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जलेबी-रबड़ी खाने के बाद 33 साल के युवक को हुआ ‘अस्थाई पैरालिसिस’, डॉक्टरों ने बताई वजह, आप भी बरतें सावधानी

Satya Report: जलेबी और रबड़ी को देखकर अक्सर लोगों की लार टपकने लगती है। मीठा खाने के शौकीनों का ये फूड कॉम्बिनेशन खास पसंद में शामिल है। मीठा खाने का ये शौक एक शख्स को इतना भारी पड़ा कि उनकी बॉडी में अस्थाई लकवा हो गया। मामला है हैदराबाद के 33 साल के रवि का जिन्हें जलेबी और रबड़ी खाने की मामूली सी क्रेविंग सेहत पर बेहद भारी पड़ी। रवि ने बताया जब भी वो इस मीठे कॉम्बिनेशन का सेवन करते, उनके हाथों और पैरों में अचानक कमजोरी महसूस होने लगती। पहली बार ऐसा एक शादी समारोह में हुआ, तब रवि ने इसे फूड पॉइजनिंग  और शादी की थकान समझकर नजरअंदाज कर दिया। लेकिन जब घर की बनी जलेबी और रबड़ी खाने के बाद भी वही समस्या दोबारा रिपीट हुई तो रवि परेशान हो गए। परेशानी का इलाज कराने डॉक्टर के पास गए तो एक दुर्लभ आनुवंशिक बीमारी का पता चला। आइए डॉक्टर से जानते हैं रवि को इस मीठे फूड कॉम्बिनेशन के सेवन से क्यों परेशानी होती है?  

जलेबी-रबड़ी खाने के बाद 33 साल के युवक को हुआ ‘अस्थाई पैरालिसिस’, डॉक्टरों ने बताई वजह, आप भी बरतें सावधानी
जलेबी-रबड़ी खाने के बाद 33 साल के युवक को हुआ ‘अस्थाई पैरालिसिस’, डॉक्टरों ने बताई वजह, आप भी बरतें सावधानी

रवि को कौन सी परेशानी है?

रवि ने हैदराबाद के एक अस्पताल में डॉक्टरों से सलाह ली तो पता चला कि उन्हें हाइपोकॅलेमिक पीरियोडिक पैरालिसिस नामक एक दुर्लभ आनुवंशिक बीमारी है। इस स्थिति में ब्लड में पोटैशियम का स्तर अचानक गिर जाता है, जिससे मांसपेशियों में कमजोरी या अस्थायी लकवा के दौरे पड़ते हैं। उनकी इस बीमारी का जिक्र एक डॉक्टर ने सोशल मीडिया पोस्ट में किया। डॉक्टर ने कहा ऐसा भोजन के बाद इंसुलिन के अचानक बढ़ने के कारण होता है, जिसके परिणामस्वरूप कोशिकाओं में पोटैशियम का अवशोषण बढ़ जाता है, जिससे सीरम पोटैशियम का स्तर कम हो जाता है। इस स्थिति में मांसपेशियों में कमजोरी या अस्थायी लकवा जैसे दौरे पड़ सकते हैं।

क्या जलेबी और रबड़ी सच में पैरालिसिस ट्रिगर कर सकते हैं?

आर्टेमिस हॉस्पिटल्स के न्यूरोलॉजी और एपिलेप्सी विभाग के वरिष्ठ सलाहकार डॉ. विवेक बरुन के अनुसार यह मामला असामान्य है लेकिन चिकित्सकीय रूप से इसकी व्याख्या की जा सकती है। डॉ. बरुन कहते हैं कि Hypokalemic Periodic Paralysis से पीड़ित लोगों के शरीर में पहले से ही खून में पोटैशियम का स्तर सामान्य बनाए रखने में समस्या होती है। जलेबी और रबड़ी में चीनी और कार्बोहाइड्रेट की मात्रा बहुत ज्यादा होती है। इन्हें खाने के बाद शरीर ब्लड शुगर को कंट्रोल करने के लिए बड़ी मात्रा में इंसुलिन रिलीज करता है।

यह इंसुलिन पोटैशियम को बहुत तेजी से खून से कोशिकाओं के अंदर पहुंचा देता है। इससे खून में पोटैशियम का स्तर अचानक गिर जाता है। पोटैशियम मांसपेशियों के सही काम करने के लिए जरूरी होता है, इसलिए इसकी कमी से मांसपेशियां कमजोर हो सकती हैं या अस्थायी लकवा तक हो सकता है, खासकर उन लोगों में जिन्हें पहले से HPP की प्रवृत्ति हो।

कौन से इंडियन फूड इस समस्या को ट्रिगर कर सकते हैं?

