Satya Report: जैसे-जैसे ईरान और अमेरिका की तरफ से युद्ध में अपडेट आ रहे हैं वैसे-वैसे कच्चे तेल की कीमतों में भी खेल हो रहा है. शुक्रवार को जैसे ही होर्मुज गेट खोलने की घोषणा हुई कच्चे तेल की कीमतों में 12 फीसदी से ज्यादा की गिरावट दर्ज की गई. वहीं फिर एक घोषणा हुई कि होमुर्ज गेट नहीं खोला जाएगा. इस घोषणा के बाद तेल की कीमतों में एक बार फिर रफ्तार पकड़ ली. सोमवार को कच्चे तेल की कीमतों में 6 फीसदी से ज्यादा की तेजी देखने को मिली.

तो क्या अब तेल का खेल ऐसे ही चलता रहेगा. कुछ जानकारों का मानना है कि युद्ध विराम नहीं हुआ तो कच्चे तेल की कीमतें 250 डॉलर तक जा सकती है. वहीं कुछ जानकारों का कहना है कि अगर स्थिति में बदलाव आता है तो कच्चे तेल की कीमतें 80 डॉलर से भी नीचे आ सकती हैं. इस पूरे वार में सबसे ज्यादा किसी बात की चर्चा हुई है तो वो है कच्चा तेल.
लगातार बदल रही कीमतें
ईरान और अमेरिका के बीच जारी गतिरोध के कारण टैंकरों को होर्मुज से गुजरने से रोके जाने के बाद रविवार को शुरुआती कारोबार में कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी दर्ज की गई. यह फारस की खाड़ी का वह महत्वपूर्ण जलमार्ग है, जो वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए अत्यंत अहम माना जाता है. ‘शिकागो मर्केंटाइल एक्सचेंज’ में कारोबार शुरू होने के बाद अमेरिकी कच्चे तेल की कीमत 6.4 प्रतिशत बढ़कर 87.88 डॉलर प्रति बैरल हो गई.अंतरराष्ट्रीय मानक ब्रेंट क्रूड की कीमत 6.5 प्रतिशत बढ़कर 96.25 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई.बाजार की यह प्रतिक्रिया पिछले दो दिनों से इस जलमार्ग को लेकर बनती-बिगड़ती उम्मीदों के बीच आई.
आखिर क्या चाहता है ईरान
ईरान ने शुक्रवार को घोषणा की थी कि वह अपने तट के पास से वाणिज्यिक जहाजों के लिए मार्ग पूरी तरह खोल देगा, जिसके बाद कच्चे तेल की कीमतों में नौ प्रतिशत से अधिक की गिरावट आई थी.ईरान इस मार्ग पर प्रभावी नियंत्रण रखता है.हालांकि, शनिवार को तेहरान ने अपना फैसला वापस ले लिया, जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि ईरानी बंदरगाहों पर अमेरिकी नौसेना की नाकेबंदी जारी रहेगी.
वॉर की आग में जल रहा है तेल
अमेरिका-इजराइल का ईरान के खिलाफ युद्ध अब आठवें सप्ताह में है. इस युद्ध ने दशकों में सबसे भीषण वैश्विक ऊर्जा संकटों में से एक को जन्म दिया है. एशिया और यूरोप के वे देश जो पश्चिम एशिया से अपने तेल के एक बड़े हिस्से का आयात करते हैं, आपूर्ति रुकने और उत्पादन में कटौती से सबसे अधिक प्रभावित हुए हैं. अमेरिकी ऊर्जा मंत्री क्रिस राइट ने कहा कि पेट्रोल की कीमतें अगले साल ही कुछ राहत दे सकती हैं.कच्चे तेल की कीमतों में 28 फरवरी को अमेरिका और इजराइल के हमले के बाद से लगातार उतार-चढ़ाव देखा जा रहा है. संघर्ष से पहले कच्चे तेल की कीमत लगभग 70 अमेरिकी डॉलर प्रति बैरल थी, जो बाद में बढ़कर 119 अमेरिकी डॉलर से भी अधिक हो गई. शुक्रवार को अमेरिकी कच्चा तेल 82.59 अमेरिकी डॉलर प्रति बैरल और ब्रेंट क्रूड 90.38 अमेरिकी डॉलर प्रति बैरल पर भाव पर बंद हुआ. लेकिन एक बार फिर तेल ने खेल कर दिया और यह फिर से तेजी से भागने लगा है. अब ऐसे में सवाल उठता है कि क्या तेल का खेल आगे भी जारी रहेगा. .



