Noida Foundation Day: आज का आधुनिक और चमकता-दमकता ‘नोएडा’ कभी बिल्कुल अलग तस्वीर पेश करता था. यहां दूर-दूर तक फैले खेत, कच्ची सड़कें, धूल के गुबार और छोटे-छोटे गांव ही इसकी पहचान थे. यमुना और हिंडन नदियों के बीच बसा यह इलाका पूरी तरह ग्रामीण जीवन से जुड़ा हुआ था. यहां के लोगों की जिंदगी खेती और पारंपरिक कामों पर निर्भर थी. 17 अप्रैल 1976 को जब नोएडा की स्थापना हुई, तब यह सिर्फ एक योजना थी. दिल्ली के बढ़ते दबाव को कम करने और उद्योगों को एक व्यवस्थित जगह देने थी. उस समय शायद ही किसी ने सोचा होगा कि यह उबड़-खाबड़ जमीन एक दिन देश के सबसे विकसित और हाईटेक शहरों में शामिल हो जाएगी.

पहला दौर- उद्योगों की नींव पर खड़ा हुआ नोएडा (1976-1990)
नोएडा के विकास की शुरुआत औद्योगिक शहर के रूप में हुई. दिल्ली में बढ़ते प्रदूषण और भीड़-भाड़ को कम करने के लिए कई छोटे-बड़े उद्योगों को यहां शिफ्ट किया गया. योजनाबद्ध तरीके से सेक्टर बनाए गए, जहां उद्योगों और आवासीय क्षेत्रों को अलग-अलग रखा गया. इस दौरान सड़कें बनीं, बिजली और पानी की सुविधाएं विकसित की गईं. धीरे-धीरे लोगों का आना शुरू हुआ. हालांकि यह विकास शुरुआती स्तर का था और शहर अब भी सीमित दायरे में ही था. फिर भी यही वह समय था, जिसने नोएडा की नींव को मजबूत किया और आगे आने वाले विकास की दिशा तय की गई.
दूसरा दौर- रिहायशी विस्तार और शहर की पहचान (1990-2005)
1990 के दशक में नोएडा ने एक नया मोड़ लिया. अब यह सिर्फ औद्योगिक क्षेत्र नहीं रहा, बल्कि रिहायशी शहर के रूप में भी उभरने लगा. हाउसिंग सोसाइटियां बनने लगीं. अपार्टमेंट संस्कृति आई और लोगों ने इसे रहने के लिए एक बेहतर विकल्प के रूप में देखना शुरू किया. इस समय तक नोएडा में स्कूल, अस्पताल और बाजार जैसी बुनियादी सुविधाएं भी विकसित होने लगी थीं. हालांकि कनेक्टिविटी और आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर अभी उतना मजबूत नहीं था, लेकिन शहर धीरे-धीरे अपनी पहचान बना रहा था.
तीसरा दौर- साल 2000 के बाद आई असली रफ्तार
नोएडा के विकास की असली कहानी साल 2000 के बाद शुरू होती है. इस दौर में इंफ्रास्ट्रक्चर पर बड़े स्तर पर काम हुआ. नोएडा-ग्रेटर नोएडा एक्सप्रेस-वे, बेहतर सड़क नेटवर्क और दिल्ली मेट्रो की कनेक्टिविटी ने शहर को नई दिशा दी. आईटी सेक्टर और मल्टीनेशनल कंपनियों के आने से नोएडा तेजी से रोजगार का केंद्र बन गया. बड़ी-बड़ी कंपनियों ने यहां अपने ऑफिस खोले, जिससे हजारों युवाओं को रोजगार मिला और शहर की आर्थिक स्थिति मजबूत हुई. यही वह समय था, जब नोएडा ने हाईटेक सिटी की पहचान बनानी शुरू की और देश-विदेश के निवेशकों का ध्यान अपनी और खींचा.
गुरुग्राम की तर्ज पर विकास, लेकिन सीमित दायरे की चुनौती
नोएडा का विकास काफी हद तक गुरुग्राम की तर्ज पर किया गया. यहां भी कॉरपोरेट ऑफिस, आईटी पार्क, चौड़ी सड़कें और आधुनिक इमारतें बनाई गईं. इसके साथ ही नोएडा में कई बड़े मॉल बनाए गए, जो कि नोएडा शहर को अपनी एक अलग पहचान बनाने में कामयाब साबित हुए, लेकिन एक बड़ा अंतर यह रहा कि प्रोग्राम लगातार फैलता गया, जबकि नोएडा एक सीमित क्षेत्र में ही सिमट कर रह गया. जमीन और योजना की सीमाओं के कारण इसका विस्तार उतनी तेजी से नहीं हो पाया, जितनी जरूरत थी. यही वजह रही कि सरकार को एक नए शहर ग्रेटर नोएडा की जरूरत महसूस हुई, ताकि विकास की रफ्तार को आगे बढ़ाया जा सके.
