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जैसे ही सुना बिहारी कनेक्शन, कांस्टेबल देने लगा गंदी गालियां और कर दी फायरिंग… दिल्ली के डबल मर्डर केस की पूरी कहानी

Satya Report: Delhi Crime News: राजधानी दिल्ली के दक्षिणपश्चिम जिले से एक बेहद चौंकाने वाली और दर्दनाक घटना सामने आई है. यहां कानून के एक रक्षक ने ही भक्षक का रूप धारण कर लिया. जाफरपुर कलां इलाके के रावता गांव में रविवार तड़के दिल्ली पुलिस के एक हेड कांस्टेबल ने मामूली विवाद के बाद अपनी सर्विस पिस्टल से गोली चला दी. इस गोलीबारी में 21 वर्षीय फूड डिलीवरी एजेंट सहित दो लोगों की मौके पर ही मौत हो गई.

जैसे ही सुना बिहारी कनेक्शन, कांस्टेबल देने लगा गंदी गालियां और कर दी फायरिंग… दिल्ली के डबल मर्डर केस की पूरी कहानी
जैसे ही सुना बिहारी कनेक्शन, कांस्टेबल देने लगा गंदी गालियां और कर दी फायरिंग… दिल्ली के डबल मर्डर केस की पूरी कहानी

यह दुखद सिलसिला शनिवार रात एक जन्मदिन की पार्टी से शुरू हुआ. रावता गांव में रहने वाले रूपेश कुमार के दो वर्षीय बेटे का जन्मदिन था. इस समारोह में लगभग 20 लोग शामिल हुए थे, जिनमें रूपेश के रिश्तेदार और दोस्त थे. केक काटने और खुशियां मनाने के बाद, रात करीब 2 बजे मेहमान वापस जाने की तैयारी करने लगे. करीब 13 लोग, जिनमें दो छोटे बच्चे भी शामिल थे, मुख्य सड़क पर सवारी के इंतजार में खड़े थे. इसी दौरान पांडव , कृष्ण और दीपक एक मोटरसाइकिल पर सवार होकर निकलने लगे, जबकि उनके अन्य साथी स्कूटर पर थे.

विवाद की वजह: नफरत और नशे का मेल?

टाइम्स ऑफ इंडिया में छपी खबर के मुताबिक, प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया जब यह समूह सड़क पर था, तब वहां रहने वाला नीरज बलहारा नाम का व्यक्ति उनके पास आया. नीरज दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल में हेड कांस्टेबल के पद पर तैनात है. चश्मदीदों का आरोप है कि नीरज नशे की हालत में था. उसने वहां खड़े लोगों से पूछताछ शुरू की और उनके वहां होने पर आपत्ति जताई. दीपक, जो उस समय बाइक पर ही था, उसने बताया कि वे लोग अपनी क्षेत्रीय भाषा में बात कर रहे थे. इसे सुनकर नीरज भड़क गया और उन्हें उनके बिहार से होने को लेकर भद्दी गालियां देने लगा. देखते ही देखते बहस इतनी बढ़ गई कि नीरज ने अपनी सरकारी ‘ग्लोक’ पिस्टल निकाल ली. उसने पिस्टल को मोटरसाइकिल के हैंडल पर टिकाया और सीधे पांडव के सीने पर निशाना साधकर ट्रिगर दबा दिया.

एक गोली और दो शिकार

यह वारदात इतनी सोचीसमझी और क्रूर थी कि एक ही गोली ने दो लोगों को अपना निशाना बनाया. गोली पांडव के सीने को चीरती हुई आरपार निकल गई और उसके पीछे बैठे कृष्ण के पेट के दाहिने हिस्से में जा धंसी. पांडव ने मौके पर ही दम तोड़ दिया, जबकि कृष्ण लहूलुहान होकर गिर पड़ा. वारदात को अंजाम देने के बाद आरोपी पुलिसकर्मी को कोई पछतावा नहीं था. प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, वो भागने से पहले भी उन्हें धमकियां देता रहा. घायल कृष्ण को तुरंत राव तुला राम मेमोरियल अस्पताल ले जाया गया, जहां से उसे दीन दयाल उपाध्याय अस्पताल रेफर कर दिया गया. मगर उसकी भी इलाज के दौरान मौत हो गई.

आरोपी की गिरफ्तारी और पुलिस की कार्रवाई

घटना के बाद आरोपी हेड कांस्टेबल नीरज बलहारा ने अपना मोबाइल फोन बंद कर दिया और फरार हो गया. दिल्ली पुलिस ने तुरंत मामले की गंभीरता को देखते हुए कई टीमें गठित कीं. आखिरकार रविवार देर शाम स्पेशल सेल ने ही अपने विभाग के इस भगोड़े जवान को रोहतक के पास से गिरफ्तार कर लिया.

शुरुआती पूछताछ में वह पुलिस को गुमराह करता रहा. पुलिस सूत्रों के अनुसार, नीरज 2006 में बल में शामिल हुआ था और रावता गांव में पिछले 15 वर्षों से किराए पर रह रहा था. स्थानीय लोगों का कहना है कि वह अक्सर आक्रामक व्यवहार करता था. पुलिस ने नीरज के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की हत्या और हत्या के प्रयास की धाराओं के साथसाथ आर्म्स एक्ट के तहत मामला दर्ज किया है. दिल्ली पुलिस कमिश्नर ने इस घटना को गंभीरता से लेते हुए आंतरिक अनुशासन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं.

पांडव की मां मांग रही न्याय

हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक पांडव की मां मीना देवी ने बताया जैसे ही कांस्टेबल को पता चला कि हम बिहार से हैं, उसने गोलियां चला दीं और फरार हो गया. मुझे अपने बेटे के लिए न्याय चाहिए, वह निर्दोष था और सिर्फ एक जन्मदिन की पार्टी में शामिल होने गया था. वह परिवार का सहारा बनने के लिए कड़ी मेहनत कर रहा था. आरोपी को सख्त से सख्त सजा मिलनी चाहिए.

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