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World DNA Day : डीएनए रिसर्च कैसे बदल रही भविष्य? कैंसर से महामारी तक इलाज के खुल रहे नए रास्ते

Satya Report: 25 अप्रैल को दुनिया भर में डीएनए दिवस मनाया जाता है. 1953 में इस दिन डीएनए की डबल हेलिक्स संरचना पर ऐतिहासिक शोध प्रकाशित हुआ था, जिसने जीवविज्ञान और चिकित्सा की दिशा ही बदल दी थी. डीएनए की मदद से मृत की पहचान से लेकर परिवार तक की जानकारी मिलना आसान हो गया था. अब साल 2026 में डीएनए कैंसर के इलाज से लेकर किसी महामारी को कंट्रोल करने और प्रिसीजन मेडिसिन तक पहुंच चुका है.

World DNA Day : डीएनए रिसर्च कैसे बदल रही भविष्य? कैंसर से महामारी तक इलाज के खुल रहे नए रास्ते
World DNA Day : डीएनए रिसर्च कैसे बदल रही भविष्य? कैंसर से महामारी तक इलाज के खुल रहे नए रास्ते

भारत में डीएनए से संबंधित अनुसंधान पर डीएनए सोसाइटी ऑफ इंडिया काम करती है. यह फरेंसिक डीएनए, पैटर्निटी टेस्टिंग, जीनोम सीक्वेंसिंग पर रिसर्च करती है. कैंसर जीनोमिक्स और नवजात जेनेटिक स्क्रीनिंग पर भी काम हो रहा है.

World DNA Day की पूर्व संध्या पर डीएनए अनुंधान के बारे में जानने के लिए हमने डीएनए सोसाइटी ऑफ इंडिया के अध्यक्ष प्रोफेसर डॉ. अशोक शर्मा से बातचीत की है. डॉ अशोक बताते हैं कि कैंसर के इलाज में एक नई उम्मीद बन गया है.

कैंसर को अब सिर्फ सेल्स की बीमारी नहीं, बल्कि एपिजीनोम की बीमारी के रूप में भी देखा जा रहा है. इससे अब वैज्ञानिक ऐसी दवाओं पर काम कर रहे हैं जो जीन की पहचान करके बीमारी के इलाज पर काम कर रही है. HER2 पॉजिटिव ब्रेस्ट कैंसर के लिए हरसेप्टिन जैसी टारगेटेड थेरेपी इसी दिशा में बड़ा बदलाव मानी जा रही हैं. वहीं लिक्विड बायोप्सी तकनीक से खून में ट्यूमर डीएनए पकड़कर कैंसर की वापसी का पता शुरुआती स्तर पर लगाया जा सकता है.

महामारी और वैक्सीन में भी डीएनए की भूमिका

प्रोफेसर शर्मा बताते हैं कि दुनिया में कोरोना महामारी आई थी. इस दौरान पता चला था कि यह वायरस लगातार खुद में बदलाव करता है. इससे वायरस के कई वेरिएंट भी आए. इसमें डीएनए की भूमिका है. वायरस के जीनोम की तेजी से सीक्वेंसिक करके नए वेरिएंट पहचाने जा सकते हैं. वेरिएंट की पहचान करके वैक्सीन भी अपडेट की जा सकती है. कई वैक्सीन को इसी तर्ज पर बनाया भी जा रहा है.

कृषि और खाद्य सुरक्षा में भी असर

डीएनए अनुसंधान स्वास्थ्य से आगे कृषि में भी क्रांति ला रहा है. गर्मी और सूखा सहने वाली फसलें, पोषण बढ़ाने वाले अनाज और गोल्डन राइस जैसी पहल खाद्य सुरक्षा के लिए अहम मानी जा रही हैं. भविष्य में जेनेटिक कोड सिर्फ स्वास्थ्य डेटा नहीं, बल्कि दुनिया का सबसे मूल्यवान डेटा बन सकता है,जो इलाज, रोकथाम और मानव जीवन की गुणवत्ता, तीनों को बदल सकता है.

बीमारियों की जल्द पहचान में मदद

पहले जिन बीमारियों की पहचान में कई साल लग जाते थे, अब जीन टेस्टिंग और जीनोम सीक्वेंसिंग की मदद से जल्दी पता लगाया जा सकता है. इसी तर्ज पर नवजात बच्चे की जेनेटिक स्क्रीनिंग पर भी काम किया जा रहा है. अब डीएनए रिसर्च बहुत आगे बढ़ गई है. आने वाले सालों में ये हेल्थ केयर सैक्टर के लिए एक बड़ा फायदा साबित होगा.

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