भी कहा जाता है। हालांकि बाजार में कई दवाएं उपलब्ध हैं, लेकिन आयुर्वेद में कुछ ऐसे सुरक्षित और प्रभावी उपाय बताए गए हैं जो शुरुआती लक्षणों में राहत दिलाने में मददगार साबित हो सकते हैं।

आयुर्वेदिक एक्सपर्ट डॉक्टर रूपाली जैन ने बताया फंगल इंफेक्शन यानी दाद-खुजली से परेशान रहते हैं और बार-बार क्रीम या इलाज करने के बावजूद यह समस्या दोबारा लौट आती है तो आप आयुर्वेदिक तरीके से इलाज करें। दिखने में ये परेशानी छोटी लगती है लेकिन तेजी से फैलती है, इसलिए इसका जड़ से इलाज करना जरूरी है। आइए जानते हैं फंगल इंफेक्शन का आयुर्वेदिक उपचार कैसे करें।

फंगल इंफेक्शन के  लक्षण (Symptoms)

फंगल इंफेक्शन में आमतौर पर त्वचा पर गोल-गोल चकत्ते बनते हैं, जिनके किनारे उभरे हुए होते हैं। इन चकत्तों में रेडनेस, खुजली, जलन और स्किन के सूखने या फटने जैसे लक्षण देखे जाते हैं। यह समस्या खासकर उन जगहों पर ज्यादा होती है जहां पसीना और नमी रहती है, जैसे स्किन गर्दन, जांघ, अंडरआर्म। रात के समय, गर्मी और पसीने की वजह से खुजली और बढ़ जाती है।

फंगल इंफेक्शन के  कारण

आयुर्वेद में इस समस्या को दद्रु कहा जाता है, जो कफ और पित्त दोष के बिगड़ने से होता है। इसमें खुजली, रेडनेस और गोल चकत्ते जैसे प्रमुख लक्षण देखे जाते हैं। इस परेशानी के लिए कई कारण जिम्मेदार हो सकते हैं जैसे

शरीर में ज्यादा पसीना और नमी रहना

  • गंदगी या हाइजीन की कमी
  • इम्यूनिटी कमजोर होना
  • संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में आना
  • तौलिया, कपड़े या निजी चीजें साझा करना
  • तली-भुनी, भारी और गलत फूड कॉम्बिनेशन का सेवन करने की वजह से ये इंफेक्शन बढ़ सकता है।

आयुर्वेदिक उपाय

खदिर (Acacia catechu) का उपयोग

खदिर स्किन रोगों के लिए बेहद प्रभावी माना जाता है। इसका काढ़ा बनाकर पीने, नहाने के पानी में मिलाने या पेस्ट बनाकर लगाने से आपको फायदा होगा। यह खून को साफ करता है और सूजन व खुजली कम करता है।

विडंग (Vidanga) का सेवन

विडंग में एंटी-इंफेक्शन गुण होते हैं। इसका चूर्ण या काढ़ा लेने से शरीर के अंदर से संक्रमण कम होता है और पाचन भी सुधरता है।

नीम तेल और हल्दी का लेप लगाएं

नीम के तेल में हल्दी मिलाकर प्रभावित जगह पर लगाने से खुजली, जलन और इंफेक्शन में राहत मिलती है। यह एक सुरक्षित और असरदार घरेलू उपाय है।

हर्बल उबटन (उद्वर्तन)

जौ, मंजिष्ठा, लोध्र जैसे हर्ब्स का उबटन लगाकर नहाने से त्वचा की सफाई होती है, नमी कम होती है और खुजली में राहत मिलती है।

हरिद्रा खंड का सेवन

यह एक आयुर्वेदिक दवा है जो स्किन एलर्जी, खुजली और फंगल इंफेक्शन में फायदेमंद होती है।

नीम का इस्तेमाल करें।

नीम में एंटीफंगल और एंटीबैक्टीरियल गुण होते हैं। अगर नीम के पत्तों को उबालकर उस पानी से नहाएं तो स्किन पर होने वाली खुजली और चकत्तों से राहत मिलती है।  नीम का पेस्ट या तेल भी स्किन पर असरदार साबित होता है।

हल्दी का करें सेवन

हल्दी में सूजन कम करने और इन्फेक्शन खत्म करने की ताकत होती है। हल्दी में नारियल तेल मिलाकर उसका लेप बनाएं और इसे खुजली वाली जगह पर लगाएं आपको राहत मिलेगी।

जरूरी सावधानियां

  • कॉटन के कपड़े पहनें और दिन में 1–2 बार बदलें
  • त्वचा को सूखा रखें
  • तौलिया और कपड़े शेयर न करें
  • तली-भुनी और भारी चीजों से परहेज करें
  • मीठा, तिल, गुड़ और मछली का ज्यादा सेवन न करें

डिस्क्लेमर: यह लेख केवल सामान्य जानकारी के लिए है। दाद या त्वचा का संक्रमण गंभीर हो सकता है। किसी भी घरेलू उपाय को आज़माने से पहले या लक्षण गंभीर होने पर तुरंत किसी योग्य डॉक्टर या आयुर्वेदिक विशेषज्ञ से सलाह लें।सत्‍य रिपोर्ट एक भी बात की सत्यता का प्रमाण नहीं देता है।