
यूपी के कानपुर शहर में इन दिनों एक अनोखा नजारा आम हो गया है। कई रिहायशी इलाकों जैसे किदवई नगर, जूही, कोयला नगर, मंगला बिहार, बर्रा, विश्वबैंक, स्वरूप नगर, कर्नलगंज और अन्य कई इलाकों में घरों के बाहर प्लास्टिक की बोतलें लटकी या रखी दिखाई दे रही हैं, जिनमें लाल रंग का पानी भरा होता है। स्थानीय लोग इसे आवारा कुत्तों (स्ट्रीट डॉग्स) की गंदगी से बचाव का सस्ता और आसान उपाय बता रहे हैं। कुछ लोग इसे टोटका भी करार दे रहे है ।
स्थानीय निवासियों का मानना है कि लाल रंग की ये बोतलें कुत्तों को घर के सामने मल-मूत्र त्याग करने से रोकती हैं। एक निवासी ने कहा, “पहले रोज सुबह-सुबह कुत्तों की गंदगी साफ करनी पड़ती थी। पड़ोसियों ने सुझाया कि लाल कलर मिलाकर पानी की बोतल टांग दो। हमने ट्राई किया और अब घर के बाहर काफी हद तक साफ रहता है।” कई मोहल्लों में तो यह प्रथा तेजी से फैल रही है और लोग इसे प्रभावी ‘जुगाड़’ मान रहे हैं।
यह चलन कानपुर तक सीमित नहीं है। देश के कई शहरों जैसे सागर (मध्य प्रदेश), इंदौर, पुणे, कोलकाता, वाराणसी और राजकोट में भी लोग लाल, नीले या बैंगनी रंग की बोतलें घरों के बाहर टांगते देखे गए हैं। कुछ जगहों पर बोतल में फूड कलर या नील (ब्लूइंग पाउडर) मिलाया जाता है। लोगों का दावा है कि सूरज की रोशनी में बोतल से निकलने वाली चमक या रंग कुत्तों की आंखों में चुभता है, जिससे वे डरकर दूर भागते हैं। कुछ का मानना है कि नील की गंध भी कुत्तों को भगाती है।



