IndiaTrending

ब्रह्मास्त्र जैसी मिसाइल, 2700 km रेंज, अमेरिका क्यों कर रहा डार्क ईगल की तैनाती, कितनी पावरफुल?

Satya Report: दुनिया आजकल डार्क ईगल की चर्चा कर रही है. यह अमेरिका का वह हथियार है, जो ध्वनि से पांच गुना ज्यादा रफ्तार से हवा में कुलांचें भरने में सक्षम है. इसी वजह से इसे रोकना बेहद मुश्किल है. अमेरिका इसे फिलहाल ईरान के खिलाफ इस्तेमाल करने का मन बना चुका है. यह खुलासा होना बाकी है कि यह अमेरिका की केवल दबाव बनाने की रणनीति का हिस्सा है या फिर से युद्ध भड़क सकता है.

ब्रह्मास्त्र जैसी मिसाइल, 2700 km रेंज, अमेरिका क्यों कर रहा डार्क ईगल की तैनाती, कितनी पावरफुल?
ब्रह्मास्त्र जैसी मिसाइल, 2700 km रेंज, अमेरिका क्यों कर रहा डार्क ईगल की तैनाती, कितनी पावरफुल?

आइए, जानते हैं कि यह हाइपर सोनिक मिसाइल कितनी खास है? कैसे दुश्मन पर कहर बनकर टूटती है? क्या हैं इसकी खूबियां?

डार्क ईगल को खास क्या बनाता है?

  • बहुत तेज गति: हाइपरसोनिक का मतलब होता है मैक5 या उससे ज्यादा. यानी आवाज की गति से कई गुना तेज. यह जब हमलावर होता है तो दुश्मन के पास प्रतिक्रिया का समय न के बराबर रहता है. डिफेंस सेक्टर के जानकार इसे लॉंग रेंज हाइपरसोनिक वैपन प्रणाली कहते हैं.
  • उड़ान का रास्ता बदलने की क्षमता: रिपोर्ट्स के मुताबिक इसमें ग्लाइड बॉडी जैसी अवधारणा का जिक्र आता है. ऐसी बॉडी ऊपरी वायुमंडल में तेज गति से उड़ते हुए पैतरेबाजी करने में सक्षम है. इसी वजह से पारंपरिक एयर डिफेंस के लिए इसे ट्रैक करना कठिन हो जाता है.
  • लंबी दूरी पर भी सटीक निशाना: इसकी मारक क्षमता 2500 किलो मीटर से 2700 किलो मीटर तक है. इस रेंज का मतलब है कि यह सिस्टम दूर बैठे टारगेट तक आसानी से पहुंच सकता है. ऐसे टारगेट जो सामान्य टैक्टिकल मिसाइलों की सीमा से बाहर हों. यह बात खास तब बनती है, जब लक्ष्य मोबाइल हो या अंदरूनी इलाकों में शिफ्ट कर दिए गए हों.

डार्क ईगल.

यह सिस्टम असल में है क्या?

डार्क ईगल को अक्सर एक हाइपरसोनिक वेपन सिस्टम कहा जाता है. यानी यह केवल एक मिसाइल नहीं है. इसमें लॉन्चर, कमांडएंडकंट्रोल और मिसाइल, ग्लाइड बॉडी जैसी चीजें शामिल होती हैं. कुछ स्रोत इसे मोबाइल ग्राउंडबेस्ड बैटरी के रूप में भी समझाते हैं.

2,700 किमी रेंज क्यों मायने रखती है?

  • स्टैंडऑफ अटैक की क्षमता: लंबी रेंज का फायदा यह होता है कि लॉन्च प्लेटफॉर्म को दुश्मन के ज्यादा करीब नहीं जाना पड़ता. इससे अपने सैनिकों और बेस की सुरक्षा बढ़ सकती है.
  • हाईवैल्यू टारगेट पर दबाव: ऐसे हथियारों का उद्देश्य अक्सर यह बताया जाता है कि वे हाईवैल्यू और हाईप्रोटेक्शन वाले ठिकानों पर दबाव बना सकें. यानी कमांड सेंटर, बंकर या मिसाइल लॉन्चिंग से जुड़े ठिकाने आदि.
  • डिटरेंस का संकेत: कई बार तैनाती या तैनाती पर विचार भी एक संदेश होता है. यह संदेश विरोधी को यह बताता है कि लंबी दूरी की तेज स्ट्राइक मौजूद है.

