Satya Report: किसान क्रेडिट कार्ड (KCC) किसानों के लिए एक बड़ी राहत योजना है, जिससे वे कम ब्याज पर खेती के लिए आसानी से लोन ले सकते हैं. लेकिन जब आर्थिक दिक्कतों के कारण किसान समय पर कर्ज नहीं चुका पाते, तो उनके मन में सबसे बड़ा सवाल यही उठता है. क्या बैंक उनकी जमीन नीलाम कर सकता है? इस मुद्दे को लेकर कई तरह की गलतफहमियां भी हैं. आइए आपको KCC लोन डिफॉल्ट से जुड़े नियमों के बारे में बताते हैं.

किसान क्रेडिट कार्ड (KCC) योजना की शुरुआत 1998 में किसानों को साहूकारों के चंगुल से बचाने और उन्हें सस्ती दरों पर बैंकिंग सुविधा देने के उद्देश्य से की गई थी. इस योजना के तहत किसान अपनी जरूरत के हिसाब से लोन लेकर खेती, बीज, खाद और सिंचाई जैसे खर्च पूरे कर सकते हैं. यह एक फ्लेक्सिबल क्रेडिट सिस्टम है, जिसमें बार-बार आवेदन करने की जरूरत नहीं होती.
कितने रुपये तक का मिलता है लोन?
आमतौर पर KCC के तहत 50 हजार से लेकर 3 लाख रुपये तक का लोन मिलता है, जो किसान की जमीन और जरूरत के अनुसार बढ़ भी सकता है. अगर किसान समय पर कर्ज चुका देता है, तो उसे ब्याज में सब्सिडी मिलती है, जिससे प्रभावी ब्याज दर करीब 4% तक रह जाती है. लेकिन जब किसान लोन चुकाने में असमर्थ हो जाता है, तो बैंक तुरंत सख्त कार्रवाई नहीं करता. सबसे पहले बैंक रिमाइंडर और नोटिस भेजता है. यदि 90 दिनों तक भुगतान नहीं होता, तो खाते को NPA घोषित किया जाता है. इसके बाद बैंक रिकवरी की प्रक्रिया शुरू करता है, जिसमें पहले समझौते की कोशिश की जाती है.
अगर इसके बाद भी समाधान नहीं निकलता, तो मामला प्रशासन तक पहुंच सकता है. तहसील स्तर पर इसे राजस्व बकाया माना जाता है और वसूली की प्रक्रिया शुरू होती है. जमीन कुर्क करना और अंत में नीलामी करना इस प्रक्रिया का आखिरी चरण होता है. नीलामी से पहले किसान को सार्वजनिक नोटिस दिया जाता है और उसे अंतिम मौका भी मिलता है. नीलामी से मिली रकम से बैंक अपना बकाया वसूल करता है और बची हुई राशि किसान को वापस कर दी जाती है.
इन मामलों में मिल सकती है राहत
हर मामले में जमीन नीलामी जरूरी नहीं होती. प्राकृतिक आपदाएं जैसे बाढ़ या सूखा, सरकार की लोन माफी योजनाएं या बीमा क्लेम जैसी परिस्थितियों में किसानों को राहत मिल सकती है. छोटे और सीमांत किसानों के मामलों में भी अक्सर नरमी बरती जाती है. अगर किसान को लगता है कि बैंक ने नियमों का पालन नहीं किया है, तो वह कोर्ट या DRT में अपील कर सकता है. इसके अलावा, लोन री-स्ट्रक्चरिंग और वन टाइम सेटलमेंट जैसे विकल्प भी मौजूद हैं. इसलिए जमीन नीलामी बैंक का पहला कदम नहीं बल्कि आखिरी विकल्प होता है. सही समय पर बैंक से संवाद करना ही सबसे बेहतर उपाय है. .
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