Satya Report: स्मार्टफोन सेक्टर में भारत के कदम तेजी से बढ़ते हुए दिखाई दे रहे हैं. बीते कुछ सालों में कंपनियों का बढ़ता प्रोडक्शन और एक्सपोर्ट के आंकड़े इस बात की साफ गवाही दे रहे हैं. अब आंकड़े सामने आए हैं, वो और भी ज्यादा हैरान करने वाले हैं. टीओआई की रिपोर्ट के अनुसार, घरेलू कॉन्ट्रैक्ट मैन्युफैक्चरर्स भारत के स्मार्टफोन प्रोडक्शन के माहौल को लगातार बदल रहे हैं, अब हर चार में से कम से कम एक डिवाइस लोकल कंपनियां बना रही हैं. यह देश के इलेक्ट्रॉनिक्स इकोसिस्टम में एक शांत लेकिन महत्वपूर्ण बदलाव है. इस तेजी की अगुवाई डिक्सन टेक्नोलॉजीस और भगवती प्रोडक्ट्स ने की है. 2025 में डिक्सन, सैमसंग इलेक्ट्रोनिक्स को पीछे छोड़ते हुए, कुल प्रोडक्शन के मामले में भारत की सबसे बड़ी स्मार्टफोन मैन्युफैक्चरर बन गई है.

टॉप पर पहुंची डिक्सन
Dixon ने इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग सर्विसेज की रैंकिंग में 19 फीसदी मार्केट शेयर के साथ टॉप पर है. Motorola, Realme और Xiaomi जैसे ग्लोबल ब्रांड्स से बढ़ते ऑर्डर्स की वजह से इसके आउटपुट में 89 फीसदी की जबरदस्त बढ़ोतरी हुई. ये आंकड़े स्मार्टफोन बनाने वाली कंपनियों के एक बड़े बदलाव को दिखाते हैं, जिसमें वे प्रोडक्शन का काम खास पार्टनर्स को आउटसोर्स कर रही हैं.
Counterpoint Research के अनुसार, Foxconn 16 फीसदी शेयर के साथ दूसरे नंबर पर रही. पिछले साल इसका शेयर 12 फीसदी था. इसकी सफलता का मुख्य कारण Apple से जुड़े एक्सपोर्ट शिपमेंट्स हैं. सैमसंग, अपने बड़े पैमाने के बावजूद, 2024 के 20 फीसदी शेयर से फिसलकर 18 फीसदी पर आ गई. इसकी वजह एक्सपोर्ट में अपेक्षाकृत धीमी बढ़ोतरी रही.
Bhagwati Products — जो Micromax Informatics और चीनी ओरिजिनल डिजाइन मैन्युफैक्चरर Huaqin Technologies का एक जॉइंट वेंचर है — 9 फीसदी शेयर के साथ टॉप पांच कंपनियों में शामिल हो गई. इसकी सफलता का आधार Vivo, Oppo और Realme से मिले मैन्युफैक्चरिंग के काम हैं. इससे यह पता चलता है कि चीनी ब्रांड्स अपनी सप्लाई चेन को नए सिरे से व्यवस्थित करते हुए लोकल कंपनियों के साथ अपनी पार्टनरशिप को और मजबूत कर रहे हैं.
सेल्स में मामूली इजाफा
2025 में भारत के स्मार्टफोन मैन्युफैक्चरिंग में 8 फीसदी की बढ़ोतरी हुई. वहीं, एक्सपोर्ट में 28 फीसदी की जबरदस्त बढ़ोतरी हुई, जो कुल प्रोडक्शन का लगभग एकतिहाई हिस्सा था. इसके विपरीत, घरेलू मांग लगभग स्थिर रही, और बिक्री में सिर्फ 1 फीसदी की मामूली बढ़ोतरी हुई. जानकारों का कहना है कि सरकारी पॉलिसीज से मिले सहयोग — जिसमें प्रोडक्शनलिंक्ड इंसेंटिव और विदेशी निवेश के नियमों में दी गई ढील शामिल है — ने इस बदलाव की गति को तेज करने में मदद की है. काउंटर प्वाइंट रिसर्च के रिसर्च एनालिस्ट अब्दुल रहमान खान ने कहा कि Oppo और Vivo की आउटसोर्सिंग रणनीति एक अहम मोड़ साबित हुई.
कैसे हो रही है ग्रोथ?
खान ने टीओआई को बताया कि ओप्पो और वीवो ने 2024 के आसपास बड़े पैमाने पर आउटसोर्सिंग शुरू की. जैसे ही उन्होंने ऐसा किया, प्रोडक्शन की मात्रा में जबरदस्त बढ़ोतरी हुई और यह काम Bhagwati Products जैसी घरेलू मैन्युफैक्चरर कंपनियों को मिलने लगा. उन्होंने आगे कहा कि भगवति प्रोडक्ट्स के मामले में, Huaqin के साथ उसकी पार्टनरशिप भी काफी फायदेमंद साबित हुई है. Huaqin की सप्लाई चेन इंडस्ट्री में पहले से ही काफी मजबूत पकड़ और अच्छे संबंध हैं. विदेशी प्रत्यक्ष निवेश पर कड़ी निगरानी के चलते चीनी कंपनियाँ भी भारतीय कंपनियों के साथ जॉइंट वेंचर करके स्थानीय स्तर पर मैन्युफैक्चरिंग बढ़ाने की ओर बढ़ रही हैं.
2026 में एक्सपोर्ट ही बना रहेगा ग्रोथ इंजन
खान ने कहा कि PLI साइकिल का अंत करीब होने से वॉल्यूम का बंटवारा भी फिर से हो रहा है. हम देख रहे हैं कि इस बदलाव का कुछ हिस्सा Dixon Technologies जैसी कंपनियों की ओर जा रहा है, क्योंकि ब्रांड अपनी कॉस्ट और पार्टनरशिप की रणनीतियों को फिर से तय कर रहे हैं. उम्मीद है कि 2026 में एक्सपोर्ट ही ग्रोथ का मुख्य इंजन बना रहेगा, जिससे स्मार्टफोन भारत की इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग की मुहिम के केंद्र में रहेंगे. हालांकि, विश्लेषकों का कहना है कि अभी भी कुछ जोखिम बने हुए हैं. काउंटर प्वाइंट रिसर्च के रिसर्च डायरेक्टर तरुण पाठक ने कहा कि निकट भविष्य में आने वाली रुकावटें, जैसे कि यूएस इरान वॉर के कारण होने वाली बाधाएं, लॉजिस्टिक्स पर असर डाल सकती हैं. वहीं मेमोरी की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी से लंबे समय में मांग पर दबाव पड़ सकता है.



