Satya Report: Gurugram News: साइबर सिटी गुरुग्राम अपनी ऊंची इमारतों और मल्टीनेशनल कंपनियों के लिए जाना जाता है. यही शहर लंबे समय से एक गंभीर समस्या से जूझ रहा है. और ये समस्या है सीवर जाम और ओवरफ्लो की. बारिश हो या सामान्य दिन, शहर की सड़कों पर बहता गंदा पानी न केवल प्रशासन की छवि खराब करता है. बल्कि स्थानीय निवासियों के लिए भी नर्क जैसी स्थिति पैदा कर देता है. दिन भर बदबू से लोग परेशान रहते हैं. अब इस समस्या को जड़ से खत्म करने के लिए गुरुग्राम नगर निगम (MCG) ने एक ऐतिहासिक और बेहद महत्वाकांक्षी योजना तैयार की है.

नगर निगम अब शहर के सीवर तंत्र के कायाकल्प और रखरखाव पर 270 करोड़ रुपये की भारी-भरकम राशि खर्च करने जा रहा है. निगम के इतिहास में यह पहली बार है जब सीवर व्यवस्था को दुरुस्त करने के लिए इतने बड़े बजट का प्रावधान किया गया है. नगर निगम के उच्चाधिकारियों ने इस योजना का पूरा खाका तैयार कर लिया है. 270 करोड़ रुपये का विस्तृत एस्टीमेट बनाकर मंजूरी के लिए चंडीगढ़ मुख्यालय भेज दिया गया है. जैसे ही वहां से हरी झंडी मिलती है, टेंडर प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी. इस योजना का मुख्य उद्देश्य शहर के करीब 1700 किलोमीटर लंबे सीवर नेटवर्क और 33 हजार मैनहोल की नियमित सफाई सुनिश्चित करना है.
हाल ही में संपन्न हुए हरियाणा विधानसभा चुनाव में भी सीवर की बदहाली एक ज्वलंत मुद्दा रही थी. मुख्यमंत्री से लेकर स्थानीय नेताओं तक, सभी को जनता के गुस्से का सामना करना पड़ा था. इसी राजनीतिक और सामाजिक दबाव के बाद निगम ने इस पंचवर्षीय योजना को अमलीजामा पहनाया है.
निजी हाथों में होगा रखरखाव, 24 घंटे में समाधान की शर्त
इस योजना की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि निगम अब खुद सफाई करने के बजाय इसका जिम्मा निजी विशेषज्ञ एजेंसियों को सौंपेगा. पूरे शहर को चार अलग-अलग जोन में बांटा गया है और प्रत्येक जोन के लिए एक अलग एजेंसी नियुक्त की जाएगी.
एजेंसियों के चयन के लिए बेहद सख्त नियम बनाए गए हैं
एजेंसियों को अगले 5 साल के लिए जिम्मेदारी दी जाएगी ताकि वे अपनी मशीनरी और मैनपावर में निवेश कर सकें. एजेंसियों के लिए सबसे कड़ी शर्त यह होगी कि जनता की किसी भी शिकायत का समाधान उन्हें 24 घंटे के भीतर करना होगा. एजेंसियों को अत्याधुनिक मशीनों का उपयोग करना होगा ताकि मैनहोल में उतरने की जरूरत न पड़े और सफाई पूरी तरह प्रभावी हो. यदि कोई एजेंसी तय समय सीमा में काम पूरा नहीं करती है, तो उस पर भारी जुर्माना लगाया जाएगा.
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नई लाइनें बिछाने का काम निगम रखेगा अपने पास
नगर निगम ने इस योजना में कार्यों का स्पष्ट बंटवारा किया है. इन निजी एजेंसियों का काम केवल मौजूदा नेटवर्क की सफाई, गाद (Silt) निकालना, जाम खोलना और टूटे हुए मैनहोल के ढक्कन बदलना होगा. .
अगर शहर के किसी नए विकसित इलाके में सीवर लाइन बिछानी है या किसी पुरानी लाइन को बदलकर उसकी क्षमता बढ़ानी है, तो यह कार्य नगर निगम अपने स्तर पर खुद करेगा. एक बार जब निगम नई लाइन बिछाकर उसे चालू कर देगा, तो उसके रखरखाव की जिम्मेदारी अनुबंध के अनुसार निजी एजेंसी की हो जाएगी. इससे कार्य में पारदर्शिता बनी रहेगी और जवाबदेही तय करना आसान होगा.
चार जोन, चार एजेंसियां: क्यों है यह जरूरी?
निगम आयुक्त प्रदीप दहिया के अनुसार, पूरे शहर का ठेका किसी एक कंपनी को न देकर चार अलग-अलग कंपनियों को देने के पीछे एक ठोस रणनीति है. यदि एक ही कंपनी के पास पूरे शहर का काम होगा और वह विफल रहती है, तो पूरा शहर जाम हो जाएगा. चार अलग-अलग एजेंसियां होने से स्वस्थ प्रतिस्पर्धा बनी रहेगी और निगम के पास विकल्प मौजूद रहेंगे. साथ ही, अलग-अलग टीमें होने से रिस्पांस टाइम में भारी कमी आएगी.
रोजाना 100 से अधिक शिकायतें और संसाधनों की कमी
वर्तमान में गुरुग्राम नगर निगम की हालत यह है कि उसके पास सीवर जाम की रोजाना 100 से अधिक शिकायतें आती हैं. लेकिन निगम के पास पर्याप्त मैनपावर और आधुनिक सुपर-सकर मशीनों की भारी कमी है. स्थिति यह है कि निगम के कर्मचारी केवल 50% शिकायतों का ही निपटारा कर पाते हैं, बाकी शिकायतें लंबित रह जाती हैं, जिससे गंदा पानी सड़कों और कॉलोनियों में जमा होकर बीमारियों का कारण बनता है.
नई व्यवस्था लागू होने के बाद, इन शिकायतों का बोझ निजी एजेंसियों पर होगा, जिनके पास खुद की मशीनरी और बड़ी संख्या में कर्मचारी होंगे. इससे निगम के अधिकारियों को केवल मॉनिटरिंग और सुपरविजन का काम करना होगा.
जनता को क्या होगा फायदा?
अभी तक गुरुग्राम की जनता को एक सीवर जाम खुलवाने के लिए हफ्तों तक निगम के दफ्तरों के चक्कर लगाने पड़ते थे या पोर्टल पर बार-बार रिमाइंडर डालने पड़ते थे. नई व्यवस्था के तहत सीवर केवल जाम होने पर नहीं खोला जाएगा, बल्कि शेड्यूल के अनुसार उसकी नियमित सफाई होगी ताकि जाम की स्थिति ही न बने. सीवर ओवरफ्लो होने से सड़कें जल्दी टूटती हैं. सुचारू जल निकासी से सड़कों की उम्र बढ़ेगी. खुले में बहते गंदे पानी से होने वाली बीमारियों (जैसे डेंगू, हैजा) में कमी आएगी. 24 घंटे का नियम लागू होने से नागरिकों को मानसिक शांति मिलेगी.
नगर निगम आयुक्त प्रदीप दहिया ने स्पष्ट किया है कि एस्टीमेट सरकार के पास है और अनुमति मिलते ही टेंडर प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी. यह योजना गुरुग्राम को एक विश्वस्तरीय बुनियादी ढांचा देने की दिशा में सबसे बड़ा कदम साबित हो सकती है.



