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18 या 19 दिसंबर कब है पौष अमावस्या, इस दिन कर लें ये उपाय, खुलेंगे किस्मत के द्वार

18 या 19 दिसंबर कब है पौष अमावस्या, इस दिन कर लें ये उपाय, खुलेंगे किस्मत के द्वार

19 दिसंबर को पौष कृष्ण पक्ष की स्नान-दान-श्राद्धादि अमावस्या है। इस दिन पितरों का श्राद्ध और तर्पण करना चाहिए। पितृ दोष से मुक्ति के लिये और अपने पितरों का आशीर्वाद पाने के लिये इस दिन दूध, चावल की खीर बनाकर, गोबर के उपले या कंडे की कोर जलाकर, उस पर पितरों के निमित्त खीर का भोग लगाना चाहिए। भोग लगाने के बाद थोड़ा-सा पानी लेकर अपने दायें हाथ की तरफ, यानी भोग की बायीं साइड में छोड़ दें। अगर आप दूध-चावल की खीर नहीं बना सकते, तो इस दिन घर में जो भी शुद्ध ताजा खाना बना है, उसका ही पितरों को भोग लगा दें। साथ ही एक लोटे में जल भरकर, उसमें गंगाजल, थोड़ा-सा दूध, चावल के दाने और तिल डालकर दक्षिण दिशा की तरफ मुख करके पितरों का तर्पण करें। चलिए अब जान लेते हैं इस दिन किए जाने वाले उपायों के बारे में विस्तार से यहां।
पौष अमावस्या के उपाय 

  1. हर क्षेत्र में अपनी तरक्की सुनिश्चित करने के लिये इस दिन तुलसी की जड़ से थोड़ी-सी मिट्टी लेकर उसमें पानी मिलाकर लेप बना लें और उस लेप को अपने शरीर पर लगा लें। लेप लगाने के कुछ समय बाद पानी से स्नान कर लें। स्नान के बाद भगवान विष्णु के सामने हाथ जोड़कर प्रणाम करें। आपकी तरक्की के रास्ते जल्द ही खुलेंगे।
  2. जीवन से शत्रुओं का भय मिटाने के लिये इस दिन भगवान विष्णु के 12 नाम लेते हुए उन्हें पीले फूल अर्पित करें। भगवान विष्णु के 12 नाम इस प्रकार हैं- अच्युत, अनंत, दामोदर, केशव, नारायण, श्रीधर, गोविंद, माधव, हृषिकेष,त्रिविकरम, पद्मानाभ और मधुसूदन। एक नाम लें और एक फूल भगवान विष्णु को अर्पित करें। चढ़ाए गए फूलों को शाम के समय भगवान के सामने से हटाकर किसी बहते पानी में प्रवाहित कर दें या पीपल के पेड़ के नीचे रख दें।
  3. अपने परिवार का समाज में मान-सम्मान बनाए रखने के लिये इस दिन किसी कन्या को या किसी जरूरतमंद विवाहित महिला को पीले रंग के वस्त्र देने चाहिए और उनका आशीर्वाद लेना चाहिए। यह उपाय आप आज के दिन भगवान विष्णु की पूजा के बाद किसी भी समय कर सकते हैं।
  4. अगर आपके घर में ‘श्रीमद्भागवत गीता’ रखी हुयी है और आप चाहते हैं कि आपके ऊपर जीवन में कभी किसी प्रकार की मुसीबत न आये तो इस दिन मन्दिर में लाल कपड़ा बिछाकर, उस पर भगवदगीता रखें और 11 बार ‘ऊँ नमो भगवते वासुदेवाय नमः’ मंत्र का जाप करते हुए गीता का दोनों हाथों से स्पर्श करके हाथ अपनी आंखों पर लगाएं। स्कन्द पुराण में भी लिखा है कि- “घर में अगर भागवत हो तो अगहन मास में दिन में एक बार उसको जरूर प्रणाम करना चाहिए। लेकिन अगर आपके घर में ‘श्रीमद्भागवत गीता’ उपलब्ध नहीं है, तो एक कोरा कागज लेकर उस पर लाल स्कैच पेन से ‘श्रीमद्भागवत गीता’ लिखें और उसके नीचे ‘ऊँ नमो भगवते वासुदेवाय नमः’ मंत्र लिखें। अब इस कागज को मन्दिर में लाल रंग के कपड़े पर स्थापित करके 11 बार दोनों हाथों से उसे स्पर्श करके हाथ अपनी आंखों पर लगाएं। अगले दिन उस कागज को और लाल कपड़े को मन्दिर में से उठाकर अपने पास संभाल कर रख लें।
  5. अपनी धन की तिजोरी में बढ़ोतरी के लिये इस दिन श्री विष्णु के साथ मां लक्ष्मी की भी पूजा करें और पूजा के समय 11 अक्षत, यानी चावल के दाने लेकर एक-एक करके मां लक्ष्मी को अर्पित करें। अक्षत चढ़ाते समय मां लक्ष्मी का मंत्र बोलें- “ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं कमले कमलालये प्रसीद प्रसीद श्रीं ह्रीं श्रीं महालक्ष्म्यै नमः” एक अक्षत का दाना चढ़ाएं और मंत्र बोलें- “ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं कमले कमलालये प्रसीद प्रसीद श्रीं ह्रीं श्रीं महालक्ष्म्यै नमः” इसी तरह मंत्र बोलते हुए सारे अक्षत मां को अर्पित कर दें। अगर आपको यह मंत्र बोलने में दिक्कत आये तो आप केवल “श्रीं ह्रीं श्रीं’ मंत्र का जाप भी कर सकते हैं। क्योंकि लक्ष्मी जी का एकाक्षरी मंत्र “श्रीं” ही है। पूजा के बाद इन चावलों कोएक लाल कपड़े में बांधकर अपनी तिजोरी में रख लें।

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