Satya Report: भारतीय शेयर बाजार के दोनों प्रमुख इंडेक्स Sensex और Nifty मंगलवार को 1.5 फीसदी से ज्यादा की उछाल के साथ बंद हुए. खास बात तो ये है कि शेयर बाजार लगातार तीसरे दिन तेजी के साथ बंद हुआ. तेल की कीमतों में नरमी, ईरान-अमेरिका शांति वार्ता की उम्मीदें और अन्य फैक्टर्स ने बाजार में तेजी लाने का काम किया. बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज का प्रमुख सूचकांक सेंसेक्स 753 अंकों की तेजी के साथ 79,273.33 अंकों पर बंद हुआ. जबकि लगातार तीन दिनों में सेंसेक्स में 1,284.65 अंक यानी 1.65 फीसदी की तेजी देखने को मिल चुकी है.

नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का प्रमुख सूचकांक निफ्टी में 211.75 अंकों की तेजी देखने को मिली और 24,576.60 अंकों पर बंद हुआ. खास बात तो ये है कि लगातार तदन दिनों में निफ्टी में 379.85 अंक यानी 1.57 फीसदी की तेजी देखने को मिल चुकी है. अगर बात सिर्फ आज की ही की जाए तो शेयर बाजार निवेशकों को करीब 3 लाख करोड़ रुपए का फायदा हुआ है. जबकि लगातार तीन दिनों में निवेशकों को 8 लाख करोड़ रुपए का फायदा हो चुका है. .
Sensex पर Trent के शेयर सबसे ज्यादा फायदे में रहे, जिनमें 4 फीसदी से ज्यादा की उछाल आई. निवेशक कंपनी द्वारा कल घोषित किए जाने वाले बोनस इश्यू का इंतजार कर रहे हैं. इसके बाद Bajaj Finance के शेयरों का नंबर आया, जिनमें लगभग 3 फीसदी की बढ़त दर्ज की गई. वहीं, ICICI Bank, HDFC Bank और Adani Ports के शेयरों में लगभग 2 फीसदी की बढ़त हुई.
इस रुझान के विपरीत, Bharat Electronics (BEL), Titan और Reliance Industries के शेयरों में 1 फीसदी तक की गिरावट आई. यह तब हुआ जब बाजार की अस्थिरता को मापने वाला India VIX लगभग 6 फीसदी गिरकर 17.75 पर आ गया. यह उत्साह ब्रॉडर मार्केट में भी देखने को मिला, जहां Nifty Smallcap 100 और Nifty Midcap 100 इंडेक्स में 0.7 फीसदी की बढ़त दर्ज की गई. सेक्टोरल तौर पर, Nifty Realty इंडेक्स में लगभग 3 फीसदी का उछाल आया और यह सबसे ज्यादा फायदे वाला सेक्टर बन गया.
शेयर बाजार में तेजी के प्रमुख कारण
ईरान-अमेरिका शांति वार्ता की उम्मीदें
ईरान वॉर के लिए ट्रंप की सीजफायर की समय सीमा कल, 22 अप्रैल को खत्म होने वाली है, जिससे निवेशक तनाव में हैं. हालांकि, बाजार अब इस युद्ध के जल्द खत्म होने की उम्मीद कर रहे हैं. दोनों देशों के अधिकारी इस हफ्ते बातचीत के दूसरे दौर के लिए मिल सकते हैं. इससे पहले, इस महीने की शुरुआत में हुआ पहला दौर किसी लंबे समय तक चलने वाले शांति समझौते में तब्दील नहीं हो पाया था.
फिर भी, कुछ सावधानी बरतना जरूरी है. ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराकची ने कहा कि अमेरिका द्वारा “सीजफायर का लगातार उल्लंघन” आगे की बातचीत में रुकावट डाल रहा है. ईरान के मुख्य वार्ताकार और संसद के स्पीकर, मोहम्मद बाकेर कालिबफ ने दोहराया कि तेहरान किसी भी तरह की धमकी के दबाव में बातचीत नहीं करेगा.
इस बीच, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ‘ट्रुथ सोशल’ पर जाकर अमेरिका के पिछले नेताओं की आलोचना की. उन्होंने आरोप लगाया कि उन नेताओं ने ईरान के साथ एक “बहुत ही बुरा” समझौता किया था. उन्होंने आगे कहा कि “अगर ‘ट्रंप’ के नेतृत्व में कोई समझौता होता है, तो वह न सिर्फ इजरायल और मिडिल ईस्ट के लिए, बल्कि यूरोप, अमेरिका और दुनिया के हर हिस्से के लिए शांति, सुरक्षा और संरक्षा की गारंटी देगा. यह कुछ ऐसा होगा जिस पर पूरी दुनिया को गर्व होगा. यह उन सालों की शर्मिंदगी और अपमान से कहीं बेहतर होगा, जिन्हें हमें अयोग्य और कायर नेताओं की वजह से झेलना पड़ा है!
