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‘गुंडा’ से ‘जानी दुश्मन’ तक, फ्लॉप होने के बावजूद कल्ट क्लासिक बन गईं ये फिल्में

फिल्म हिट है या फ्लॉप ये बॉक्स ऑफिस नंबर तय करते हैं, लेकिन फिल्म क्लासिक बने ये कमाई पर निर्भर नहीं करता है। कई ऐसी फिल्में रही हैं जिन्हें रिलीज के वक्त दर्शकों ने पसंद नहीं किया, क्रिटिक्स ने भी खास तवज्जो नहीं दी, लेकिन समय बीतने के साथ वही फिल्में कल्ट क्लासिक बन गईं।

‘गुंडा’ से ‘जानी दुश्मन’ तक, फ्लॉप होने के बावजूद कल्ट क्लासिक बन गईं ये फिल्में
‘गुंडा’ से ‘जानी दुश्मन’ तक, फ्लॉप होने के बावजूद कल्ट क्लासिक बन गईं ये फिल्में

आज हम ऐसी ही कुछ फिल्मों के बारे में बताने जा रहे हैं, जिनके डायलॉग, किरदार, ओवरदटॉप सीन और अनोखा अंदाज आज भी सोशल मीडिया पर वायरल होते रहते हैं। आइए जानते हैं ऐसी ही कुछ फिल्मों के बारे में, जो फ्लॉप होने के बावजूद लोगों को याद रह गई।

गुंडा

1998 में आई मिथुन चक्रवर्ती स्टारर ‘गुंडा’ रिलीज के समय बुरी तरह फ्लॉप साबित हुई थी। फिल्म की कहानी, अजीबोगरीब डायलॉग और ओवरएक्टिंग का खूब मजाक उड़ाया गया। लेकिन बाद में यही चीजें इसकी पहचान बन गईं। ‘मेरा नाम है बुल्ला…’ जैसे डायलॉग आज भी मीम कल्चर का हिस्सा हैं। इंटरनेट और यूट्यूब के दौर में फिल्म को नई जिंदगी मिली और अब इसे बॉलीवुड की सबसे बड़ी ‘सोबैडइट्सगुड’ फिल्मों में गिना जाता है।

जानी दुश्मन

साल 2002 में आई अक्षय कुमार, सनी देओल, सुनील शेट्टी और कई बड़े सितारों से सजी यह मल्टीस्टारर फिल्म बॉक्स ऑफिस पर असफल रही थी। कमजोर वीएफएक्स और अजीब कहानी के कारण इसे काफी आलोचना झेलनी पड़ी। मगर समय के साथ फिल्म के कई सीन और डायलॉग सोशल मीडिया पर वायरल होने लगे। आज यह फिल्म अपने “ओवरदटॉप एंटरटेनमेंट” के कारण कल्ट फैन फॉलोइंग रखती है।

अंदाज अपनाअपना

साल 1994 में आई बॉक्स ऑफिस पर फ्लॉप साबित हुई थी। लेकिन टीवी रीरन और वीडियो कैसेट्स के जरिए फिल्म धीरेधीरे लोगों तक पहुंची। आज ‘तेजा मैं हूं, मार्क इधर है’ और ‘क्राइम मास्टर गोगो’ जैसे किरदार पॉप कल्चर का हिस्सा बन चुके हैं। इसे बॉलीवुड की बेस्ट कॉमेडी फिल्मों में गिना जाता है।

अगनीपथ

साल 1990 में आई अमिताभ बच्चन की ये फिल्म शुरुआत में दर्शकों को ज्यादा पसंद नहीं आई थी। अमिताभ की भारी आवाज और डार्क टोन को लेकर आलोचना हुई। लेकिन बाद में विजय दीनानाथ चौहान का किरदार इतना लोकप्रिय हुआ कि फिल्म बॉलीवुड की आइकॉनिक फिल्मों में शामिल हो गई। अमिताभ को इसके लिए नेशनल अवॉर्ड भी मिला था।

स्वदेश

साल 2004 में आई शाहरुख खान की फिल्म ‘स्वदेश’ फिल्म रिलीज के वक्त बॉक्स ऑफिस पर उम्मीद के मुताबिक प्रदर्शन नहीं कर पाई थी। उस समय दर्शकों को इसकी धीमी रफ्तार और गंभीर विषय ज्यादा पसंद नहीं आया। लेकिन बाद में इसकी कहानी, देशभक्ति और इमोशनल अपील ने इसे क्लासिक बना दिया। आज भी ‘स्वदेस’ को शाहरुख के करियर की सबसे बेहतरीन फिल्मों में गिना जाता है।

रॉकेट सिंह

साल 2009 में आई रणबीर कपूर की ये फिल्म थिएटर में दर्शक तक नहीं जुटा पाई थी, मगर जिन्होंने भी इसे देखा, खूब पसंद किया। कॉर्पोरेट लाइफ और ईमानदारी की कहानी ने बाद में युवाओं के बीच इसे बेहद लोकप्रिय बना दिया। आज ‘रॉकेट सिंह’ को अंडररेटेड जेम माना जाता है।

तमाशा

साल 2015 में आई रणबीर कपूर और दीपिका पादुकोण की इस फिल्म को मिलीजुली प्रतिक्रिया मिली थी। लेकिन समय के साथ इसकी कहानी और इमोशनल गहराई युवाओं को खूब पसंद आई। आज ‘तमाशा’ को सेल्फडिस्कवरी पर बनी सबसे खास बॉलीवुड फिल्मों में माना जाता है।

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