Vat Savitri Vrat Me Kya Na Kare: 16 मई 2026 को वट सावित्री व्रत रखा जा रहा है। धर्म शास्त्रों में बताया गया है कि, यह व्रत न केवल पति की लंबी आयु की कामना के लिए रखा जाता है, बल्कि यह देवी सावित्री के त्याग और संकल्प का प्रतीक भी है। ज्येष्ठ महीने की अमावस्या को मनाए जाने वाले इस पर्व पर बरगद के वृक्ष की विशेष रूप से पूजा की जाती है।

ऐसी मान्यता है कि वट वृक्ष में साक्षात त्रिदेव का वास होता है। लेकिन, अक्सर महिलाएं श्रद्धा में कुछ ऐसी गलतियां कर बैठती हैं, जिससे पूजा का पूरा फल नहीं मिलता है।
बरगद की पूजा करते समय भूलकर भी न करें ये गलतियां
धर्म ग्रथों के अनुसार, वट सावित्री के दिन बरगद की पूजा करते समय कुछ बातों का विशेष ध्यान रखना बेहद जरूरी है। जो इस प्रकार है
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सूत बांधने की गलत दिशा
वट वृक्ष की परिक्रमा करते समय या कलावा बांधा जाता है। ध्यान रहे कि परिक्रमा हमेशा घड़ी की दिशा में ही करनी चाहिए। विपरीत दिशा में घूमना अशुभ माना जाता है और इससे दोष लग सकता है।
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अशुद्ध सामग्री का प्रयोग न करें
बताया जाता है कि, सावित्री की पूजा में काले या नीले रंग के वस्त्रों का प्रयोग वर्जित माना गया है। सुहागिन महिलाओं को लाल, पीला या नारंगी जैसे शुभ रंगों के वस्त्र ही पहनने चाहिए। साथ ही, बासी फूल या अशुद्ध जल का प्रयोग न करें।
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वृक्ष की टहनियां तोड़ना अशुभ
वट वृक्ष को सनातन धर्म में अत्यंत पूजनीय माना गया है। ऐसे में पूजा के नाम पर उसकी टहनियां तोड़ना शुभ नहीं माना जाता। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, जिस वृक्ष की पूजा की जा रही हो, उसे नुकसान पहुंचाना पाप के समान माना जाता है।
इसलिए वट सावित्री व्रत या किसी भी पूजा में बरगद की डाली तोड़ने से बचना चाहिए। यदि घर पर पूजा करनी हो, तो छोटे पौधे या वट वृक्ष के चित्र का उपयोग करना अधिक उचित माना गया है।
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कथा न सुनना या बीच में उठना
धर्म शास्त्रों में बताया गया है कि, का फल तभी मिलता है, जब आप सावित्री और सत्यवान की कथा पूरी श्रद्धा के साथ सुनती हैं। कथा के बीच में उठकर जाना या अन्य बातों में मन लगाना पूजा के संकल्प को तोड़ देता है। इसलिए ऐसी गलती करने से बचना चाहिए।
कैसे करें वट सावित्री का व्रत?
धार्मिक एवं लोक मान्यता के अनुसार, व्रत के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और नए वस्त्र व सोलह श्रृंगार धारण करें। फिर बांस की टोकरी में सात प्रकार के अनाज, सावित्रीसत्यवान की मूर्तियां,धूप, दीप, घी, फल और फूल रखें।
इसके बाद सबसे पहले वट वृक्ष की जड़ में जल चढ़ाए। फिर पेड़ को रोली, अक्षत और भीगे हुए चने व गुड़ का भोग लगाएं. हाथ में भीगे चने लेकर सावित्रीसत्यवान की कथा सुनें या पढ़ें।
वट सावित्री व्रत का धार्मिक महत्व
सनातन धर्मं में वट सावित्री व्रत का धार्मिक महत्व है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, वट सावित्री व्रत की कथा सावित्री और सत्यवान से जुड़ी है। बताया जाता है कि, सावित्री ने अपने तप, बुद्धि और दृढ़ संकल्प से यमराज से अपने पति के प्राण वापस ले लिए थे। इसी कारण यह व्रत वैवाहिक जीवन की मजबूती और पति की दीर्घायु के लिए रखा जाता है।



