ईरान के लिए अब जंग में रूस कूद चुका है। पुतिन ने तो खुल्ला ऐलान भी कर रखा है कि ईरान के लिए रूस हर जगह मौजूद है और उस शक्ति के खिलाफ है जो उसे खत्म करने की सोच रखती है। और यही बयान अब सीधे अमेरिका के लिए सबसे बड़ी चुनौती बनता हुआ दिख रहा है क्योंकि जिस वक्त वाशिंगटन ईरान को घेरने में लगा है उसी वक्त मौस को खुलकर उसके साथ खड़ा नजर आ रहा है। हालिया घटनाक्रम ने साफ कर दिया कि यह सिर्फ कूटनीति नहीं बल्कि खुला पावर गेम है। जहां दो बड़े ब्लॉक आमनेसामने दिख रहे हैं। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास जरा का रूस पहुंचना और वहां व्लादमीर पुतिन से मुलाकात करना महज एक औपचारिक बैठक नहीं थी बल्कि एक रणनीतिक संकेत था कि ईरान अब अकेला नहीं है और उसके पीछे एक बड़ी ताकत खड़ी है।
Hormuz में अब यूं दिखी ईरान-रूस की दोस्ती, बस देखता ही रह गया US!
पुतिन ने साफ कहा कि रूस पश्चिम एशिया में शांति के लिए हर संभव प्रयास करेगा। लेकिन इसके साथ ही उन्होंने ईरान के प्रति समर्थन का जो संदेश दिया वह बहुत स्पष्ट था। साफ था कि मॉस्को इस टकराव में किनारे नहीं रहने वाला। इस बीच जो घटना सामने आई उसने पूरी दुनिया का ध्यान अपनी तरफ खींचा है। जब स्टेट ऑफ होमस जैसे हाई टेंशन जोन से एक विशालकाय रूसी सुपरयाट यानी बिना किसी रुकावट के गुजर गई। यह वही इलाका है जहां अमेरिका और ईरान दोनों सख्ती से निगरानी और नियंत्रण की बात करते हैं। जहां जहाजों की आवाजाही पर सवाल खड़े होते हैं और जहां हर मूवमेंट को लेकर वैश्विक चिंता बनी हुई है। लेकिन इसी रास्ते से नार्ड नाम की सुपर याट निकल जाती है जो दुनिया की सबसे लग्जरी या्स में गिनी जाती है। करीब 142 मीटर लंबी इस याट में 20 स्टेट रूम, स्विमिंग पूल, हेलपैड और यहां तक कि एक सबमरीन भी मौजूद है। इसकी कीमत करीब 500 मिलियन से ज्यादा बताई जाती है। रिपोर्ट्स के मुताबिक यह याठ रूसी अरबपति अलेक्सी मॉर्द शो से जुड़ी हुई है जो पुतिन के बेहद करीबी माने जाते हैं। अब सवाल यही उठता है कि जब आम जहाजों पर सख्ती है जब अमेरिकी नाकेबंदी की बात कर रहा है तब ईरान भी इसी रास्ते को नियंत्रित करने का दावा करता है। फिर आखिर यह यार कैसे निकल गया?
यहीं से यह पूरा मामला सिर्फ एक समुद्री घटना नहीं बल्कि एक बड़ा संकेत बन जाता है कि रूस और ईरान के बीच बढ़ती नजदीकियां जमीन पर भी असर दिखाने लगी हैं। दरअसल ईरान पहले ही साफ कर चुका है कि जब तक अमेरिका का दबाव जारी रहेगा वह इस रास्ते पर नियंत्रण बनाए रखेगा और अमेरिका ने भी यहां अपनी मौजूदगी बढ़ा ली है। लेकिन इसके बावजूद इस तरीके का मूवमेंट यह दिखाता है कि पूरी तस्वीर उतनी सरल नहीं है जितनी दिखाई जा रही है। रूस और ईरान के रिश्ते लंबे समय से मजबूत रहे हैं। लेकिन पिछले कुछ सालों में यह साझेदारी और गहरी हो गई। साल 2025 में दोनों देशों के बीच सुरक्षा और खुफिया सहयोग को लेकर बड़ा समझौता हुआ और अब युद्ध के बाद यह संबंध खुलकर सामने आ रहे हैं। पुतिन ने अरासी से मुलाकात के दौरान यह भी कहा कि उन्हें ईरान के सुप्रीम लीडर मुस्तबा खामनई का संदेश मिला है और उन्होंने उनके अच्छे स्वास्थ्य की कामना की।