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दिल का दौरा पड़ने पर आसपास के लोग पैनिक हो जाते हैं। किसी को अचानक हार्ट अटैक आ जाए तो हाथ पैर फूल जाते हैं। लेकिन अगर समझदारी से और जल्दी कदम उठाए जाएं तो हार्ट अटैक आने के बाद बचने की संभावना काफी बढ़ जाती है। हार्ट अटैक आने के बाद किन बातों का ख्याल रखना चाहिए। अगर किसी को हार्ट अटैक आए तो सबसे पहले क्या काम करना चाहिए। हार्ट अटैक आने के बाद कैसे मरीज की जान बचाई जा सकती है और हार्ट अटैक आने पर कितने प्रतिशत बचने की संभावना रहती है। इन सारे सवालों के जवाब डॉक्टर से जानते हैं।
नोएडा मेदांता अस्पताल के डॉक्टर अमित कुमार मलिक (डायरेक्टर, इलेक्ट्रोफिज़ियोलॉजी एवं इंटरवेंशनल कार्डियोलॉजी) ने बताया कि हार्ट अटैक के बाद मरीज के बचने की संभावना कई कारकों पर निर्भर करती है, जिनमें सबसे अहम है कितनी जल्दी और कितनी प्रभावी चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराई जाती है। हार्ट अटैक एक मेडिकल इमरजेंसी है, जिसमें हर मिनट की देरी दिल की मांसपेशियों को स्थायी नुकसान पहुंचा सकती है।
तुरंत मेडिकल हेल्प मिलने पर बचने की संभावना बढ़ती है
पिछले दो दशकों में हार्ट अटैक के बाद मृत्यु दर में उल्लेखनीय कमी आई है। इसका मुख्य कारण आधुनिक चिकित्सा तकनीकों की उपलब्धता जैसे समय पर एंजियोप्लास्टी, बेहतर दवाएं, उन्नत आईसीयू सुविधाएं और आपातकालीन कार्डियक केयर सिस्टम का मजबूत होना है। इसके बावजूद आज भी हार्ट अटैक के मामलों में लगभग 5 से 10 प्रतिशत तक मृत्यु दर बनी हुई है।
हार्ट अटैक में गोल्डन आवर हैं अहम
यदि मरीज को लक्षण शुरू होने के पहले “गोल्डन आवर” के भीतर अस्पताल पहुंचा दिया जाए, तो उसके बचने की संभावना काफी बढ़ जाती है। इसके साथ ही जीवनशैली में सुधार, नियमित जांच और लक्षणों की समय पर पहचान हार्ट अटैक से होने वाले जोखिम को कम करने में अहम भूमिका निभाते हैं।
सीपीआर देकर बचाई जा सकती है जान
जब तक मेडिकल हेल्प नहीं मिल जाती तब तक सीपीआर देकर मरीज की जान बचाई जा सकती है। सीपीआर की टेक्निक सभी को आना जरूरी है। इससे दिल का दौरा पड़ने के बाद मरीज की जान बचाने का प्रतिशत काफी बढ़ सकता है।
Disclaimer: (इस आर्टिकल में सुझाए गए टिप्स केवल आम जानकारी के लिए हैं। सेहत से जुड़े किसी भी तरह का फिटनेस प्रोग्राम शुरू करने अथवा अपनी डाइट में किसी भी तरह का बदलाव करने या किसी भी बीमारी से संबंधित कोई भी उपाय करने से पहले अपने डॉक्टर से सलाह जरूर लें। Satya Report किसी भी प्रकार के दावे की प्रामाणिकता की पुष्टि नहीं करता है।)