डॉ. बरुण ने कहा कि सिर्फ जलेबी और रबड़ी ही नहीं, बल्कि कई अन्य हाईकार्ब फूड्स भी ऐसे अटैक को ट्रिगर कर सकते हैं। एक्सपर्ट ने बताया ज्यादा कार्बोहाइड्रेट वाले खाद्य पदार्थ इंसुलिन को तेजी से बढ़ाते हैं। HPP वाले लोगों में यह इंसुलिन पोटैशियम को सामान्य से ज्यादा तेजी से कोशिकाओं में भेज देता है, जिससे खून में पोटैशियम खतरनाक स्तर तक कम हो सकता है। उन्होंने कहा कि सफेद चावल, गुलाब जामुन और रसगुल्ले जैसी मिठाइयां, मीठे पेय पदार्थ, आलू, मैदे से बनी चीजें जैसे नान और भटूरे और बहुत ज्यादा मिठाई खाना भी ऐसे अटैक का कारण बन सकता है।डॉक्टर ने चेतावनी दी कि एक बार में बहुत ज्यादा कार्बोहाइड्रेट खाना, खासकर लंबे समय तक भूखे रहने के बाद, इस जोखिम को बढ़ा सकता है।

शुरुआती लक्षण जिन्हें लोग अक्सर नजरअंदाज कर देते हैं

डॉ. बरुण के अनुसार HPP के शुरुआती लक्षण छोटे और सामान्य लग सकते हैं, इसलिए लोग अक्सर उन्हें गंभीरता से नहीं लेते। एक्सपर्ट ने बताया कि शुरुआत में व्यक्ति को असामान्य थकान, पैरों में भारीपन, सीढ़ियां चढ़ने में कठिनाई, पकड़ कमजोर होना, मांसपेशियों में ऐंठन या हल्की जकड़न महसूस हो सकती है। एक्सपर्ट ने बताया कमजोरी आमतौर पर पैरों से शुरू होती है और धीरेधीरे हाथों तक पहुंच सकती है। इसमें दर्द या सुन्नपन नहीं होता, जो इसे दूसरी बीमारियों से अलग बनाता है। ये लक्षण अक्सर भारी भोजन के बाद, एक्सरसाइज के बाद आराम करने पर, भावनात्मक तनाव या लंबे समय तक भूखे रहने के बाद दिखाई देते हैं। डॉ. बरुण ने कहा अगर इस पैटर्न को समय रहते पहचान लिया जाए और इलाज कराया जाए, तो गंभीर पैरालिसिस और अन्य जटिलताओं से बचा जा सकता है।

अचानक होने वाले पैरालिसिस अटैक से कैसे बच

पैरालिसिस यानी लकवा मस्तिष्क, रीढ़ की हड्डी या नसों को नुकसान होने के कारण शरीर के किसी हिस्से की मांसपेशियों के काम करना बंद करने या हिलानेडुलाने में असमर्थ होने की स्थिति है। यह अस्थायी या स्थायी हो सकता है, जो शरीर के एक हिस्से या अंगों को प्रभावित कर सकता है। इसका मुख्य कारण स्ट्रोक, रीढ़ की हड्डी में चोट, या तंत्रिका संबंधी विकार हैं। डॉ. बरुण के अनुसार, HPP से पीड़ित लोगों को अपनी खाने की आदतों को नियमित रखना बेहद जरूरी है। उन्होंने सलाह दी कि बहुत ज्यादा कार्बोहाइड्रेट वाले बड़े भोजन की बजाय छोटे और संतुलित भोजन करें, जिनमें प्रोटीन, फाइबर और नियंत्रित मात्रा में कार्बोहाइड्रेट शामिल हों।

एक्सपर्ट ने बताया हर दिन लगभग एक ही समय पर खाना खाना जरूरी है। ज्यादा चीनी और रिफाइंड कार्ब्स वाले खाद्य पदार्थों का सेवन कम करें। डॉक्टर ने यह भी बताया कि शरीर में पानी और इलेक्ट्रोलाइट्स का संतुलन बनाए रखना बेहद जरूरी है। कुछ मामलों में डॉक्टर पोटैशियम सप्लीमेंट या दवाइयां भी दे सकते हैं। डॉक्टर ने बताया कि पोटैशियम से भरपूर चीजें या सप्लीमेंट केवल डॉक्टर की सलाह पर ही लेना चाहिए। इसके अलावा उन्होंने लंबे समय तक भूखे रहने, जरूरत से ज्यादा एक्सरसाइज करने और तनाव को कंट्रोल करने की सलाह दी, क्योंकि ये सभी चीजें ऐसे अटैक को ट्रिगर कर सकती हैं।

डिस्क्लेमर: इस लेख में दी गई जानकारी रिपोर्ट किए गए एक विशेष मामले और सामान्य डॉक्टरी परामर्श पर आधारित है। पैरालिसिस या किसी भी गंभीर स्वास्थ्य समस्या के पीछे कई जटिल मेडिकल कारण हो सकते हैं। लेख में बताए गए खाद्य पदार्थों का प्रभाव हर व्यक्ति के शरीर और स्वास्थ्य स्थिति पर अलग हो सकता है। जनसत्ता इसकी पुष्टि नहीं करता कि ये खाद्य पदार्थ सभी के लिए हानिकारक हैं। किसी भी लक्षण के दिखने पर स्वयं उपचार करने के बजाय तुरंत किसी विशेषज्ञ डॉक्टर से सलाह लें।

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