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मिडिल ईस्ट तनाव का असर, भारत में बढ़ी इंडक्शन चूल्हों की बिक्री

Satya Report: ईरान-इजराइल तनाव के बाद मिडिल ईस्ट में हालात बिगड़े हैं और होरमुज़ जलडमरूमध्य पर असर पड़ा है. इसका सीधा असर भारत पर भी देखने को मिल रहा है, जहां एलपीजी की सप्लाई प्रभावित होने से लोगों को गैस सिलेंडर के लिए परेशानी झेलनी पड़ रही है. इस संकट के बीच इंडक्शन चूल्हे एक बड़े विकल्प के रूप में तेजी से उभर रहे हैं.

मिडिल ईस्ट तनाव का असर, भारत में बढ़ी इंडक्शन चूल्हों की बिक्री
मिडिल ईस्ट तनाव का असर, भारत में बढ़ी इंडक्शन चूल्हों की बिक्री

इंडक्शन चूल्हा बना गैस का विकल्प

पहले इंडक्शन चूल्हा सिर्फ एक वैकल्पिक साधन माना जाता था, लेकिन अब यह धीरे-धीरे किचन का मुख्य हिस्सा बनता जा रहा है. बढ़ती गैस की कमी और लोगों में जागरूकता के कारण इसकी मांग में जबरदस्त उछाल आया है. इंडक्शन कुकटॉप बिजली से चलता है और इसमें खाना जल्दी और सुरक्षित तरीके से बनता है. यही वजह है कि शहरों के साथ-साथ अब गांवों में भी इसकी मांग बढ़ रही है.

कंपनियों ने बढ़ाया प्रोडक्शन

इंडक्शन बनाने वाली कंपनियों का कहना है कि पिछले कुछ महीनों में डिमांड तेजी से बढ़ी है. केडब्ल्यू इलेक्ट्रिक्स के डायरेक्टर नितीश खेतान के अनुसार पहले जहां हर महीने करीब 1 लाख यूनिट बनते थे, अब यह आंकड़ा बढ़कर 2 लाख से ज्यादा हो गया है. यानी प्रोडक्शन में 100% से ज्यादा की बढ़ोतरी हुई है. कंपनियों ने अपनी मैन्युफैक्चरिंग क्षमता बढ़ाने के लिए ऑटोमेशन और स्किल्ड वर्कफोर्स का सहारा लिया है, ताकि बाजार की मांग को पूरा किया जा सके.

कीमतों में भी हुआ इजाफा

डिमांड बढ़ने के साथ-साथ इंडक्शन चूल्हों की कीमतों में भी 10-12% तक बढ़ोतरी देखने को मिली है. इसकी वजह कच्चे माल जैसे प्लास्टिक, एल्यूमिनियम और स्टील की कीमतों में बढ़ोतरी है.

सरकार से क्या उम्मीद?

इंडस्ट्री से जुड़े लोगों का कहना है कि अगर सरकार इंडक्शन चूल्हों पर सब्सिडी दे या जीएसटी कम करे, तो यह आम लोगों के लिए और सस्ता हो सकता है. जैसे इलेक्ट्रिक व्हीकल और सोलर सेक्टर को बढ़ावा मिला है, वैसे ही इस क्षेत्र में भी कदम उठाए जा सकते हैं. .

क्यों बढ़ रही है मांग?

बदलती लाइफस्टाइल, ऊर्जा के वैकल्पिक स्रोतों की ओर बढ़ता रुझान और गैस संकट जैसे कारण इंडक्शन चूल्हों की मांग को बढ़ा रहे हैं. LPG संकट के इस दौर में इंडक्शन चूल्हे एक मजबूत विकल्प बनकर उभरे हैं. अगर सरकार और इंडस्ट्री मिलकर काम करें, तो यह भविष्य में किचन का प्रमुख साधन बन सकता है.

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