Madhya Pradesh

MP: अवैध खनन मामले में सुप्रीम कोर्ट का सुनवाई करने से इनकार, याचिकाकर्ता को हाईकोर्ट जाने कहा

Satya Report: मध्यप्रदेश में अवैध खनन से जुड़े मामले में सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को कटनी निवासी आशुतोष दीक्षित की याचिका पर सुनवाई से इनकार कर दिया. सुप्रीम कोर्ट ने याचिककर्ता को हाईकोर्ट जाने को कहा. आशुतोष दीक्षित ने अपनी याचिका में कहा था कि बीजेपी विधायक संजय सत्येंद्र पाठक से जुड़ी तीन कंपनियां जबलपुर जिले के सिहोरा क्षेत्र और वन भूमि में “अवैध और अत्यधिक खनन” में लिप्त हैं.

MP: अवैध खनन मामले में सुप्रीम कोर्ट का सुनवाई करने से इनकार, याचिकाकर्ता को हाईकोर्ट जाने कहा
MP: अवैध खनन मामले में सुप्रीम कोर्ट का सुनवाई करने से इनकार, याचिकाकर्ता को हाईकोर्ट जाने कहा

सोमवार को याचिककर्ता के वकील देवदत्त कामत ने की बेंच से कहा कि एक मौजूदा विधायक ने जज को फोन किया. साथ ही जज ने अपनी नाराजगी व्यक्त की. अब मेरी याचिका खारिज कर दी गई है, स्वतः संज्ञान लिया जाना चाहिए था.

CJI ने कहा कि ज्यादातर ये राजनीतिक लड़ाइयां अदालत के अंदर होती हैं. जस्टिस बागची ने कहा कि लेकिन उनकी बात नहीं सुनी गई. याचिककर्ता के वकील कामत ने कहा कि लेकिन यह तो जज को फोन करने की बात है! क्या यह राजनीतिक है?

राजनीतिक बयानबाजी न करें: CJI

CJI ने कहा कि राजनीतिक बयानबाजी न करें, हमें यह पसंद नहीं है, यह एक नया चलन है, सोचिए आप वहां जज के साथ कैसा व्यवहार कर रहे होंगे. अवमानना ​​में हमें बताएं कि आप कहां सुनवाई की मांग कर रहे हैं? आपने दूसरों को दोषी ठहराते हुए अन्य राहत की मांग की है, पहले इसे साबित होने दीजिए. .

कामत ने कहा कि मेरी याचिका के कारण अवमानना ​​हुई है, मेरे पास सबूत हैं. CJI ने कहा कि आप सबूत हाईकोर्ट को दे सकते हैं. सिर्फ इसलिए कि आपको राजनीतिक लाभ नहीं मिला, आप यहां आए हैं. आपकी रिट का निपटारा आरोपी के खिलाफ आपराधिक अवमानना ​​की कार्यवाही शुरू करके किया गया था. वहां आप कहते हैं कि आप सहायता करना चाहते हैं.

हाईकोर्ट में मामला दायर करने की दी इजाजत

CJI ने कामत से कहा कि आप राजनीतिक मामले दायर करते रहते हैं. आपको बेहतर पता होना चाहिए. कामत ने कहा कि कृपया ऐसा न कहें कि मैं केवल राजनीतिक मामले दायर करता हूं. इसमें राजनीतिक क्या है? एक विधायक ने जज को बुलाया और वह कह रहे हैं कि वे चर्चा करना चाहते हैं. CJI ने कहा कि यदि किसी ने यह कार्रवाई की है, तो उसे दंडित किया जाना चाहिए.

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