‘ग्रेटर नोएडा’- अधूरे सपनों को पूरा करने की कोशिश
नोएडा की सीमाओं और बढ़ती आबादी को देखते हुए ग्रेटर नोएडा का विकास किया गया. यहां ज्यादा चौड़ीं सड़कें, बेहतर प्लानिंग और बड़े प्रोजेक्ट के लिए पर्याप्त जगह दी गई. ग्रेटर नोएडा में उन सुविधाओं को शामिल करने की कोशिश की गई, जो नोएडा में पूरी तरह विकसित नहीं हो पाए. इससे दोनों शहरों का संतुलित विकास संभव हुआ और क्षेत्र को एक बड़े शहरी कॉरिडोर के रूप में विकसित किया गया.
नोएडा की सबसे बड़ी उपलब्धियां में से एक इसकी जमीन की कीमतों में हुई. जमीन की कीमतों में जबरदस्त बढ़ोतरी हुई. जहां शुरुआत में जमीन बेहद सस्ती थीं, वहीं आज यहां लाखों और करोड़ों रुपए में बिक रही हैं. पिछले कुछ दशकों में प्रॉपर्टी के दामों में कई गुना बढ़ोतरी हुई. निवेश के लिहाज से नोएडा आज देश के सबसे आकर्षक शहरों में शामिल है. यह उछाल इस बात का संकेत है कि नोएडा ने आर्थिक रूप से कितनी मजबूत स्थिति हासिल कर ली है.
आज का नोएडा हाईटेक, कनेक्टेड और निवेश का केंद्र
आज नोएडा एक पूरी तरह आधुनिक शहर बन चुका है. यहां मेट्रो, एक्सप्रेस-वे, बड़े मॉल, अस्पताल, स्कूल और कॉरपोरेट ऑफिस… जैसी सभी सुविधाएं मौजूद हैं. नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट, फिल्म सिटी, मेट्रो विस्तार और अन्य बड़े प्रोजेक्ट इस शहर को और आगे ले जाने वाले हैं. यह शहर अब सिर्फ उत्तर प्रदेश नहीं बल्कि पूरे देश का एक प्रमुख आईटी और आर्थिक हब बन चुका है.
विकास के बीच रह गईं कुछ अहम कमियां
तेजी से हुए विकास के बावजूद नोएडा में कई समस्याएं आज भी लोगों को परेशान करती हैं. सबसे बड़ी समस्या ट्रैफिक की है. बढ़ती आबादी और वाहनों की संख्या के कारण सड़कों पर दबाव लगातार बढ़ रहा है. हरियाली की कमी भी एक बड़ा मुद्दा है. योजनाबद्ध तरीके से शहर होने के बावजूद कई क्षेत्रों में ग्रीन स्पेस उतना विकसित नहीं हो पाया, जितनी उम्मीद थी. बारिश के मौसम में जलभराव की समस्या बार-बार सामने आती है, जिससे लोगों को भारी परेशानी होती है. सीवर और ड्रोनेज सिस्टम भी कई जगहों पर कमजोर है, जो शहर के इंफ्रास्ट्रक्चर पर सवाल खड़े करता है. इसके अलावा प्रदूषण और अनुयोजित शहरी विस्तार भी धीरे-धीरे बड़ी चुनौती बनता जा रहा है.
1000 करोड़ के नए प्रोजेक्टस से बढ़ेगी रफ्तार
नोएडा अपने 50वें स्थापना दिवस पर करीब 1000 करोड रुपए की नई परियोजनाओं की शुरुआत करने जा रहा है. इन प्रोजेक्ट में इंफ्रास्ट्रक्चर, ट्रांसपोर्ट, स्मार्ट सिटी और शहरी सुविधाओं से जुड़े काम शामिल हैं. इससे न केवल शहर को और तेजी से विकास मिलेगा, बल्कि आने वाले समय में लोगों को और बेहतर सेवाएं मिलेंगी. नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट, फिल्म सिटी, मेडिकल डिवाइस पार्क जैसी बड़ी परियोजनाएं आने वाले समय में नोएडा शहर को एक अलग पहचान देंगी और लोगों को रोजगार के अवसर भी प्रदान होंगे.


