Satya Report: आज के समय में एनीमिया और डिमेंशिया के मामले धीरेधीरे बढ़ते जा रहे हैं. हाल ही में आई एक स्टडी में एनीमिया यानी खून की कमी और डिमेंशिया के बीच अहम संबंध सामने आया है. स्टडी के मुताबिक, जिन लोगों में एनीमिया की समस्या होती है, उनमें याददाश्त से जुड़ी बीमारियों का खतरा अधिक हो सकता है. यह रिसर्च खासतौर पर बढ़ती उम्र के लोगों पर की गई, जिसमें पाया गया कि खून की कमी सिर्फ शरीर की कमजोरी तक सीमित नहीं है, बल्कि यह दिमाग की सेहत को भी प्रभावित कर सकती है.

स्टडी में यह भी सामने आया कि का असर दिमाग से जुड़े कुछ बायोमार्कर्स पर पड़ता है, जो आगे चलकर डिमेंशिया के जोखिम को बढ़ा सकते हैं. हालांकि विशेषज्ञ इसे सीधे कारण नहीं मानते, लेकिन इसे एक महत्वपूर्ण जोखिम कारक जरूर बताया गया है. ऐसे में इस विषय को समझना और समय रहते सतर्क रहना बेहद जरूरी हो जाता है.
एनीमिया और डिमेंशिया के बीच क्या संबंध मिला?
में पाया गया कि जिन लोगों में एनीमिया की समस्या होती है, उनमें डिमेंशिया का खतरा अधिक हो सकता है. यह रिसर्च खासतौर पर 60 साल से अधिक उम्र के लोगों पर की गई, जिसमें देखा गया कि खून की कमी का असर दिमाग की क्षमता पर पड़ सकता है. एनीमिया के कारण शरीर में हीमोग्लोबिन कम हो जाता है, जिससे दिमाग तक पर्याप्त ऑक्सीजन नहीं पहुंच पाती.
लंबे समय तक ऑक्सीजन की कमी रहने से दिमाग के सेल्स पर असर पड़ सकता है, जो धीरेधीरे याददाश्त और सोचने की क्षमता को कमजोर कर सकता है. स्टडी में यह भी संकेत मिला कि एनीमिया वाले लोगों में डिमेंशिया विकसित होने की संभावना सामान्य लोगों की तुलना में अधिक देखी गई, जिससे इस संबंध को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता.
स्टडी में क्याक्या सामने आया?
इस स्टडी में 2,000 से अधिक बुजुर्ग लोगों को शामिल किया गया और उन्हें करीब 9 साल तक फॉलो किया गया. रिसर्च के दौरान पाया गया कि जिन प्रतिभागियों को शुरुआत में एनीमिया था, उनमें आगे चलकर डिमेंशिया का खतरा ज्यादा रहा.
इसके अलावा, एनीमिया वाले लोगों में कुछ ऐसे बायोमार्कर्स भी पाए गए, जो अल्जाइमर जैसी बीमारियों से जुड़े होते हैं. ये बायोमार्कर्स दिमाग में होने वाले बदलावों का संकेत देते हैं. स्टडी के नतीजे यह भी बताते हैं कि एनीमिया और दिमागी स्वास्थ्य के बीच एक गहरा संबंध हो सकता है. हालांकि यह जरूरी नहीं कि हर एनीमिया मरीज में डिमेंशिया विकसित हो, लेकिन यह जोखिम जरूर बढ़ा सकता है.
क्या एनीमिया सीधे डिमेंशिया का कारण है?
आरएमएल हॉस्पिटल में मेडिसिन विभाग में डायरेक्टर प्रोफेसर डॉ. सुभाष गिरि बताते हैं कि एनीमिया को डिमेंशिया का सीधा कारण नहीं माना जा सकता, बल्कि इसे एक जोखिम कारक के रूप में देखा जाता है यानी जिन लोगों को एनीमिया है, उनमें डिमेंशिया का खतरा बढ़ सकता है, लेकिन यह जरूरी नहीं कि हर व्यक्ति को यह बीमारी हो.
इसके पीछे कई अन्य कारण भी जिम्मेदार हो सकते हैं, जैसे उम्र, खराब लाइफस्टाइल और अन्य स्वास्थ्य समस्याएं. इसलिए इस संबंध को समझते हुए एनीमिया को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए. समय पर जांच और सही इलाज के जरिए खून की कमी को कंट्रोल किया जा सकता है, जिससे दिमाग की सेहत पर पड़ने वाले संभावित असर को कम किया जा सकता है.