95 डॉलर के करीब कच्चा तेल
तेल की कीमतों में थोड़ी नरमी आई है. ब्रेंट क्रूड फ्यूचर्स 95 डॉलर प्रति बैरल के आस-पास मंडरा रहे हैं, जबकि WTI क्रूड फ्यूचर्स गिरकर 88 डॉलर प्रति बैरल पर आ गए हैं. तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल के अहम स्तर से नीचे बनी हुई हैं. रूस द्वारा 2022 में यूक्रेन पर हमला करने के बाद पहली बार तेल की कीमतें इस स्तर को पार कर गई थीं. तेल की कीमतों में यह गिरावट ईरान और अमेरिका के बीच शांति समझौते की बढ़ती उम्मीदों और उसके बाद ‘होर्मुज स्ट्रेट’ के रास्ते व्यापार के पूरी तरह से फिर से शुरू होने की संभावना के बीच आई है. यह स्ट्रेट दुनिया भर में तेल और व्यापार के लिए एक बेहद अहम और रणनीतिक रास्ता माना जाता है. इस बीच, ब्लूमबर्ग न्यूज की रिपोर्ट के अनुसार, स्ट्रेट में रुकावट (ब्लॉकेड) के कारण कुवैत ने तेल की खेप पर ‘फोर्स मेज्योर’ (अपरिहार्य स्थिति) घोषित कर दिया है.
वैश्विक बाजारों में तेजी
दलाल स्ट्रीट (भारतीय शेयर बाजार) में यह तेजी ग्लोबल बाजारों में आई एक आम राहत रैली के बीच देखने को मिली है. जापान के निक्केई सूचकांक में लगभग 1 फीसदी की बढ़त दर्ज की गई, जबकि दक्षिण कोरिया के कोस्पी सूचकांक में लगभग 3 फीसदी की तेजी आई. हांगकांग का हैंग सेंग 0.6 फीसदी से ज्यादा बढ़ा, जबकि चीन के शंघाई कंपोजिट ने सुबह की सारी गिरावट मिटा दी और हरे निशान में आ गया.
यूरोपीय बाजार हरे निशान में खुले. UK का FTSE और फ्रांस का CAC मामूली बढ़त के साथ ट्रेड कर रहे थे, जबकि जर्मनी का DAX 0.6 फीसदी से ज्यादा बढ़ा. वॉल स्ट्रीट पिछले सेशन में लाल निशान में बंद हुआ. टेक-हैवी Nasdaq नए रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचने के बाद 0.26 फीसदी गिरा. हालांकि, Dow Jones फ्यूचर्स आज हरे निशान में हैं.
FII की बिकवाली में नरमी
लगातार तीन सेशन तक भारतीय इक्विटीज की नेट खरीदारी करने के बाद, विदेशी निवेशक सोमवार को दलाल स्ट्रीट पर फिर से नेट बिकवाल बन गए. FIIs ने सोमवार को लगभग 1,060 करोड़ रुपए की भारतीय इक्विटीज नेट बेचीं. पिछले हफ्ते लगातार तीन सेशन में उन्होंने 1,731 करोड़ रुपए के शेयर खरीदे थे. मार्च में हुई भारी बिकवाली के बाद FII की बिकवाली की मात्रा में काफी कमी आई है, जिसका असर अप्रैल में भी दिखा.
उदाहरण के लिए, FIIs ने 7 अप्रैल को 8,692 करोड़ रुपए, 30 मार्च को 11,163 करोड़ रुपए से ज्यादा और 23 मार्च को 10,414 करोड़ रुपए से ज्यादा की भारतीय इक्विटीज नेट बेची थीं. कल की नेट बिकवाली हाल ही में देखी गई FII की पिछली बिकवाली की होड़ की तुलना में काफी कम है.
फिर भी, कुछ सावधानी बरतना जरूरी है. बॉन्ड यील्ड ऊंचे बने हुए हैं, और रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले कमजोर हुआ है. भारतीय रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 0.3 फीसदी गिरकर 93.45 पर आ गया. RBI के FX उपायों में आंशिक बदलाव और US-ईरान वार्ता को लेकर अनिश्चितता के कारण रुपए पर दबाव पड़ा.



