Jammu Kashmir

J&K: घाटी में प्रतिबंधित संगठन पर नकेल… जमात से जुड़े 58 स्कूलों पर सरकार का नियंत्रण

Satya Report: जम्मू-कश्मीर सरकार ने शिक्षा व्यवस्था को सुरक्षित रखने के लिए एक अहम फैसला लिया है. सरकार ने प्रतिबंधित जमात-ए-इस्लामी (JeI) और उसकी शैक्षिक शाखा, फलाह-ए-आम ट्रस्ट (FAT) से जुड़े 58 स्कूलों का प्रबंधन अपने हाथ में लेने का आदेश दिया है. यह कदम अगस्त 2025 में 215 स्कूलों को निशाना बनाकर की गई एक बड़ी कार्रवाई के बाद उठाया गया है.

J&K: घाटी में प्रतिबंधित संगठन पर नकेल… जमात से जुड़े 58 स्कूलों पर सरकार का नियंत्रण
J&K: घाटी में प्रतिबंधित संगठन पर नकेल… जमात से जुड़े 58 स्कूलों पर सरकार का नियंत्रण

सरकार का कहना है कि यह कदम छात्रों के भविष्य को सुरक्षित रखने और स्कूलों को राष्ट्रविरोधी गतिविधियों से बचाने के लिए उठाया गया है. अधिकारियों ने कहा कि सरकार ने शनिवार को घाटी के अलग-अलग हिस्सों में FAT के 58 स्कूलों का प्रबंधन अपने हाथ में ले लिया. अधिकारियों के मुताबिक ये स्कूल सीधे या परोक्ष रूप से FAT से संबद्ध थे. अधिकारियों ने बताया कि जिला प्रशासन और पुलिस की टीमों ने इन स्कूलों का दौरा कर प्रबंधन अपने कब्जे में लिया.

पिछले साल 215 स्कूलों पर कार्रवाई

इससे पहले, सरकार ने पिछले साल (2025) अगस्त में घाटी के 10 जिलों में जमात-ए-इस्लामी से संबद्ध 215 स्कूलों का प्रबंधन अपने हाथ में लिया था. इनमें से सबसे ज्यादा बारामुला में 53, अनंतनाग में 37, कुपवाड़ा में 36, पुलवामा में 22, बड़गाम में 20, कुलगाम में 16, शोपिया में 15, गांदरबल में 6, बांदीपोरा में 6 और श्रीनगर में 4 स्कूल थे.उस समय सरकार ने कहा था कि ऐसे स्कूलों की प्रबंधन समितियों का कार्यभार संबंधित जिलाधिकारी या उपायुक्त संभालेंगे और उचित सत्यापन के बाद नई प्रबंधन समितियां गठित की जाएंगी.

प्रतिबंधित संगठन घोषित

दरअसल 28 फरवरी 2019 और फिर 27 फरवरी 2024 को गृह मंत्रालय ने जमात-ए-इस्लामी को गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम के तहत प्रतिबंधित संगठन घोषित किया था. खुफिया एजेंसियों ने ऐसे कई स्कूलों की पहचान की थी, जो सीधे या परोक्ष रूप से जेईआई या उसके फलाह-ए-आम ट्रस्ट से जुड़े थे.

सरकार का कहना था कि इन स्कूलों की प्रबंधन समितियों की वैधता समाप्त हो चुकी थी और खुफिया एजेंसियों ने इनके बारे में प्रतिकूल रिपोर्ट दी थी. इसके साथ ही सरकार ने यह भी साफ किया कि इन संस्थानों का प्रबंधन अपने हाथ में लेने का निर्णय छात्रों के शैक्षणिक भविष्य की सुरक्षा के मकसद से लिया गया है.

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