अमेरिका डार्क ईगल को लेकर क्या सोच रहा है?

हाल की रिपोर्ट्स में यह बात सामने आई है कि अमेरिका की सेंटकॉम यानी यूएस सेंट्रल कमांड ने मध्यपूर्व में डार्क ईगल तैनात करने पर विचार कर रहा है. बताया गया है कि कुछ परिदृश्यों में लक्ष्य ऐसे इलाकों में चले गए हैं जो मौजूदा कुछ हथियारों की पहुंच से बाहर हो सकते हैं. इसी वजह से डार्क ईगल की चर्चा शुरू हो गई.

  • तैनाती को लेकर सावधानी: कई रिपोर्ट्स में संकेत मिलते हैं कि यह सिस्टम सीमित संख्या में है और इसे तैनात करना एक बड़ा फैसला हो सकता है. क्योंकि इससे तकनीक, रणनीति और जोखिम, तीनों जुड़ जाते हैं, इसलिए सावधानी जरूरी है.
  • लागत और उपलब्धता पर बहस: रिपोर्ट्स में इसकी लागत की भी चर्चा हो रही है. बताया जाता है कि एक मिसाइल की कीमत और पूरे सिस्टम, बैटरी आदि की लागत बहुत ज्यादा है. जब हथियार महंगा हो और संख्या कम हो, तो कहां तैनात किया जाए और कब इस्तेमाल किया जाए, इस पर सावधानी जरूरी होती है.
  • बड़े प्रतिद्वंद्वी बनाम क्षेत्रीय संकट: डार्क ईगल जैसे हाइपरसोनिक सिस्टम को अक्सर चीन और रूस जैसे बड़े प्रतिद्वंद्वियों के संदर्भ में भी देखा जाता है, लेकिन जब क्षेत्रीय संकट बढ़ता है, तो वही सिस्टम दूसरे थिएटर में भी चर्चा में आ सकता है. यही रणनीतिक खिंचाव अमेरिका की सोच में दिखता है.

इस तरह की तैनाती से क्या असर पड़ सकता है?

  • तनाव बढ़ने का जोखिम: नई और तेज क्षमता की तैनाती विरोधी को भी अपनी तैयारी बढ़ाने के लिए उकसा सकती है. यह एक एक्शनरिएक्शन चक्र बना सकता है.
  • हथियारों की दौड़ तेज हो सकती है: हाइपरसोनिक सिस्टम दुनिया में पहले से एक प्रतिस्पर्धी क्षेत्र है.एक तैनाती दूसरे देशों को निवेश बढ़ाने के लिए प्रेरित कर सकती है.
  • रक्षा प्रणालियों पर दबाव: तेज और पैतरेबाजी में सक्षम हथियारों से एयर डिफेंस नेटवर्क पर दबाव बढ़ता है. फिर रडार, इंटरसेप्टर, और सेंसर नेटवर्क को अपग्रेड करने की जरूरत बढ़ती है.

2700 किमी रेंज वाली डार्क ईगल चर्चा में इसलिए है क्योंकि यह लंबी दूरी, बहुत तेज गति, और पैतरेबाजी में सक्षम है. अमेरिका के लिए यह एक नई श्रेणी की स्ट्राइक क्षमता है और इसी वजह से इसकी तैनाती पर सोच रणनीतिक भी है और राजनीतिक भी. रिपोर्ट्स के मुताबिक, अमेरिका इसे लेकर अवसर और जोखिम दोनों को तौल रहा है. फिर कोई फैसला लेगा.

contact.satyareport@gmail.com

Leave a Reply