Satya Report: तीनों लोकों को तारने वाली मां गंगा के जिस अमृत जल का स्पर्श पाते ही व्यक्ति के सभी पाप दूर हो जाते हैं और पुण्य की प्राप्ति होती है, उस पावन गंगाजल को घर पर लाने और रखने के लिए शास्त्रों में क्या नियम बताए गये हैं. गंगाजल से जुड़े नियम और धार्मिक महत्व को जानने के लिए जरूर पढ़ें ये लेख.

हिंदू मान्यता के अनुसार मकरवाहिनी गंगा में जल नहीं बल्कि अमृत बहता है, जिसमें स्नान और उसका पान करने के लिए सिर्फ मनुष्य ही नहीं बल्कि देवी-देवता तक पृथ्वी पर आते हैं. देवनदी कहलाने वाली गंगा से जुड़ा है गंगा सप्तमी का महापर्व, जो हर साल वैशाख मास के शुक्लपक्ष की सप्तमी तिथि पर मनाया जाता है. यदि आप आज इस महापर्व पर गंगा में स्नान करने और उसके पवित्र जल को घर लाने की सोच रहे हैं तो आपको इस अमृत जल के धार्मिक महत्व और इससे जुड़े जरूरी नियम जरूर जानना चाहिए.
क्यों पवित्र माना जाता है गंगाजल?
पतितपावनी मां गंगा की पवित्रता की बात करें तो इसके पीछे कई पौराणिक मान्यताएं जुड़ी हुई हैं. हिंदू मान्यता के अनुसार मां गंगा का संबंध त्रिदेव से जुड़ा हुआ है. मां गंगा को ब्रह्मा जी के कमंडल से लेकर श्री हरि के चरणों से जोड़कर देखा जाता हैं, जो अंत में देवों के देव महादेव की जटाओं से होती पृथ्वी तक पहुंचती हैं. त्रिदेव से जुड़े इन्हीं मान्यताओं के कारण उसका जल अत्यंत ही पवित्र होकर अमृत के समान हो जाता है. जिसका स्पर्श होते ही व्यक्ति का तन-मन पवित्र हो जाता है. इनके अलावा हिमालय से निकलने वाली गंगा अपने मार्ग में कई जड़ी-बूटियों और खनिजों के बीच से गुजरती है, जिसके कारण भी इसमें कई औषधीय गुण आ जाते हैं जो इसे सालों साल तक पवित्र और निर्मल बनाए रखते हैं. .
गंगाजल का धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व
सनातन परंपरा में कोई भी धार्मिक-मांगलिक कार्य गंगाजल के बगैर नहीं होता है. यह पवित्र जल इंसान के साथ जन्म से लेकर मृत्यु तक जुड़ा रहता है. भगवान विष्णु के चरणों से निकली मां गंगा विष्णुपदी कहलाती हैं. यही कारण यह वैष्णव परंपरा से जुड़े लोगों के लिए अति पूजनीय मानी गई हैं तो वहीं शिव की जटाओं से होकर पृथ्वी पर आने वाली गंगा को शैव परंपरा से जुड़ा हर शिव भक्त अपनी इष्टदेवी मानता है. हर साल श्रावण मास में शिवलिंग का अभिषेक करने के लिए भोले के भक्त कई किमी लंबी कांवड़ यात्रा करते हैं. वहीं शाक्त परंपरा से जुड़े लोग उन्हें देवी मानते हुए उनकी तंत्र-मंत्र के जरिए विशेष साधना करते हैं.
गंगा जल से जुड़े नियम
गंगा जल को लाने के लिए घर पर पहले स्नान करें फिर गंगातट पर जाएं. गंगा जी में से जल निकालने से पहले उन्हें प्रणाम करके प्रार्थना करें.
गंगा जल को हमेशा किसी तांबे या फिर पीतल के पात्र में लेकर आएं. प्लास्टिक पात्र में गंगाजल रखने की गलती न करें.
गंगा जल को घर में हमेशा पवित्र स्थान पर रखें. वास्तु के अनुसार गंगाजल को उत्तर दिशा में रखना अधिक शुभ है.
गंगाजल को कभी भूलकर भी अपवित्र अवस्था में स्पर्श करने की गलती न करें.



