Satya Report: शेयर बाजार में इन दिनों अनिल अग्रवाल की कंपनी वेदांता (Vedanta) की भारी चर्चा है. वजह है कंपनी एक बहुत बड़े बदलाव के दौर से गुजरने वाली है. आगामी 1 मई 2026 की तारीख बाजार के लिए बेहद अहम है. इस दिन वेदांता एक से टूटकर पांच अलग-अलग कंपनियों में बंट जाएगी. बाजार के जानकारों को इस डिमर्जर से निवेशकों के लिए बड़ी ‘वैल्यू अनलॉकिंग’ की उम्मीद है. अगर आपके पोर्टफोलियो में भी वेदांता के शेयर हैं या आप इसे खरीदने का मन बना रहे हैं, तो आपके लिए इसके हर पहलू को समझना बहुत जरूरी है.

5 हिस्सों में बंटेगा साम्राज्य, किसे क्या मिलेगा?
डिमर्जर की इस प्रक्रिया के बाद मौजूदा वेदांता कंपनी तो बाजार में लिस्टेड रहेगी ही, इसके अलावा चार नए नाम भी शेयर बाजार में कदम रखेंगे. कंपनी का पूरा बिजनेस ढांचा बदलकर अब वेदांता, वेदांता एल्यूमिनियम, वेदांता पावर, वेदांता ऑयल एंड गैस और वेदांता स्टील एंड आयरन ओर के रूप में सामने आएगा. .
निवेशकों के नजरिए से समझें तो यह एक के बदले पांच का सौदा है. डिमर्जर का अनुपात 1:1 तय किया गया है. अगर आपके डीमैट खाते में वेदांता का एक शेयर है, तो आपको नई बनने वाली चारों कंपनियों का भी एक-एक शेयर मिलेगा. हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि आपकी रकम पांच गुना हो जाएगी. शेयरों की संख्या जरूर बढ़ेगी, लेकिन कुल वैल्यू सभी पांच कंपनियों में बंट जाएगी और उसी आधार पर पुरानी और नई कीमत के बीच एडजस्टमेंट होगा.
29 अप्रैल की डेडलाइन
इस पूरी प्रक्रिया का फायदा उठाने के लिए समय सीमा का ध्यान रखना सबसे ज्यादा जरूरी है. कंपनी ने 1 मई 2026 को रिकॉर्ड डेट (Record Date) तय किया है. इसका मतलब है कि जिन निवेशकों के खाते में 1 मई को शेयर होंगे, उन्हें ही नई कंपनियों के शेयर मिलेंगे.
चूंकि भारतीय शेयर बाजार में T+1 सेटलमेंट सिस्टम लागू है, इसलिए आपके लिए 29 अप्रैल तक शेयरों की खरीदारी करना अनिवार्य है. 30 अप्रैल को शेयर एक्स-डेट (Ex-Date) पर ट्रेड करेगा. अगर आप 30 अप्रैल या उसके बाद वेदांता के शेयर खरीदते हैं, तो आपको इस डिमर्जर का कोई लाभ नहीं मिलेगा.
बाजार में कब होगी नई कंपनियों की एंट्री?
ये नई कंपनियां बाजार में ट्रेडिंग के लिए कब उतरेंगी. इसका कोई आधिकारिक या तय समय नहीं है क्योंकि लिस्टिंग से पहले कई तरह की नियामकीय मंजूरियां लेनी होती हैं.
हालांकि, ब्रोकरेज फर्म नुवामा (Nuvama) के पिछले पैटर्न्स के आकलन के मुताबिक, रिकॉर्ड डेट के 4 से 8 हफ्ते के भीतर यह प्रक्रिया पूरी हो सकती है. यानी मई के आखिरी हफ्ते से लेकर जुलाई की शुरुआत तक ये नई कंपनियां शेयर बाजार में दस्तक दे सकती हैं.
निवेशकों पर क्या पड़ेगा असर?
यह बंटवारा सिर्फ वेदांता तक सीमित नहीं रहने वाला है, इसका असर शेयर बाजार के प्रमुख इंडेक्स पर भी देखने को मिलेगा. निफ्टी नेक्स्ट 50 (Nifty Next 50) में वेदांता का फिलहाल करीब 5.2 प्रतिशत हिस्सा है. डिमर्जर के बाद कंपनी इंडेक्स में बनी रहेगी, लेकिन नई कंपनियां कुछ समय के लिए ‘डमी’ के रूप में इंडेक्स में शामिल होंगी. बाद में उनके प्रदर्शन के आधार पर तय होगा कि वे इंडेक्स का हिस्सा बनी रहेंगी या नहीं.
अगर इन कंपनियों की लिस्टिंग में जून से ज्यादा की देरी होती है, तो वे सितंबर में होने वाली इंडेक्स रीबैलेंसिंग से चूक सकती हैं. इसका सीधा असर पैसिव फंड्स से आने वाले निवेश पर पड़ सकता है. जानकारों का मानना है कि वेदांता एल्यूमिनियम जैसी बड़ी कंपनी बड़े इंडेक्स में अपनी जगह पक्की कर सकती है, जबकि पावर और गैस जैसी इकाइयां स्मॉलकैप इंडेक्स में जा सकती हैं.



