Satya Report: करेंसी मार्केट में लगातार दूसरे दिन डॉलर के मुकाबले रुपए में बड़ी गिरावट देखने को मिली है. आंकड़ों को देखें तो इन दो दिनों में डॉलर के मुबाबले रुपए में 50 पैसे से ज्यादा की गिरावट देखने को मिल चुकी है. खास बात तो ये है कि अमेरिका और ईरान के बीच शांति वार्ता की उम्मीदें बढ़ गई है. वहीं दूसरी ओर कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट देखने को मिली है. उसके बाद भी रुपए में गिरावट का सिलसिला रुकने का नाम नहीं ले रहा है. जिसकी वजह से डॉलर के मुकाबजे में 93.50 के लेवल के करीब पहुंच गया है. खास बात तो ये है कि हाल ही में रुपए को उठाने के लिए कुछ उपाए किए थे. उसके बाद भी रुपए को सपोर्ट नहीं किया है. आइए आपको भी बताते हैं कि आखिर रुपए को लेकर किस तरह के आंकड़े देखने को मिल रहे हैं.

रुपए में लगातार दूसरे दिन गिरावट
मंगलवार को रुपया 32 पैसे गिरकर अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 93.48 (अस्थायी) पर बंद हुआ. इस गिरावट की वजह अमेरिकी करेंसी की मजबूती और कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव के साथ-साथ पश्चिम एशिया में शांति वार्ता की प्रगति को लेकर बनी अनिश्चितताएं थीं. फॉरेक्स विश्लेषकों ने बताया कि घरेलू शेयर बाज़ारों में तेजी के बावजूद लोकल करेंसी को कोई सहारा नहीं मिला. इस पर रिजर्व बैंक के उस हालिया फैसले का भी कुछ असर पड़ा, जिसके तहत उसने नॉन-डिलीवरेबल फॉरवर्ड बाजारों में सट्टेबाजी पर लगी पाबंदियों में ढील दी थी.
इंटरबैंक विदेशी मुद्रा बाज़ार में, रुपया 93.25 पर खुला. दिन के कारोबार के दौरान यह गिरकर 93.63 के निचले स्तर तक पहुँच गया, लेकिन सत्र के अंत में 32 पैसे की गिरावट के साथ अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 93.48 (अस्थायी) पर बंद हुआ. सोमवार को रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 25 पैसे की गिरावट के साथ 93.16 पर बंद हुआ था. इसका मतलब है कि रुपए में डॉलर के मुकाबले 57 पैसे की गिरावट देखने को मिल चुकी है. इससे पिछले दो सत्रों में करेंसी ने 47 पैसे की बढ़त हासिल की थी.
आरबीआई ने हाल ही में किए थे ये फैसले
सोमवार को रिजर्व बैंक ने 1 अप्रैल को जारी उन गाइडलाइंस को आंशिक रूप से वापस ले लिया, जिनका मकसद रुपए में होने वाली अत्यधिक सट्टेबाजी पर रोक लगाना था. बैंकिंग रेगुलेटर ने नॉन-डिलीवरेबल फॉरवर्ड बाजारों में ‘नेट ओपन पोजिशंस’ की सीमा 10 करोड़ डॉलर (100 मिलियन USD) तय कर दी थी और बैंकों को 10 अप्रैल तक इसका पालन करने का निर्देश दिया था. संशोधित निर्देशों के तहत, अधिकृत डीलर या बैंक अब भारत में रहने वाले या अनिवासी उपयोगकर्ताओं को भारतीय रुपये (INR) से जुड़े नॉन-डिलीवरेबल डेरिवेटिव अनुबंध फिर से पेश कर सकते हैं. हालाँकि, उन्हें ‘संबंधित-पक्ष लेनदेन’ (related-party transactions) से जुड़ी कुछ पाबंदियों का पालन करना होगा. इसके अलावा, ‘नेट ओपन पोज़िशन’ पर लगी 10 करोड़ डॉलर की सीमा अभी भी लागू रहेगी.
94 के पार जाएगा रुपया?
मिराए एसेट शेयरखान के रिसर्च एनालिस्ट अनुज चौधरी ने बताया कि अमेरिका-ईरान वार्ता को लेकर बनी अनिश्चितता और कच्चे तेल की कीमतों में आई तेजी के कारण रुपए में गिरावट दर्ज की गई. डॉलर की मजबूती ने भी रुपए पर दबाव डाला. हालांकि, ग्लोबल मार्केट्स में आई तेजी ने रुपए को और ज्यादा गिरने से कुछ हद तक बचा लिया. चौधरी ने कहा कि व्यापारी अमेरिका से जारी होने वाले रिटेल सेल और ADP रोजगार परिवर्तन के आंकड़ों से संकेत ले सकते हैं. USD-INR स्पॉट प्राइस के 93.30 रुपये से 93.90 रुपये के दायरे में कारोबार करने की उम्मीद है.
डॉलर इंडेक्स में मजबूती
इस बीच, डॉलर इंडेक्स—जो छह प्रमुख मुद्राओं की एक टोकरी के मुकाबले अमेरिकी डॉलर की मज़बूती को मापता है—0.19 प्रतिशत बढ़कर 98.09 पर पहुंच गया. ब्रेंट क्रूड, जो तेल का वैश्विक बेंचमार्क है, वायदा कारोबार में 0.70 प्रतिशत की गिरावट के साथ 94.81 अमेरिकी डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार कर रहा था. विश्लेषकों ने कच्चे तेल की कीमतों में इस उतार-चढ़ाव की वजह होर्मुज जलडमरूमध्य से तेल की आपूर्ति में रुकावटों को लेकर बनी लगातार चिंताओं को बताया. इसके अलावा, अमेरिका और ईरान के बीच संघर्ष-विराम समझौता बुधवार को समाप्त होने वाला है. .
शेयर बाजार में आई तेजी
ताजा घटनाक्रम में, ईरान के मुख्य वार्ताकार ने मंगलवार को कहा कि तेहरान धमकियों के दबाव में बातचीत नहीं करेगा, जबकि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने संकेत दिया कि उन्हें ईरान के साथ संघर्ष खत्म करने की कोई जल्दी नहीं है. घरेलू शेयर बाज़ारों में, 30 शेयरों वाला सेंसेक्स 753.03 अंक या 0.96 प्रतिशत की बढ़त के साथ 79,273.33 पर बंद हुआ, जबकि निफ्टी 211.75 अंक या 0.87 प्रतिशत की बढ़त के साथ 24,576.60 पर पहुंच गया. एक्सचेंज के आंकड़ों के अनुसार, विदेशी संस्थागत निवेशकों ने सोमवार को लगभग 1,059.93 करोड़ रुपये के शेयर बेचे.



